भारत-तिब्बत व्यापार: चीन में 14 व्यापारियों को मिली दुकानें, 79 अब भी हैं इंतज़ार में

The CSR Journal Magazine
भारत-चीन व्यापार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लिपुलेख दर्रे के रास्ते छह साल बाद शुरू हुए व्यापार में 14 भारतीय व्यापारियों को चीन के तकलाकोट में दुकानें आवंटित की गई हैं। लेकिन 79 व्यापारी अब भी चीन के प्रशासन द्वारा अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। इन व्यापारियों का करोड़ों रुपए का सामान पिछले एक महीने से गुंजी में खुले में पड़ा हुआ है, जिससे व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। बारिश की संभावना के कारण उनका सामान खराब हो सकता है, इस चिंता ने व्यापारियों को बेचैन कर दिया है।

पुरानी मंडी से नई दुकान में सामान का स्थानांतरण

चीन ने केवल उन्हीं व्यापारियों को अनुमति दी है, जो 2019 के व्यापार में शामिल रहे थे, और जिनका सामान पुरानी मंडी में पहले से रखा था। तकलाकोट पहुंचे व्यापारियों ने पुरानी मंडी में अपनी दुकानों के ताले खोले और सामान को नई मंडी में स्थानांतरित किया। अब नई मंडी में दुकानों का आवंटन हो चुका है, लेकिन अनुमति न मिलने के कारण कई व्यापारी अभी तक अपना सामान नहीं ले जा पाए हैं। चीन से अनुमति मिलने के बाद ही ये व्यापारी तकलाकोट पहुंच सकेंगे।

लंबे समय तक खुले में सामान, व्यापारी परेशान

गुंजी में व्यापारियों ने जून के अंतिम सप्ताह से अपना सामान पहुंचाना शुरू कर दिया था, यह सोचकर कि व्यापार समय पर शुरू होगा। लेकिन अब व्यापार की शुरुआत में देरी के कारण उनका करोड़ों रुपए का सामान बारिश से बचाने के लिए पन्नियों से ढका गया है। व्यापारियों की चिंता यह है कि इस सामान को लंबे समय तक खुले में रखने से यह खराब हो सकता है। वे भारतीय प्रशासन से ठोस पहल करने की मांग कर रहे हैं।

भारत-चीन व्यापार का सीमित समय

भारत-चीन सीमा व्यापार केवल सीमित अवधि के लिए होता है। व्यापार सामान्यत: जून से शुरू होता है और अक्टूबर तक चलता है। नवंबर में बर्फबारी शुरू होने के कारण व्यापारियों को वापस लौटना पड़ता है। ऐसे में अगस्त का महीना बीतने के बावजूद बड़ी संख्या में व्यापारियों को अनुमति न मिल पाना उनके व्यापार के समय पर असर डाल रहा है।

चीन के पुरांग काउंटी प्रशासन से संवाद

धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि व्यापारियों के लिए दुकानें आवंटित करने के लिए चीन के प्रशासन से पत्राचार किया गया था। उन्होंने कहा कि 14 व्यापारियों को दुकानें मिल चुकी हैं, जबकि अन्य व्यापारियों के लिए अभी कोई मेल नहीं आया है। चीन से अनुमति मिलते ही अगले दल को भेजा जाएगा।

2019 में हुआ था बड़ा कारोबार

2019 में भारत-चीन व्यापार में लगभग 3 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ था, जिसमें भारतीय व्यापारियों की संख्या 250 थी। इस बार सड़क, नई मंडी और बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था के कारण कारोबार बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि अनुमति में देरी के कारण शुरुआती कारोबारी अवसर काफी हद तक निकल चुके हैं।

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