Assam Elephant Manik at Vantara: 48 साल दर्द में गुजारे, अब मिलेगी नई जिंदगी! असम की हथिनी मणिकी पहुंची वंतारा, शुरू होगा विशेष इलाज

The CSR Journal Magazine
कभी असम की सड़कों पर दर्द से कराहते हुए चलने वाली हथिनी मणिकी अब एक नई जिंदगी की ओर बढ़ रही है। 48 वर्षीय मणिकी, जो पिछले कई वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही थी, अब गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा पहुंच गई है, जहां उसे अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और स्थायी देखभाल मिलेगी। मणिकी की कहानी तब चर्चा में आई जब उसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में वह असम के एक हाईवे पर लंगड़ाते हुए दिखाई दे रही थी। उसकी हालत देखकर पशु प्रेमियों, वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने चिंता जताई। सोशल मीडिया पर उसके इलाज और बेहतर देखभाल की मांग तेज हो गई।

Assam Elephant Manik at Vantara: कई बीमारियों से जूझ रही थी मणिकी

जानकारी के मुताबिक मणिकी के बाएं अगले पैर में पुरानी विकृति थी, जिसके कारण उसे चलने में काफी परेशानी होती थी। इसके अलावा बढ़ती उम्र के कारण उसके शरीर में कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा हो गई थीं। संक्रमित घाव, शरीर में पानी की कमी, एक आंख की कमजोर होती रोशनी और कमजोर शारीरिक स्थिति ने उसकी परेशानी और बढ़ा दी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में उसे लंबे समय तक अस्पताल आधारित उपचार और निरंतर निगरानी की जरूरत थी।

मालिक की पहल के बाद खुला राहत का रास्ता

मणिकी की मालकिन रुचि चेतिया ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त वन्यजीव बचाव और देखभाल समिति से संपर्क किया और मणिकी को वंतारा भेजने की अनुमति मांगी। आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद असम और गुजरात सरकार के सहयोग से उसे सुरक्षित रूप से जामनगर पहुंचाया गया।

वंतारा में मिलेगा आधुनिक इलाज

वंतारा के अधिकारियों के अनुसार मणिकी को दर्द से राहत देने के लिए विशेष उपचार शुरू किया जाएगा। इसमें दवाइयों के साथ हाइड्रोथेरेपी, एक्यूपंक्चर, घावों का उपचार और विशेष पोषण कार्यक्रम शामिल होगा। इसके अलावा उसके लिए ऐसा प्राकृतिक वातावरण तैयार किया गया है जहां मुलायम मिट्टी, प्राकृतिक जलाशय और अन्य हाथियों का साथ उसे मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होने में मदद करेगा।

Assam Elephant Manik at Vantara: अनंत अंबानी की पहल है वंतारा

वंतारा की स्थापना रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने की है। यह संस्था घायल, बीमार और संकट में फंसे जानवरों के बचाव, इलाज और पुनर्वास के लिए काम करती है। यहां दुनिया के सबसे बड़े हाथी अस्पतालों में से एक भी मौजूद है।

उम्मीद की नई शुरुआत

मणिकी की कहानी सिर्फ एक हाथी के इलाज की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि जब समाज, प्रशासन और पशु कल्याण संस्थाएं मिलकर काम करती हैं तो किसी जीव की जिंदगी बदली जा सकती है। वर्षों तक दर्द झेलने वाली मणिकी के लिए अब संघर्ष का दौर पीछे छूटता दिखाई दे रहा है। जामनगर के वंतारा में उसके जीवन का एक नया अध्याय शुरू हो चुका है, जहां उसे दर्द नहीं बल्कि देखभाल, सुरक्षा और सम्मान मिलेगा।
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