Amarnath Yatra के लिए रजिस्ट्रेशन का नया रिकॉर्ड, 3.6 लाख श्रद्धालुओं ने कराया रजिस्ट्रेशन

The CSR Journal Magazine
इस साल की अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है। अब तक 3.6 लाख से ज्यादा श्रद्धालु यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। यह यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। यात्रा का समय रक्षा बंधन और सावन पूर्णिमा के दिन समाप्त होगा। हालांकि, यात्रा मार्ग पर अब भी 10 से 12 फीट तक बर्फ जमी हुई है, जिससे श्रद्धालुओं को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

सरकार की तैयारी, यात्रा मार्ग को तैयार करने में जुटे हैं अधिकारी

सीमा सड़क संगठन (BRO) दोनों रास्तों पर बर्फ हटाने के काम में तेजी से जुटा हुआ है। अधिकारियों का दावा है कि 15 जून तक दोनों रास्तों को पूरी तरह से तैयार कर दिया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की समस्या न हो। यात्रा बालटाल-सोनमर्ग और पारंपरिक नुनवान-पहलगाम मार्ग से शुरू होगी, जिसमें हर साल हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और आंकड़े

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 15 अप्रैल को शुरू हुई थी। इस साल 5 से 30 लोगों के ग्रुप के लिए रजिस्ट्रेशन बंद हो चुका है, लेकिन अकेले या छोटे ग्रुप में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन जारी रहेगा। रजिस्ट्रेशन कराने के लिए पंजाब नेशनल बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यस बैंक की तय शाखाओं में पहुंचना होगा। अधिकारियों का मानना है कि इस साल रजिस्ट्रेशन की संख्या 5 लाख के पार जा सकती है।

बर्फ हटाने का कार्य, यात्रा सुरक्षा की प्राथमिकता

हालांकि, यात्रा मार्ग पर बर्फ की स्थिति चिंतित करने वाली है। सामान्य जगहों पर 6 से 8 फीट जबकि हिमस्खलन वाले इलाकों में 10 से 12 फीट तक बर्फ जमी हुई है। बालटाल मार्ग पर 9 किलोमीटर और नुनवान-पहलगाम मार्ग पर 8 किलोमीटर ट्रैक से बर्फ हटाई जा चुकी है। ट्रैक को चौड़ा करने और सुधारने का काम भी चल रहा है। इसके अलावा, रिटेनिंग वॉल और कल्वर्ट बनाने का कार्य भी किया जा रहा है।

नए ठहरने के विकल्प, श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान

इस बार यात्रियों की सुविधा के लिए बेस कैंप में प्री-फैब्रिकेटेड और फाइबर स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं। इससे श्रद्धालुओं को आरामदायक और आधुनिक आवास जैसी सुविधा मिलेगी। हर इमारत में 48 कमरे होंगे, जिनमें अटैच्ड वॉशरूम और गर्म-ठंडे पानी की सुविधाएं होंगी। यह तैयारी पिछले तीन साल से चल रही थी और अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस बार बाढ़ वाली जगहों पर कैंप न लगाने का निर्णय लिया गया है।

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