वो 32 सेकंड और 260 मौतें: अहमदाबाद विमान हादसे के एक साल बाद भी हरे हैं जख्म

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अहमदाबाद AI-171 त्रासदी की पहली बरसी: तकनीकी खराबी थी या मानवीय चूक? क्या है पूरी हकीकत

अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 दुर्घटना को एक साल पूरा हो गया है। इस हादसे ने हर किसी के दिल में एक गहरी छाप छोड़ी है। 12 जून 2025 को लंदन जाने वाली फ्लाइट ने मेघानीनगर में BJ मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस त्रासदी में विमान में सवार 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की जान गई। केवल एक यात्री इस हादसे में जिंदा बचा था।

हादसे के निशान आज भी जिंदा

एक साल बाद भी BJ मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में उस दिन की यादें ताजा हैं। जहां विमान का मलबा गिरा था, वहां आज भी खून के धब्बे देखे जा सकते हैं। परिवार आज भी इस दर्द को झेल रहे हैं। कुछ लोग फ्लाइट भरने से डरते हैं, जबकि कई लोग मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग करवा रहे हैं।

DGP ज्ञानेंद्र सिंह मलिक का अनुभव

गुजरात के DGP ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि यह उनके करियर का सबसे दर्दनाक अध्याय है। उन्होंने उस दिन की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 30 मिनट के भीतर 500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को मौके पर भेजा था। मलिक ने बताया कि वे हादसे के कुछ ही समय बाद घटनास्थल पर पहुंचे थे, जहां जले हुए शवों को देखना उनके लिए बहुत दर्दनाक था।

12 जून 2025 की भयावह यादें

2 जून 2025 को गुजरात के अहमदाबाद में हुआ एयर इंडिया एक्सप्रेस विमान हादसा (उड़ान संख्या AI-171) स्वतंत्र भारत के विमानन इतिहास की सबसे दर्दनाक और हैरान करने वाली त्रासदियों में से एक है। लंदन गैटविक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भर रहा बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान टेकऑफ के महज 32 सेकंड बाद बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर पर क्रैश हो गया। इस भयावह दुर्घटना में 260 निर्दोष लोगों की असमय मृत्यु हो गई, जिसमें विमान में सवार 241 लोग और जमीन पर मौजूद 19 लोग शामिल थे।

वो मनहूस रात और 32 सेकंड का घटनाक्रम

12 जून 2025 की रात सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (अहमदाबाद) पर रनवे 23 से एयर इंडिया एक्सप्रेस के ड्रीमलाइनर विमान ने उड़ान भरी। विमान में कुल 229 यात्री और 13 क्रू मेंबर्स सवार थे। रात 01:42:10 पर विमान के पहियों ने रनवे छोड़ा। टेकऑफ सामान्य था। रात 01:42:25 बजे विमान महज 900 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा था कि अचानक इसके दोनों जीई एयरोस्पेस (General Electric) इंजनों ने काम करना बंद कर दिया।

आपातकालीन संदेश भेजने का भी मौका नहीं मिला

रात 01:42:42 पर कॉकपिट से ‘Mayday’ भेजने का भी समय नहीं मिला। विमान अत्यधिक तेज गति से अहमदाबाद के मेघाणीनगर इलाके में स्थित बीजे मेडिकल कॉलेज के मैरिड पीजी हॉस्टल की इमारत से जा टकराया। टक्कर इतनी भीषण थी कि हॉस्टल की तीन मंजिला इमारत ढह गई और विमान के ईंधन टैंक में विस्फोट होने से चारों तरफ आग का तांडव फैल गया।

फोरेंसिक साइंटिस्ट HP संघवी की यादें

गुजरात डायरेक्टरेट ऑफ फोरेंसिक साइंसेज के निदेशक HP संघवी ने कहा कि उनकी टीम ने मारे गए लोगों की पहचान के लिए कई कठिनाइयों का सामना किया। उन्होंने बताया कि घटना के दौरान उन्हें एक कटे हुए हाथ की तस्वीर सच में भयानक लगी। संघवी ने कहा कि वह हमेशा उस हादसे में मरे लोगों का डरावना दृश्य याद रखेंगे।

पीड़ितों के अनुभवों की कहानी

इस हादसे के एक साल बाद, कई लोग अब भी अपने दुख भरे अनुभवों को साझा कर रहे हैं। उन परिवारों की कहानी, जिन्होंने अपनों को खोया, आज भी सुनाई देती है। विभिन्न रेस्क्यू टीमों के सदस्यों ने अपनी आपदाओं में दौड़ने की दुश्वारियों को बताया।

विश्वास कुमार रमेश: मौत के मुंह से लौटे इकलौते गवाह

इस दर्दनाक हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से केवल एक व्यक्ति जीवित बचा 34 वर्षीय ब्रिटिश-भारतीय नागरिक विश्वास कुमार रमेश। सीट संख्या 11A पर बैठे विश्वास के लिए यह किसी पुनर्जन्म से कम नहीं था। हादसे के एक साल बाद अपना अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि विमान के टकराते ही उनकी सीट का हिस्सा टूटकर मलबे से बाहर की तरफ गिर गया, जिससे वे आग की लपटों से बच गए। हालांकि, इस हादसे में उन्होंने अपने सगे छोटे भाई अजय को खो दिया, जो उनसे महज दो सीट पीछे बैठा था। विश्वास आज भी शारीरिक चोटों से उबर चुके हैं, लेकिन “सरवाइवर गिल्ट” (अकेले जीवित बचने का मानसिक बोझ) और उस रात के भयानक दृश्य आज भी उन्हें सोने नहीं देते।

