ऑपरेशन टाइगर बनाम ऑपरेशन वुल्फ: संजय राउत के तीखे तेवर, शिवसेना (UBT) की नई रणनीति

The CSR Journal Magazine

संजय राउत के बयान से ठाकरे गुट में हलचल, बड़ा कदम लेने की तैयारी, सांसदों को बचाने के लिए स्पीकर को पत्र और व्हिप जारी

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट में मची भारी सियासी हलचल और संजय राउत के बयानों के बीच पार्टी अब कानूनी और रणनीतिक कदम उठाने की तैयारी में है। महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं के बीच उद्धव गुट के 9 में से 6 से 7 सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की अटकलें तेज हैं। इस संभावित बगावत को रोकने के लिए ठाकरे गुट दिल्ली से लेकर मुंबई तक पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।

ठाकरे की पार्टी में बिखराव का संकट

उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों ने हाल ही में पार्टी छोड़ने का फैसला किया है। ये सांसद अब एक अलग गुट बनाने की कोशिश कर रहे हैं, और यह माना जा रहा है कि वे जल्द ही एकनाथ शिंदे की पार्टी में शामिल होने वाले हैं। इस पर संजय राउत ने बयान दिया और कहा कि बागी नेताओं को माफ नहीं किया जाएगा। उनकी यह टिप्पणी महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आई है।

मुख्य घटनाक्रम और संजय राउत के बड़े दावे

राज्यसभा सांसद संजय राउत ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उद्धव गुट के सांसदों को तोड़ने के लिए ₹50 करोड़ का ऑफर दिया जा रहा है, जिसमें से ₹15 करोड़ एडवांस के रूप में दिए जा चुके हैं। राउत ने ट्वीट कर दावा किया कि नांदेड और पुणे हवाईअड्डे पर चार्टर्ड विमान उतारकर सांसदों को ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत ले जाया गया है। उन्होंने बगावत की अटकलों में घिरे सांसदों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जिनकी हैसियत कभी रिक्शा में घूमने की नहीं थी, वे आज ठाकरे ब्रांड के नाम पर निजी विमानों में घूम रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि बेईमानी करने वालों को जनता माफ नहीं करेगी।

ठाकरे गुट की ओर से बड़े कदम उठाने की तैयारी

संभावित टूट से निपटने और अपनी ताकत बचाए रखने के लिए उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं-
लोकसभा स्पीकर को पत्र: उद्धव गुट के वरिष्ठ नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि शिवसेना (UBT) से अलग होने वाले किसी भी संभावित बागी धड़े या गुट को सीधे तौर पर मान्यता न दी जाए।
पार्लियामेंट्री पार्टी मीटिंग और व्हिप: सांसदों की एकजुटता दिखाने और किसी भी अनहोनी को टालने के लिए पार्टी ने दिल्ली में संसदीय दल की बैठक बुलाई है और सभी सांसदों के लिए कड़ा व्हिप जारी किया है।
ऑपरेशन वुल्फ’ की चेतावनी: एकनाथ शिंदे गुट के ‘ऑपरेशन टाइगर’ के जवाब में संजय राउत ने चेतावनी दी है कि उनका खेमा अब ‘ऑपरेशन वुल्फ’ (Operation Wolf) शुरू करेगा, जिसके तहत शिंदे खेमे में गए नेताओं को वापस लाने की रणनीति बनाई जा रही है।
विधायकों की आपात बैठक: आगामी विधानसभा सत्र को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने 22 जून को ‘शिवालय’ में अपने विधायकों की अहम बैठक बुलाई है, ताकि विधानसभा में डैमेज कंट्रोल किया जा सके और विधायकों को टूटने से बचाया जा सके।

संजय राउत का बयान और राजनीतिक तापमान

संजय राउत, जो इस समय दिल्ली में हैं, बंटवारे को रोकने के प्रयास में जुटे हैं। उन्होंने कहा है कि जो लोग बागी हैं, उन्हें सबक सिखाया जाएगा। उनकी इस टिप्पणी ने अटकलें बढ़ा दी हैं कि ठाकरे गुट कोई बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। राउत ने फंड की कमी को लेकर उठाए गए सवालों पर भी उत्तर दिया।

फंड की कमी को बताया बहाना

राउत ने स्पष्ट किया कि फंड की कमी के कारण पार्टी छोड़ने का दावा गलत है। उन्होंने कहा, “हम विपक्ष में हैं तो हमें यह मानना होगा कि फंड नहीं मिलेगा। लेकिन यह सब बहाने हैं। अगर हमें बिल्कुल भी फंड नहीं मिलता, तो हम क्या कर सकते हैं?” उनकी टिप्पणी ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है।

बागी नेताओं पर कड़ा रुख

संजय राउत ने बागी नेताओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, “पहले बंटवारे के समय स्थिति अलग थी, लेकिन अब ये सांसद हमारे पार्टी सदस्यों के रूप में चुनाव जीत कर आए हैं। इसलिए उन्हें माफ नहीं किया जा सकता। हम अपने पार्टी कार्यकर्ताओं की जान जोखिम में नहीं डालेंगे।”

व्हिप जारी, कानूनी कार्रवाई की आशंका

इस बीच, ठाकरे गुट ने सभी सांसदों को उपस्थित रहने का आदेश देते हुए व्हिप जारी किया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इसके बाद कानूनी कार्रवाई होती है या नहीं। इस घटनाक्रम में संजय राउत की अगुवाई में ठाकरे गुट की रणनीति निश्चित रूप से सभी की निगाहों में होगी।

कौन-कौन से नेता हुए अलग?

जिन सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने का फैसला किया है, उनमें हिंगोली से नागेश पाटिल, शिरडी से भाऊसाहेब वाघचौरे, उत्तर पूर्वी मुंबई से संजय दीना पाटिल, वाशिम से संजय देशमुख, धारशिव से ओमराजे निंबालकर और परभणी से संजय जाधव शामिल हैं। इस पर राज्य के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने टिप्पणी की, “उद्धव ठाकरे की पार्टी से छह सांसद अलग हुए हैं। यदि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अलग गुट बनाने की मांग की है, तो यह निर्णय लोकसभा अध्यक्ष लेंगे।”

ठाकरे पर उठे प्रश्न

उदय सामंत ने उद्धव ठाकरे की आलोचना करते हुए कहा कि जिन कारणों से चार साल पहले विद्रोह हुआ था, वे फिर से वही कारण साबित हो रहे हैं। इस राजनीतिक उलटफेर ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है और सभी की नजरें थकरी गुट के भविष्य पर टिकी हुई हैं।

विपक्षी और सत्ताधारी दलों की प्रतिक्रिया

शिंदे गुट के नेताओं (जैसे कृपाल तुमाने) का दावा है कि उद्धव गुट के 7 सांसद और 16 विधायक उनके संपर्क में हैं जो विकास कार्यों से प्रभावित होकर उनके साथ आना चाहते हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने संजय राउत के ₹50 करोड़ के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि सांसदों का जाना उद्धव गुट का अंदरूनी मामला है और इसमें भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है। फिलहाल, उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे खुद नाराज सांसदों से सीधे बातचीत कर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दिल्ली में लोकसभा स्पीकर से संभावित मुलाकातों की खबरों ने ठाकरे खेमे की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos