Bengal में घुसपैठियों के लिए हर जिले में बनेगा होल्डिंग सेंटर

The CSR Journal Magazine
पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने अवैध घुसपैठ पर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। अब, सभी जिलों को ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ पॉलिसी के तहत होल्डिंग सेंटर स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। 23 मई को जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि इन सेंटरों में संदिग्ध विदेशी नागरिकों को रखा जाएगा। इन सेंटरों में पकड़े गए लोगों को 30 दिन तक रखा जा सकेगा और इस दौरान उनकी पहचान और दस्तावेजों की जांच की जाएगी।

टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

नया सिस्टम बायोमेट्रिक डेटा कलेक्शन पर आधारित होगा। इसके तहत संदिग्ध लोगों का डेटा केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। जब उनकी पहचान प्रमाणित हो जाएगी, तब उन्हें सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप दिया जाएगा। यह प्रक्रिया इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत चलेगी। जिला मजिस्ट्रेट या अन्य बड़े अधिकारियों का अंतिम फैसला इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होगा।

बीएसएफ के लिए नई जिम्मेदारियां

इस नई व्यवस्था के तहत, BSF को बांग्लादेश की सीमा पर फेंसिंग और सुरक्षा संरचनाएं बनाने का काम सौंपा गया है। इसी के तहत 27 किलोमीटर जमीन BSF को दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि हमारी सरकार आगे भी जरूरत पड़ने पर और जमीन BSF को उपलब्ध कराएगी। भारत-बांग्लादेश सीमा 4,097 किलोमीटर लंबी है और इस पर उचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

सीमाओं की सुरक्षा

भाजपा सरकार ने इस कदम को देश की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए जरूरी बताया है। bsf और अन्य एजेंसियों को घुसपैठ को रोकने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 2,216 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो कि भारत और बांग्लादेश के बीच सबसे लंबी राज्य सीमा है। इस पर अभी भी सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता है।

सीएए का महत्व

इस बीच, केंद्र सरकार ने CAA के तहत धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहे लोगों को राहत प्रदान की है। ऐसे समाज के लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी जो 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जो लोग CAA के अंतर्गत नहीं आते, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा। ऐसे व्यक्तियों को गिरफ्तारी के बाद BSF को सौंपा जाएगा।

स्थायी समाधान की तलाश

बंगाल में लागू की गई नई नीतियों का उद्देश्‍य अवैध घुसपैठ की समस्या को नियंत्रित करना है। इसके अंतर्गत तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है ताकि संदिग्ध लोग आसानी से पहचाने जा सकें। अधिकारियों का मानना है कि इससे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए कुछ पुलिस अधिकारियों को बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार भी दिया गया है ताकि आवश्यक कार्रवाई जल्दी की जा सके।

नए फैसले की जानकारी

इस नई व्यवस्था की जानकारी पुलिस और संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है। सरकारी आदेशों का पालन करना हर जिले की जिम्मेदारी होगी। अधिकारियों के अनुसार, होल्डिंग सेंटर एक अस्थायी व्यवस्था होगी, जिनमें अवैध घुसपैठियों को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।

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