जांच रिपोर्ट और ‘फ्यूल स्विच’ का बड़ा विवाद

दुर्घटना की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है। हादसे के एक साल बाद भी अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आ सकी है, जिसने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है-
फ्यूल कंट्रोल स्विच का बंद होना: ब्लैक बॉक्स (FDR और CVR) के शुरुआती आंकड़ों से पता चला है कि विमान के दोनों इंजनों के ‘फ्यूल कंट्रोल स्विच’ अचानक ‘RUN’ (चालू) से ‘CUTOFF’ (बंद) मोड पर आ गए थे। इस वजह से इंजनों को ईंधन की आपूर्ति तुरंत रुक गई।
मैनुअल बनाम तकनीकी खराबी: विमानन क्षेत्र के कुछ विदेशी विशेषज्ञों और बोइंग के करीबियों का दावा है कि यह स्विच मानवीय चूक (पायलटों द्वारा गलती से या जानबूझकर) के कारण बंद हुआ।
पायलटों का बचाव और विरोध: भारतीय पायलट एसोसिएशन और क्रू के परिजनों ने इस दावे को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि कैप्टन सुमित सबरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर बेहद अनुभवी पायलट थे।

अनकमांडेड स्विच मूवमेंट का अंदेशा

दोनों स्विचों का एक साथ, बिना किसी स्पष्ट कारण के बंद होना किसी गंभीर इलेक्ट्रॉनिक या मैकेनिकल फॉल्ट की ओर इशारा करता है। जांच एजेंसियां फिलहाल यूएसए में इंजनों की आंतरिक वायरिंग की जांच कर रही हैं, जिसमें 3 महीने का समय और लग सकता है।

ग्राउंड जीरो का पुनर्निर्माण और मुआवजा नीति

हादसे के बाद मेघाणीनगर और सिविल अस्पताल परिसर की सूरत पूरी तरह बदल गई है। सरकार और एयरलाइन द्वारा उठाए गए कदम इस प्रकार हैं-
नया हॉस्टल प्रोजेक्ट: गुजरात सरकार ने पूरी तरह नष्ट हो चुके बीजे मेडिकल कॉलेज हॉस्टल की जगह 105 करोड़ रुपये की लागत से एक नए बहुमंजिला ‘सुपर स्पेशियलिटी मैरिड पीजी हॉस्टल’ के निर्माण को मंजूरी दी है।
एअर इंडिया का अंशदान: इस नए हॉस्टल की कुल निर्माण लागत में से 53.12 करोड़ रुपये का भुगतान एअर इंडिया मुआवजे के रूप में सीधे सरकार को कर रही है।
जमीन पर मारे गए लोगों को मुआवजा: हॉस्टल में रहने वाले जो 19 मेडिकल छात्र और कर्मचारी मारे गए थे, उनके परिवारों को कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रति व्यक्ति ₹1.2 करोड़ से ₹2 करोड़ तक का मुआवजा स्वीकृत किया गया है।
यात्रियों के परिवारों की कानूनी लड़ाई: अंतर्राष्ट्रीय विमानन नियमों (मॉन्ट्रियल कन्वेंशन) के तहत विमान में सवार यात्रियों के परिजनों को मिलने वाले अंतिम मुआवजे की राशि पर अभी भी बीमा कंपनियों और कानूनी टीमों के बीच बातचीत चल रही है, क्योंकि अंतिम जांच रिपोर्ट आना बाकी है।

भविष्य में सुरक्षा की आवश्यकता

इस घटना ने विमानन सुरक्षा की आवश्यकताओं को फिर से उजागर किया है। फ्लाइट हादसों से बचने के लिए सख्त नियम और नीति लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। इस हादसे की यादें केवल परिवारों ही नहीं, बल्कि समाज को भी जागरूक करने का काम कर रही हैं।

हादसे का गहरा असर

आज भी, वह दिन जब AI-171 दुर्घटनाग्रस्त हुआ, हर किसी के लिए एक भयानक घटना है। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल पीड़ितों के परिवारों को बल्कि पूरे समुदाय को हिला कर रख दिया है। असली मानवता और संवेदना की जरूरत आज भी महसूस की जा रही है।

इंसाफ और सुरक्षा का अधूरा इंतजार

अहमदाबाद विमान हादसे को आज एक साल बीत जाने के बाद भी जख्म पूरी तरह हरे हैं। यह त्रासदी हमें याद दिलाती है कि विमानन सुरक्षा में एक छोटी सी तकनीकी खामी या चूक सैकड़ों परिवारों को कभी न भरने वाले जख्म दे सकती है। जब तक AAIB अपनी अंतिम और निष्पक्ष रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करता, तब तक मारे गए यात्रियों के परिवारों को न तो मानसिक शांति मिल पाएगी और न ही यह साफ हो सकेगा कि उस रात असल में दोषी कौन था, बोइंग की तकनीक या किस्मत!

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