2029 से पहले बीजेपी का बड़ा मास्टरप्लान? महिला आरक्षण और परिसीमन से बदलेंगे चुनावी समीकरण

The CSR Journal Magazine
बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को इस बात का पूरा अहसास है कि 2029 की चुनावी डगर, 2024 के मुकाबले कहीं अधिक कठिन हो सकती है. इसलिए, पार्टी ने दो प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है—महिला आरक्षण और परिसीमन. क्या आने वाले समय में इन मुद्दों से राजनीतिक समीकरण बदलेंगे? हर कोई इसी का इंतजार कर रहा है.

महिलाओं के लिए आरक्षण की ज़रूरत

महिला आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी ने पिछले कुछ सालों में काफी ध्यान दिया है. यह न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जरूरी है, बल्कि पार्टी को भी वोट बैंक में बढ़त दिला सकता है. यदि यह बिल संसद में पास होता है, तो बीजेपी को मुद्दा आधारित राजनीति में फायदा होने की उम्मीद है.

परिसीमन का खेल

परिसीमन की प्रक्रिया का असर जम्मू-कश्मीर और असम में पहले से देखने को मिला है. जम्मू में 6 नई विधानसभा सीटें जोड़ी गईं, जिससे बीजेपी को राजनीतिक लाभ मिला. अब बीजेपी की नजर उन राज्यों पर है जहां 2024 में उसे सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा था—उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल.

विपक्षी एकता की चुनौती

इन तीन राज्यों में लोकसभा की कुल 170 सीटें हैं. 2024 में एनडीए को यहां सिर्फ 65 सीटों पर संतोष करना पड़ा था, जबकि विपक्ष यानी ‘इंडिया’ गठबंधन ने 105 सीटें जीती थीं. ऐसे में, बीजेपी को अपनी रणनीति में बदलाव लाना ही होगा, क्योंकि भविष्य के परिसीमन का सबसे बड़ा असर इन्हीं राज्यों पर पड़ सकता है.

सांसदों की संख्या में वृद्धि

बीजेपी वर्तमान में लोकसभा में 293 सांसदों के साथ है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत यानी 360 सांसदों का आंकड़ा हासिल करने के लिए उसे और सांसदों की जरूरत है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि तृणमूल कांग्रेस और उद्धव गुट के कुछ सांसद किसी नए रास्ते पर चलते हैं, तो एनडीए का आंकड़ा 320 के करीब पहुंच सकता है.

राज्यसभा में भी बदलाव जरूरी

राज्यसभा की बात करें, तो एनडीए के पास आज 148 सदस्य हैं परंतु दो-तिहाई बहुमत के लिए यह संख्या भी कम है. भविष्य में होने वाले कुछ बदलाव, जैसे झारखंड और मिजोरम की स्थिति, इस संख्या को बढ़ा सकते हैं. लेकिन फिर भी, ये सभी आंकड़े दो-तिहाई बहुमत के लिए अपर्याप्त रह जाएंगे.

राजनीतिक हलचल का असर

महाराष्ट्र में शिवसेना की अंतर्विरोधी स्थिति और बंगाल में टीएमसी की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि तमिलनाडु की डीएमके और एम.के. स्टालिन का रुख भी महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर जब बात संवैधानिक बदलाव की हो.

बीजेपी की मिशन 2029 की तैयारी

बीजेपी ने इन सारी अटकलों को महज विपक्ष का आंतरिक मामला बताया है. लेकिन यह स्पष्ट है कि यह पूरी प्रक्रिया केवल संख्या बल जुटाने तक सीमित नहीं रह सकती. दरअसल, यह मिशन 2029 की तैयारियों और नए सियासी समीकरणों की रूपरेखा है. क्या यह सब भविष्य में किसी बड़े संवैधानिक बदलाव का संकेत दे रहा है? आने वाले समय में ही इन सवालों के जवाब मिलेंगे.

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