प्यार करें या नफरत, ब्रांड मोदी को नजरअंदाज करना नामुमकिन: शर्मिष्ठा मुखर्जी का बड़ा खुलासा

The CSR Journal Magazine

गठबंधन के ब्लैकमेल से मुक्त सरकार देने वाले पहले नेता हैं पीएम मोदी’ शर्मिष्ठा मुखर्जी के बयान से मची सियासी हलचल

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी और कांग्रेस की पूर्व नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने एक हालिया लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने लिखा है, “आप मोदी से नफरत कर सकते हैं या प्यार, लेकिन आप ‘ब्रांड मोदी’ को नजरअंदाज नहीं कर सकते।”

पूर्व राष्ट्रपति की बेटी का दिलचस्प बयान

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि आप प्रधानमंत्री मोदी से कितना भी प्यार करें या नफरत, लेकिन आप ब्रांड मोदी को कभी नजरअंदाज नहीं कर सकते। यह बातें उन्होंने अपनी किताब “Pranab, My Father: A Daughter Remembers” के प्रमोशन के दौरान कहीं। शर्मिष्ठा ने बताया कि कैसे उनके पिता और पीएम मोदी के बीच राजनीतिक मतभेद होते हुए भी अच्छे संबंध थे।

2014 का चुनाव और Modi का विश्लेषण

शर्मिष्ठा ने याद दिलाया कि 2014 लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद, पीएम मोदी राष्ट्रपति भवन में उनके पिता से मिलने आए थे। इस दौरान, प्रणब मुखर्जी ने मोदी से चुनाव के परिणामों पर उनके विचार पूछे थे। पीएम मोदी ने बताया कि तीन दशकों में किसी राजनीतिक पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला, जिस पर प्रणब मुखर्जी ने सवाल किया, “और क्या?” इस पर मोदी चुप रहे, जिसके बाद प्रणब मुखर्जी ने बताया कि यह चुनाव ऐतिहासिक था क्योंकि पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर नया चेहरा सामने आया था।

भाजपा का पर्याय बने मोदी

उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उन्होंने अपने परिचितों से पूछा कि वे किसे वोट दे रहे हैं, तो सबने सिर्फ “मोदी” का नाम लिया, भले ही वह विधानसभा चुनाव में खुद उम्मीदवार नहीं थे और बीजेपी का कोई और उम्मीदवार चुनावी मैदान में था।

सच्चे लोकतंत्र की पहचान

शर्मिष्ठा का कहना है कि उनके पिता प्रणब मुखर्जी, जो उस समय भारत के 13वें राष्ट्रपति थे, ने पीएम मोदी के साथ राजनीतिक मतभेदों के बावजूद अच्छे संबंध बनाए रखे थे। उन्होंने इसे “सच्चे लोकतंत्र की पहचान” कहा। उनका मानना था कि भारतीय जनता पार्टी को मिला भारी जनादेश सिर्फ पार्टी का नहीं, बल्कि यह मोदी के लिए “सीधा जनादेश” था।

भविष्य के चुनावों से तुलना

शर्मिष्ठा ने आगे बताया कि दूसरे चुनावों की तरह जहां पीएम पद का चेहरा कुछ समय बाद घोषित किया जाता है, 2014 में मोदी का नाम पहले से ही स्पष्ट था। यह चुनाव प्रक्रिया में एक अनोखा बदलाव था। शर्मिष्ठा ने बताया कि उनके दिवंगत पिता प्रणब मुखर्जी मानते थे कि नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें पीएम पद के उम्मीदवार के रूप में जनता से सीधे तौर पर भारी जनादेश मिला है। उनसे पहले के प्रधानमंत्रियों को या तो उनकी पार्टी चुनती थी या वे चुनाव के बाद गठबंधन के समीकरणों से बनते थे।

गठबंधन की मजबूरियों से मुक्त सरकार

उन्होंने पीएम मोदी को आजादी के बाद का सबसे मजबूत नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने बिना किसी गठबंधन के ब्लैकमेल या दबाव के एक स्थिर सरकार दी है। शर्मिष्ठा के मुताबिक, लोकतंत्र में नीतियों या कार्यशैली पर मतभेद होना सामान्य है, लेकिन कोई भी पीएम मोदी के करिश्मे और भारतीय मतदाताओं के साथ उनके सीधे जुड़ाव और जुड़ाव को नकार नहीं सकता।

मोदी का संसद में प्रणाम

शर्मिष्ठा ने एक अन्य महत्वपूर्ण पल साझा किया, जब 2014 की जीत के बाद पीएम मोदी पहली बार संसद में पहुंचे। उन्होंने बताया कि उस समय मोदी ने संसद की सीढ़ियों पर झुककर प्रणाम किया था। प्रणब मुखर्जी के अनुसार, यह “एक अभूतपूर्व घटना” थी, जहां मोदी ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और इस इशारे ने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया।

बीजेपी की जीत का मकसद

शर्मिष्ठा ने बीजेपी की जीत को पार्टी के जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ाव, विभिन्न जातियों और समुदायों तक पहुँचने और गलतियों को पहचानने तथा सुधार की इच्छा का परिणाम बताया। उनका मानना है कि मोदी का चेहरा बीजेपी का सबसे मजबूत ट्रंप कार्ड है।

बयानों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

भाजपा नेताओं और समर्थकों ने इस बयान का स्वागत किया है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला और अमित मालवीय ने इसे एक ऐतिहासिक राजनीतिक सच्चाई का स्वीकार बताया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और प्रणब मुखर्जी के बीच वैचारिक मतभेदों के बावजूद हमेशा आपसी सम्मान और गहरा रिश्ता रहा। जबकि कांग्रेस पार्टी ने शर्मिष्ठा मुखर्जी के इस लेख पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रवक्ताओं का आरोप है कि शर्मिष्ठा अपने पिता के नाम का इस्तेमाल करके भाजपा के एजेंडे को बढ़ावा दे रही हैं और अपने ही पिता की कांग्रेसी विरासत का अपमान कर रही हैं।

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