देश में इस एक साल में न सिर्फ जम्मू-कश्मीर के पर्यटन स्थल पर भयावह आतंकी हमला हुआ है, बल्कि राजधानी दिल्ली में भी एक भयंकर ब्लास्ट ने सुरक्षा-परिस्थितियों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए एक-एक कर जानें इन घटनाओं की पूरी तस्वीर
पहलगाम हमला 22 अप्रैल 2025
पहलगाम हमला घाटी की शांति को भंग करने वाला था। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को आतंकियों ने एक समूह पर निशाना साधा। इस हमले में कम-से-कम 26 नागरिकों की घटनास्थल पर मौत दर्ज हुई और करीब 20 घायल हुए। सरकारी सूत्र बताते हैं कि आतंकियों ने मास पर्यटन स्थल पर घात लगाकर हमला किया था और यह घाटी में “सबसे घातक हमलों” में से एक बना।
इस हमले के बाद Operation Sindoor से पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब दिया तथा अन्य संयुक्त अभियानों के माध्यम से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी कार्रवाई तेज की गई। उदाहरण के लिए, “पहलगाम के बाद छह अलग-अलग मुठभेड़ों में 21 आतंकवादियों को मार गिराया गया” जैसी खबरें सामने आईं। इसके अलावा आंकड़ों में यह भी दर्ज है कि अगस्त 2024 से जुलाई 2025 के बीच और 64 आतंकवादी मारे गए।
दिल्ली में कार बम विस्फोट,10 नवंबर 2025
राजधानी दिल्ली के लाल किला के समीप 10 नवंबर की शाम को एक घातक वाहन विस्फोट हुआ। एक Hyundai i20 में सिग्नल पर खड़े होने पर विस्फोट हुआ, जिसके कारण कई वाहन जले और लगभग 11 लोगों की मौत, और लगभग 20 लोग घायल हुए। दिल्ली पुलिस ने इस हमले को Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) तथा विस्फोटक अधिनियम के तहत दर्ज कर लिया है। पूरे देश में हाई-अलर्ट जारी हो गया है। गुजरात, आंध्र-प्रदेश सहित अन्य राज्यों में सुरक्षा बढ़ा दी गयी है।
पिछले एक वर्ष में हमलों का पैटर्न
पिछले एक साल में जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है। अगस्त 2024-जुलाई 2025 की अवधि के आंकड़ों के अनुसार, 19 लोगों की मौत विस्फोटों के कारण हुई थी — जो पहले के वर्षों की तुलना में वृद्धि दर्शाती है।
पाहलगाम के बाद भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा अनेक अभियानों में सक्रिय आतंकवादियों का सफाया किया गया, जिससे जेलखानों और ट्रैकिंग नेटवर्क में हलचल मची।
दिल्ली में रेड-फोर्ट के समीप हुआ बम विस्फोट यह संकेत है कि अब आतंकवाद सिर्फ सीमित इलाके तक सीमित नहीं रहा; बड़े शहरी केंद्र भी लक्ष्य बने हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सुरक्षा-चेन में कहीं न कहीं ढील है और हमें सतर्क रहने की जरूरत है।
सुरक्षा चुनौतियाँ & आगे की राह
दोनों घटनाओं पहलगाम और दिल्ली विस्फोट — ने भारत की सुरक्षा रणनीति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण-पर्यटन केंद्रों में सुरक्षात्मक कवच कमजोर पाया गया।
महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतीक-स्थलों के आसपास CCTV, एक्स-रे स्कैनिंग, और वाहन जांच पर्याप्त नहीं रही। आतंकवादी अब सरल तरीके से जनसाधारण क्षेत्र में प्रवेश कर जटिल हमले कर सकते हैं।
उच्च-सुनिश्चित निगरानी, बेहतर खुफिया तंत्र और आम नागरिकों की सतर्कता की इज़ाफ़ा आवश्यक है।
भारत की सेना सक्षम है भारत की सुरक्षा करने में हमने हमारे पडोसी देश को हर बार युद्ध में धूल चटाई है।
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