बिजली की कमी या डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम कमजोर, UP में किल्लत की असली वजह क्या है?

The CSR Journal Magazine
दुनिया के सबसे गर्म शहरों में यूपी के 13 शहर शामिल हैं। यहाँ पर पारा 47 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। बिजली कटौती के कारण लोग सड़कों पर उतर आए हैं। कई शहरों में 8 से 10 घंटे तक बिजली नहीं मिल रही, और ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति तो और भी खराब है। लखनऊ के 31 सबस्टेशनों पर शासन ने सुरक्षा के लिए PAC तैनात की है।

लोकप्रियता में बढ़ा आक्रोश

गर्मी और लगातार बिजली कटौती ने लोगों का धैर्य जवाब दे दिया है। सीतापुर, गोंडा और रायबरेली जैसे शहरों में लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। इस गंभीर मसले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ न केवल समीक्षा बैठक करने जा रहे हैं, बल्कि बिजली आपूर्ति की समस्या और अधिकारियों की जवाबदेही पर चर्चा भी करेंगे।

गर्मी ने बढ़ाया पारा, बिजली कटौती ने किया परेशान

हाल ही में आई रिपोर्ट के अनुसार, प्रयागराज में तापमान 44 डिग्री के आसपास है लेकिन यहाँ 5 से 6 घंटे बिजली की कमी हो रही है। वाराणसी में भी स्थिति काफी खराब है, जहाँ रिपोर्ट्स के अनुसार लोग 4 से 6 घंटे की कटौती से परेशान हैं। लखनऊ और कानपुर में भी गर्मी के चलते बिजली संकट ने लोगों को काफी कठिनाई में डाल दिया है। कई अन्य शहरों में ऐसे ही हालात हैं।

बिजली की बढ़ती मांग बन रही समस्या

उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। 17 मई को यह मांग 28,904 मेगावाट थी, जबकि 21 मई को यह आंकड़ा 33,000 मेगावाट तक पहुंच गया। पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 28,858 मेगावाट था। इसका मतलब यह है कि सिर्फ 5 दिनों में मांग में 4,000 मेगावाट का इजाफा हुआ है।

डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम की कमजोरी

विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या केवल बढ़ती मांग की नहीं है, बल्कि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर भी इस अनुरूप नहीं है। पुराने ट्रांसफार्मर और कमजोर तार वोल्टेज की समस्या झेल नहीं पा रहे हैं। तकनीकी खराबियों के चलते मरम्मत में भी देरी हो रही है और रोजगार की कमी के कारण नए कर्मचारियों की भर्ती नहीं की गई है।

राजनीतिक हलचल और समस्याएं

बीजेपी विधायक ने ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखकर बिजली संकट पर ध्यान आकर्षित किया है। चंदौली में लोग केवल 12 से 13 घंटे बिजली की आपूर्ति का सामना कर रहे हैं। यह स्थिति दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिससे राज्य में बिजली संकट और भी गहरा होता जा रहा है। अब देखना यह है कि सरकार इसे कैसे सुलझाती है।

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