पैलेट गन कांड: पीड़ित छात्र को लेकर सीधे थाने पहुंचे राहुल गांधी, पुलिस पर FIR की मांग

The CSR Journal Magazine

राहुल गांधी ने पैलेट गन मामले में की शिकायत: पीड़ित के साथ थाने पहुंचे

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी आज (21 अगस्त) दिल्ली के संसद मार्ग (पार्लियामेंट स्ट्रीट) थाने पहुंचे। उनके साथ 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान घायल हुआ एक छात्र साहिल लोचब भी मौजूद था, जिसके शरीर और आंख पर गंभीर चोटें आई थीं। राहुल गांधी ने थाने में उन पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने के लिए लिखित शिकायत सौंपी, जिन्होंने कथित तौर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन या घातक बल का इस्तेमाल किया था। संसद मार्ग थाने में राहुल गांधी ने डीसीपी (DCP) सचिन शर्मा से मुलाकात की और मामले की निष्पक्ष जांच व दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त एक्शन लेने की मांग की।

20 जुलाई का जंतर-मंतर मार्च

दिल्ली में पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में विसंगतियों के खिलाफ छात्र संगठनों ने जंतर-मंतर से संसद मार्च का आयोजन किया था। इस दौरान पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने भीड़ को रोकने के लिए बल प्रयोग और लाठीचार्ज किया था। प्रदर्शन में शामिल 19 वर्षीय छात्र साहिल के चेहरे, हाथ और शरीर पर छर्रों के गहरे जख्म मिले थे। राहुल गांधी का आरोप है कि पुलिस की इस बर्बर कार्रवाई में साहिल की एक आंख की रोशनी चली गई है।

सरकार और विपक्ष में तीखी बहस

राहुल गांधी ने जुलाई के अंत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीड़ित छात्र के शरीर पर मौजूद छर्रों के निशान मीडिया को दिखाए थे। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री से सवाल किया था कि देश के भविष्य (छात्रों) पर पैलेट गन चलाने की अनुमति किसने दी?

पुलिस और प्रशासन का पक्ष-पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार

दिल्ली पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने शुरुआती बयानों में पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया था। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स द्वारा ‘एंटी-रायट गन’ (Anti-Riot Gun) का उपयोग किया गया था, जिसमें रबर या प्लास्टिक के छर्रे होते हैं। इसे ही गलती से पैलेट गन समझा जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी

इस पूरे पुलिस एक्शन और लाठीचार्ज की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष कमेटी का भी गठन किया है ताकि वास्तविकता सामने आ सके।थाने से बाहर आते हुए कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक घायल छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक विपक्ष इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा।

राजनीति में नए सिरे से ध्रुवीकरण

इस मामले ने राजनीतिक हलकों में एक बार फिर से ध्रुवीकरण पैदा कर दिया है। कई अन्य राजनीतिक दलों ने भी इससे संबंधित बयान दिए हैं और इसे एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। लोगों में इस घटना के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी।

सुरक्षा और मानवाधिकारों का सवाल

पैलेट गन के इस्तेमाल पर उठ रहे सवालों ने सुरक्षा और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर से आम जनता के बीच ला दिया है। कई सामाजिक संगठनों ने इस मामले पर अपनी चिंताएँ जाहिर की हैं। ऐसे में यह देखा जाना होगा कि सरकार इस मामले में कैसे प्रतिक्रिया देती है और क्या कोई ठोस कदम उठाएगी।

आगे क्या होगा?

राहुल गांधी की संसद मार्ग थाने पर की गई शिकायत के बाद अगले कदम की प्रतीक्षा की जा रही है। क्या सरकार इस मामले को गंभीरता से लेकर कोई कार्रवाई करेगी या इसे नजरअंदाज कर देगी, यह देखना दिलचस्प होगा। इस बीच, आम जनता और विभिन्न संगठनों द्वारा पैलेट गन के खिलाफ शिक्षा और जागरूकता फैलाने का काम जारी है।

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