बिहार में पलायन रोकने और रोजगार बढ़ाने की तैयारी; सिवान में ₹195 करोड़ की वेटलैंड परियोजना शुरू होगी

The CSR Journal Magazine
बिहार सरकार ने सहकारिता मॉडल के जरिए मछली पालन को नई दिशा देने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और सहकारिता विभाग मिलकर मत्स्य उत्पादन, प्रोसेसिंग और निर्यात को बढ़ावा देंगे। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, किसानों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ेगी तथा बिहार से होने वाले पलायन को रोकने में मदद मिलेगी। इस संबंध में बुधवार को पटना के बामेती सभागार में “सहकारिता आधारित मात्स्यिकी विकास एवं मत्स्य निर्यात की संभावना” विषय पर कार्यशाला-सह-संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

सिवान में ₹195 करोड़ की परियोजना, कई जिलों तक होगा विस्तार

कार्यक्रम का उद्घाटन डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंद किशोर राम और सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर नंद किशोर राम ने कहा कि राज्य सरकार सिवान में वेटलैंड क्लस्टर विकसित कर चौर क्षेत्र के माध्यम से बड़े स्तर पर मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए नाबार्ड से ₹195 करोड़ की स्वीकृति मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि सिवान के बाद छपरा, मधुबनी और मोतिहारी में भी ऐसी परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। छपरा में विशेष रूप से झींगा (श्रिम्प) पालन को बढ़ावा दिया जाएगा।

सहकारिता से बढ़ेगी आय, मिलेगा स्थानीय रोजगार

मंत्री ने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक व्यवस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास का मजबूत माध्यम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकारिता से समृद्धि” के विजन को आगे बढ़ाते हुए सरकार गांव-गांव तक मत्स्य पालन और पशुपालन की योजनाएं पहुंचाएगी। उनका कहना था कि मछली पालन कृषि क्षेत्र का सबसे तेजी से बढ़ने वाला व्यवसाय बन चुका है और बिहार को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ राज्य की मछली को देश के अन्य राज्यों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

बिहार को मत्स्य निर्यात का हब बनाने की तैयारी

सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि बिहार के पास नदियों, तालाबों और जलाशयों के रूप में भरपूर जल संसाधन उपलब्ध हैं। यदि इनका वैज्ञानिक और संगठित तरीके से उपयोग किया जाए तो राज्य मत्स्य उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी बन सकता है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से छोटे मत्स्य पालकों को एक मंच पर लाकर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत की जाएगी।

आधुनिक तकनीक और संस्थागत सहयोग पर जोर

कार्यक्रम में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि फिशरीज सोसाइटियों को मजबूत बनाने के लिए भारत सरकार की कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें NCDC, NABARD और NFDB जैसी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने मछली पालकों की समस्याएं सुनकर उनके समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। सरकार का मानना है कि सहकारिता, आधुनिक तकनीक और संस्थागत सहयोग के माध्यम से बिहार को आने वाले वर्षों में मत्स्य उत्पादन, प्रोसेसिंग और निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाया जा सकता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।
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