आज 12 जून 2026, अहमदाबाद प्लेन हादसे को एक साल पूरा हो गया है। जब एअर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही क्रैश हुआ, तब इसमें सवार 260 लोगों में से एकमात्र बचे शख्स विश्वास कुमार रमेश है। वह अपने भाई को इस दुर्घटना में खो चुके हैं और उनके दर्द का कोई मोल नहीं है। विश्वास ने कहा, “हम सभी को यह जानने का हक है कि उस दिन हुआ क्या था।”
खौफनाक यादें और न्याय की मांग
रमेश ने अपनी भावनाओं को साझा करते हुए बताया कि वह आज भी उस दिन की घटनाओं को भुला नहीं पाए हैं। “जब मैं आंखें बंद करता हूं, मुझे वो चीखें और आग याद आती हैं,” उन्होंने कहा। नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा है कि दुर्घटना की जांच अंतिम चरण में है, लेकिन इसके बारे में जानकारी स्पष्ट नहीं है। रमेश ने ईमानदारी और पारदर्शिता की मांग की है।
भारी मानसिक आघात और जीवन की मुश्किलें
रमेश मानते हैं कि यह हादसा केवल उनका व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों का मामला है। उन्होंने कहा, “मेरा जीवन पूरी तरह से बदल चुका है। एअर इंडिया ने 21,500 पाउंड की मदद की, लेकिन यह मेरी स्थिति के सामने नगण्य है।” वह लंदन में अपने परिवार का खर्चा एक लाख रुपये से कम में चलाने की कोशिश कर रहे हैं।
एअर इंडिया का मुआवजा और प्रतिक्रिया
एअर इंडिया ने दावा किया है कि उसने 96% पीड़ित परिवारों को 25-25 लाख रुपए का मुआवजा दे दिया है। हालांकि, जिन परिवारों के डॉक्यूमेंटेशन अधूरे हैं, उन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। एअर इंडिया के प्रवक्ता का कहना है कि वह प्रभावित परिवारों के साथ संपर्क में हैं। लेकिन ये वादे निभाने की जरूरत है।


