शंकराचार्य से मुलाकात के बाद अखिलेश का बड़ा हमला, “सांचा नहीं, पूरा ढांचा बदलना होगा”

The CSR Journal Magazine
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हाल ही में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने राम मंदिर में चढ़ावे में हुई चोरी और गौ संरक्षण जैसे मुद्दों पर बीजेपी सरकार की नीतियों पर ऊंगली उठाई। अखिलेश ने कहा कि सनातन समाज इन समस्याओं से दुखी है और सरकार की नीतियों से लोगों को महंगाई जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

महापाप का आरोप

अखिलेश ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर फिर से भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार, मंदिर परिसर में जिन कर्मचारियों को कम भुगतान हुआ, उनके कॉल डिटेल्स की भी जांच की जानी चाहिए। अखिलेश ने ये भी कहा कि 99.9 प्रतिशत मामलों में भाजपा के लोग शामिल निकलेंगे।

कानून-व्यवस्था पर चिंताएं

पूर्व मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी के विचारों को साझा करते हुए कहा कि भाजपा अपने राजनीतिक हितों के अनुसार विचार बदलती है। कानून-व्यवस्था पर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए और कहा कि विपक्ष के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, जबकि उनकी शिकायतों को अनदेखा किया जा रहा है।

एसआईटी जांच की आलोचना

राम मंदिर प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी पर भी अखिलेश ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह केवल लीपापोती है और इसकी निष्पक्षता पर शक किया जाना चाहिए। उनकी इस टिप्पणी ने इस पूरे मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

धर्म और धन की राजनीति

सपा अध्यक्ष ने बताया कि भाजपा के लिए धर्म की तुलना में धन अधिक महत्व रखता है। उन्होंने कहा, “राम मंदिर में महापाप हुआ है और इसकी जांच होनी चाहिए।” इससे यह स्पष्ट है कि भाजपा की नीतियों पर गहरी निराशा है। अखिलेश ने यह भी कहा कि एक नई राजनीतिक परंपरा की आवश्यकता है जहां विपक्ष का आदर हो।

गौ संरक्षण की आवश्यकता

मुलाकात में शंकराचार्य ने गौमाता के संरक्षण के मुद्दे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। यह बात दोनों के बीच हुई चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय रही।

ट्रस्ट की संरचना पर विचार

शंकराचार्य ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में कहा कि इस पूरे मामले में बड़े लोग शामिल हैं और एक ट्रस्ट का गठन करना चाहिए जिसमें धर्माचार्य भी शामिल हों। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति पर भी सवाल उठाया और कहा कि ट्रस्ट में सिर्फ संतों को होना चाहिए।

दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

शंकराचार्य ने गोविंद देवगिरी पर स्पष्ट रूप से निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, चंपत राय को भी दोषी ठहराया और कहा कि वास्तविक गुनहगार वही है। इस प्रकार, दोनों नेताओं ने उनके बीच हुई चर्चा से समाज में व्याप्त अव्यवस्था और भ्रष्ट्राचार की ओर इशारा किया है।

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