TMC के बागी सांसदों ने की अलग गुट बनाने की मांग, स्पीकर को लिखे लेटर में 19 MPs के साइन
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 19 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में एक अलग गुट बनाने और अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है। 12 जून 2026 को सामने आई इस चिट्ठी पर 19 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जो कि TMC के कुल 28 लोकसभा सांसदों का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा है। एंटी-डिफेक्शन लॉ (दलबदल कानून) से बचने के लिए दो-तिहाई सांसदों का आंकड़ा जरूरी होता है, जो इस गुट के पास है।
पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हलचल
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 19 सांसदों ने अलग गुट बनाने की अनुमति मांगी है। इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को एक लेटर सौंपा है, जिसमें उनके साइन हैं। इनमें कई ऐसे नाम शामिल हैं जो ममता बनर्जी के करीबी माने जाते थे। काकोली घोष, सयोनी घोष और यूसुफ पठान जैसे नेताओं का नाम इस लिस्ट में शामिल है। पार्टी के भीतर बढ़ती बगावत के बीच, यह कदम राज्य में TMC की स्थिति को और कमजोर कर सकता है।
बगावत का दौर
TMC पार्टी में चल रही बगावत और इस्तीफे का दौर लगातार जारी है। ममता बनर्जी के करीबी नेता एक-एक करके पार्टी छोड़ रहे हैं। अब ये 19 बागी सांसद अलग गुट बनाने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने 18 मई को स्पीकर को लेटर सौंपा था। उस समय काकोली घोष पार्टी की चीफ व्हिप थीं। अब इस लेटर पर सांसदों ने अपने साइन कर दिए हैं। यह TMC के लिए चिंता की बात है।
सांसदों की पहचान
इन 19 सांसदों में मुख्य नाम शामिल हैं: काकोली घोष (बारासात), जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार), यूसुफ पठान (बेहरामपुर), सयोनी घोष (जादवपुर) और माला रॉय (कोलकाता दक्षिण) आदि। यह सभी सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में काफी प्रभावशाली माने जाते हैं। यह बगावत TMC की वर्तमान स्थिति को और दुर्बल कर सकती है, विशेष रूप से विधानसभा चुनावों के निराशाजनक परिणामों के बाद।
क्या है बागी सांसदों की मांग?
काकोली घोष ने सांसदों के एक ग्रुप के लिए लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है। इसके चलते पार्टी के संसदीय खेमे में अलगाव की हवा चल रही है। बागी नेताओं का कहना है कि विधानसभा चुनावों में पार्टी के दुखद प्रदर्शन के चलते उन्होंने यह कदम उठाया है। इस स्थिति में TMC के भीतर आंतरिक तनाव बढ़ता जा रहा है।
भविष्य की संभावनाएँ
TMC के बागी नेताओं का यह कदम संभवतः पार्टी के भविष्य को प्रभावित कर सकता है। उनके अलग गुट बनाने के प्रयास के चलते TMC को अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करना पड़ सकता है। सांसदों का यह समूह संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 4 और 4(2) का भी हवाला दे रहा है, जिसमें कहा गया है कि उनकी संख्या 28 में से 19 है, जो कि दो तिहाई है। इससे उन्हें अलग गुट के रूप में मान्यता मिलने की संभावना है।
क्या होगा आगे?
टीएमसी के अंदर चल रही खींचतान और बगावत का यह प्रसंग पार्टी के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पार्टी इन बागियों को वापस अपने पाले में लाने में सफल हो पाएगी, या फिर ये सांसद सचमुच एक नए गुट का निर्माण कर लेंगे। इस हालत में टीएमसी को अपनी ताकत को बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने होंगे।
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