सत्ता पक्ष की बड़ी बैठक: मानसून सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर रणनीति बन गई

The CSR Journal Magazine
20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण बिलों पर चर्चा होने वाली है। इनमें परिसीमन और महिला आरक्षण बिल शामिल हैं, जिन पर सत्ता पक्ष ने विशेष ध्यान दिया है। इसको लेकर शुक्रवार को एक अहम बैठक हुई, जिसमें सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने भविष्य की रणनीति पर मंथन किया। संसद का पारा गर्म है और सरकार की योजना है कि इस बार इन मुद्दों पर विचार के बजाय राजनीतिक गणित को ध्यान में रखकर निर्णय लिए जाएं।

सियासी बवाल की संभावना

इस बार मानसून सत्र में हंगामे की संभावना अधिक है, क्योंकि सरकार केवल बिलों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रही है, बल्कि राजनीतिक मुद्दों को भी हवा देने की कोशिश कर रही है। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य महत्वपूर्ण नेता मौजूद थे। उनकी उपस्थिति इस बात का संकेत है कि सरकार को केवल हंगामे को संभालने का काम नहीं करना है, बल्कि बिलों और सांसदों की संख्या को भी प्रबंधित करना है।

लोकसभा की सीटों का गणित बदलने वाला बिल

परिसीमन और महिला आरक्षण बिल सत्ता पक्ष के एजेंडे में सबसे ऊपर हैं। लोकसभा की सीटों का गणित इस बार बदलने वाला है, जोकि महिलाओं को आरक्षण का रास्ता खोलेगा। 130वें संविधान संशोधन पर भी चर्चा जारी है, जो सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, सरकार के पूर्व मंत्री इस विषय पर चुप्पी साधे हुए हैं। उनके मुताबिक, विपक्ष को भी अपने चुनावी नतीजों का ध्यान रखना चाहिए।

विपक्ष की तैयारियाँ

कांग्रेस ने भी परिसीमन बिल का विरोध करने की योजना बनाई है। बेरोजगारी, महंगाई, NEET पेपर लीक और खाद्य सुरक्षा कानून को लेकर विपक्ष ने मुद्दों की एक विस्तृत सूची तैयार की है। जयराम रमेश ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सर्वदलीय बैठक में नेता भले ही अधिक हों, लेकिन सुनवाई कम होगी। इसलिए विपक्ष ने अपनी रणनीति मजबूत की है।

एक देश, एक चुनाव पर चर्चा

एक देश, एक चुनाव और 130वें संविधान संशोधन जैसे मुद्दों पर भी विपक्ष एकजुट हो रहा है। हालाँकि, परिसीमन पर INDIA गठबंधन की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। इस बार संसद में बिलों की संख्या भले ही कम न हो, लेकिन असली चुनौती वोटों का गणित होगा। 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

सत्ता पक्ष की गणितीय योजना

सत्ता पक्ष के पास इस समय लगभग 298 सांसद हैं। नए समीकरण के तहत, टीएमसी के बागी सांसदों और अन्य दलों के साथ मिलकर उनकी संख्या बढ़ सकती है। यह सब दर्शाता है कि सरकार केवल विपक्ष पर नहीं, बल्कि कुछ ऐसे सांसदों पर भी नजर रखे हुए है जो भविष्य में स्थिति बदल सकते हैं। इस बीच, कांग्रेस को उम्मीद है कि डीएमके अभी भी विपक्ष का साथ निभाने के लिए तैयार है।

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