शेयर मार्केट क्रैश- 110 के पार कच्चा तेल और 96 के पार रुपया, क्यों डूबे निवेशकों के पैसे?

The CSR Journal Magazine

Share Market Crash: 600 प्वाइंट्स टूटा Sensex, इन 5 वजहों से मार्केट धड़ाम

भारतीय शेयर बाजार में आज 20 मई 2026 को बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जहां BSE सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक टूटकर 74,600 के नीचे फिसल गया, जबकि निफ्टी 50 भी 190 अंक लुढ़ककर 23,450 के स्तर से नीचे आ गया। बढ़ती महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों के कारण निवेशकों में बिकवाली का भारी दबाव देखा जा रहा है।

सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट

एक कारोबारी दिन पहले सेंसेक्स और निफ्टी ने बढ़त गंवा दी, और यह रेड जोन में बंद हुए। आज जब कारोबार शुरू हुआ, तो फिर से गिरावट देखी गई। शुरुआती कारोबार में बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक गिर गया।  इस गिरावट की वजहें जानने के लिए रुकिए, क्योंकि यह निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

सेक्टर्स का हाल और निवेशकों का नुकसान

सबसे ज्यादा टूटने वाले सेक्टर्स में रियलिटी (Realty), पीएसयू बैंक (PSU Banks), मीडिया और ऑटो इंडेक्स में 1% से 1.8% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। गिरावट के इस माहौल में केवल आईटी (IT) और फार्मा (Pharma) सेक्टर्स ने मामूली बढ़त के साथ बाजार को थोड़ा सहारा दिया।

गैस और तेल की बढ़ती कीमतें

मार्केट में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह गैस और तेल की बढ़ती कीमतें हैं। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव (विशेषकर अमेरिका-इरान संघर्ष) के चलते ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, जिससे देश में ‘इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन’ (आयातित महंगाई) और चालू खाता घाटा बढ़ने का खतरा गहरा गया है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों ने इन्वेस्टर सेंटिमेंट को प्रभावित किया है। जब भी क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ती हैं, तो आर्थिक दृष्‍टिकोण पर नकारात्मक असर पड़ता है। इससे महंगाई भी बढ़ सकती है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर बुरा असर पड़ता है।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी का डर

दूसरी बड़ी वजह ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी है। जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है, तो लोन लेना महंगा हो जाता है। इसके कारण उपभोक्ता खर्चे में कमी आती है, जो कंपनियों की कमाई पर असर डाल सकता है। इस चिंता ने मार्केट को और नीचे धकेलने में योगदान दिया। महंगाई के ऊंचे स्तर और कच्चे तेल के दबाव को देखते हुए केंद्रीय बैंकों (RBI और US Fed) द्वारा ब्याज दरों में कटौती टलने या आने वाले समय में दरें और बढ़ाने की आशंका मजबूत हुई है, जिससे बाजार का सेंटिमेंट खराब हुआ है।

रुपए की अविष्कृति

रुपये का लगातार गिरना भी बाजार में डर का माहौल पैदा कर रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर 96.86 पर पहुंच गया है।  रुपये की इस कमजोरी से विदेशी निवेशकों (FIIs) का भरोसा डगमगाया है। जब रुपया कमजोर होता है, तो आयातित सामान की कीमतें बढ़ती हैं, जिससे महंगाई में इजाफा होता है। इससे निवेशकों में चिंता बढ़ती है, और वे शेयर बेचने को मजबूर होते हैं। यह स्थिति शेयर बाजार में गिरावट का एक महत्वपूर्ण कारण बन गई है।

ग्लोबल मार्केट का प्रभाव

ग्लोबल मार्केट में भी गिरावट दिखाई दे रही है। अमेरिका और यूरोप के बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है। विदेशी निवेशकों का कम आना और आशंका के चलते घरेलू निवेशकों का भरोसा भी कमजोर हुआ है। इससे बाजार में और दबाव बढ़ा है।

सेक्टर्स पर दबाव

कई सेक्टर्स इस गिरावट से प्रभावित हुए हैं, जैसे ऑटोमोबाइल, बैंकिंग और टेक्नोलॉजी। ये सेक्टर्स मार्केट की सेहत के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, और जब इनमें कमजोरी आती है, तो पूरे मार्केट पर नकारात्मक असर पड़ता है। निवेशकों को आने वाले समय में इन सेक्टर्स की परफॉर्मेंस का ध्यान रखना होगा।

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