सुरक्षा पर सियासत: लालू-राबड़ी की Z+ सुरक्षा हटने के बाद तेजस्वी का बड़ा कदम, लौटाई सरकारी सुरक्षा

The CSR Journal Magazine

बिहार में राजनीतिक घमासान: तेजस्वी यादव ने त्यागी Y+ सुरक्षा, नीतीश सरकार के फैसले पर भड़का लालू परिवार

बिहार की राजनीति में सुरक्षा घेरा (VIP Security) हमेशा से प्रतिष्ठा, ताकत और राजनीतिक प्रभाव का प्रतीक रहा है। हाल ही में बिहार सरकार द्वारा लालू प्रसाद यादव के परिवार की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। इस समीक्षा के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों (लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी) की Z+ सुरक्षा हटा दी गई और तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में भी भारी कटौती की गई। इसके विरोध में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार द्वारा दी गई अपनी Y+ सुरक्षा को पूरी तरह वापस लौटा दिया। इस घटना ने बिहार के दो सबसे बड़े राजनीतिक खेमों (NDA और RJD) के बीच कड़वाहट और राजनीतिक टकराव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।

सुरक्षा में कटौती का फैसला आया चर्चा में

पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के बाद अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी सुरक्षा वापस करने का निर्णय लिया है। तेजस्वी यादव ने अपनी Y+ श्रेणी की सुरक्षा लौटाई। वे आज दिल्ली से पटना लौट रहे हैं। इससे पहले राबड़ी देवी ने अपने आवास से सभी पुलिसकर्मियों को वापस भेज दिया। इसके बाद, राबड़ी आवास के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ है। बिहार सरकार द्वारा लालू परिवार की सुरक्षा घटाने के फैसले से राबड़ी देवी नाराज हैं, और उन्होंने इस फैसले के विरोध में यह कदम उठाया।

सरकार की सुरक्षा घटाने की नीति

बिहार सरकार ने हाल ही में लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली। यह निर्णय 4 जून को हुई राज्य सुरक्षा समिति की बैठक के आधार पर लिया गया। राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने इसकी जानकारी दी। हाल ही में तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में भी कटौती की गई है। उन्हें अब केवल एक अंगरक्षक उपलब्ध कराया जाएगा। तेजस्वी यादव को पहले की तरह Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी, जिसमें एस्कॉर्ट वाहन भी शामिल है।

लालू परिवार और राज्य सरकार के बीच विवाद

आवास विवाद के चलते सुरक्षा में कटौती का यह फैसला आया है। बिहार सरकार ने लालू परिवार को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने के लिए 15 दिन का नोटिस दिया है। राबड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड पर नया सरकारी आवास आवंटित किया गया है, लेकिन परिवार अभी तक वर्तमान आवास को छोड़ने को तैयार नहीं है। अब राबड़ी देवी के पास क्या विकल्प हैं, यह सवाल पनप रहा है।

राबड़ी देवी के जीवन में बदलाव

राबड़ी देवी का आवास 10 सर्कुलर रोड अब मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित किया गया है। उन्हें नए बंगले में शिफ्ट होने के लिए कहा गया है। ऐसे में उनके पास तीन विकल्प हैं। पहला, 39 हार्डिंग रोड का आवास जो सरकार ने उन्हें दिया है। इस स्थान पर राबड़ी देवी अपने निजी आवास के तैयार होने तक रह सकती हैं। दूसरे विकल्प के तौर पर कौटिल्य नगर में नया बंगला बन रहा है, लेकिन वह अभी तैयार नहीं हुआ है। तीसरा विकल्प महुआ बाग में बन रहा बंगला है, जिसमें हाल ही में 7-8 कमरे और बड़ा लॉन बना रहा है।

राजद की रणनीति और भविष्य की योजना

राजद के नेताओं की दो तरह की राय है। कुछ नेता मानते हैं कि लालू परिवार को नया बंगला स्वीकार नहीं करना चाहिए, जबकि कुछ नेता सरकार के बंगले को लेकर सकारात्मक हैं। इस मामले में राबड़ी देवी ने अभी बंगला खाली करने की योजना नहीं बनाई है। उनका मन है कि कोर्ट में जाना सही नहीं होगा, लेकिन सड़क पर विरोध करने की तैयारी है। पार्टी की योजना है कि आवास आवंटन में गड़बड़ियों को लेकर सरकार को एक्सपोज किया जाएगा।

लालू यादव का स्वास्थ्य और पारिवारिक स्थिति

इस बीच, लालू यादव सिंगापुर में अपनी बेटी रोहिणी आचार्य के साथ मॉर्निंग वॉक करते नजर आए। रोहिणी ने इस दौरान अपने पिता के प्रति अपनापन दर्शाते हुए एक भावुक पोस्ट साझा की। लालू यादव के स्वास्थ्य के बारे में लगातार चर्चा हो रही है, वहीं परिवार की सुरक्षा को लेकर हालात तेजी से बदल रहे हैं।

बिहार में ‘सुरक्षा’ का सियासी संग्राम: प्रशासनिक समीक्षा या राजनीतिक प्रतिशोध?

इस पूरे विवाद के दो अलग-अलग पहलू सामने आते हैं। एक तरफ, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इसे राजनीतिक प्रतिशोध, बदले की भावना और लालू परिवार को मानसिक व सामाजिक रूप से कमजोर करने की सोची-समझी सरकारी साजिश मान रहा है। दूसरी तरफ, नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार इसे खुफिया रिपोर्टों और संवैधानिक पदों के वर्तमान स्टेटस के आधार पर की गई एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया (Routine Administrative Review) बता रही है।

बिहार के बदलते समीकरण

अंतिम रूप से, सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर हो रही यह खींचतान केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से राजनीतिक है। चुनाव और सियासी समीकरणों के इस दौर में सुरक्षा में कटौती का यह फैसला आने वाले समय में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों पक्षों के बीच बयानों और चुनावी मुद्दों को और अधिक आक्रामक बनाएगा।

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