TMC सांसद काकोली घोष का बागी तेवर, कल्याण बनर्जी के खिलाफ स्पीकर से की शिकायत

The CSR Journal Magazine
टीएमसी सांसद काकोली घोष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से अपने ही पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ लिखित शिकायत की है। उनका कहना है कि बनर्जी लोकसभा में उन्हें गाली देते हैं। यह मामला तब प्रकाश में आया है जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बीजेपी की नई सरकार ने तृणमूल के अवैध निर्माणों पर कार्रवाई शुरू कर दी है और पार्टी में कई नेता इस्तीफा दे रहे हैं। हाल ही में, काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया और अब अपने ही साथी सांसद के खिलाफ खड़ी हो गई हैं।

गाली-गलौज का आरोप, महिलाओं के प्रति असम्मान

काकोली घोष ने अपने शिकायत पत्र में लिखा है कि कल्याण बनर्जी की महिलाओं के प्रति जो रवैया है, वह लोकसभा में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने पहले भी पार्टी के नेतृत्व के प्रति अपनी नाराजगी जताई है। काकोली ने कहा है कि उनका यह कदम केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि यह पार्टी के अंदर चल रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ एक आवाज है।

इस्तीफे का कारण, भ्रष्टाचार के मामले

घोष ने अपने इस्तीफे के पीछे भ्रष्टाचार के आरोपों और राज्य में केआरजी मेडिकल कॉलेज की छात्रा के रेप-मर्डर केस का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि उनका अंतरात्मा इस मुद्दे से बहुत परेशान है। काकोली ने पार्टी संगठन में I-PAC का बढ़ता प्रभाव भी आलोचना की है, जो उन्हें उचित नहीं लगा।

टीएमसी के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से दूरी

काकोली घोष, जो बारासात से चार बार की सांसद हैं, ने हाल ही में पार्टी के प्रमुख कार्यक्रमों से दूरी बना ली थी। बावजूद इसके, उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ प्रशासनिक बैठक में भाग लिया। यह चर्चा का विषय बन गया है कि वह पार्टी के आंतरिक कामकाज से कितनी असंतुष्ट हैं।

नए अध्यक्ष का चयन और पार्टी में चल रही हलचल

काकोली के इस्तीफे के बाद पार्टी ने तापस चटर्जी को बारासात जिला इकाई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। काकोली घोष ने मंगलवार को अपने इस्तीफे का ऐलान किया था और इसके अगले दिन उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने पत्र के माध्यम से पार्टी के अन्य मुद्दों का भी जिक्र किया, जिसमें राशन घोटाला और भर्ती में अनियमितताएं शामिल हैं।

भविष्य की चुनौतियों का सामना

टीएमसी के भीतर चल रही यह राजनीतिक कलह इस बात का संकेत है कि पार्टी को आगे की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। काकोली घोष जैसे नेता अपने व्यक्तिगत अनुभवों और पार्टी में चल रही गतिविधियों को लेकर मुखर होते जा रहे हैं। उनके इस कदम से पार्टी की आंतरिक राजनीति में और भी हलचल होने की संभावना है।

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