आसाराम बापू को मिली बड़ी राहत नहीं, हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा बरकरार रखी

The CSR Journal Magazine
राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम बापू को नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में राहत देने से मना कर दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की बेंच ने यह निर्णय बुधवार, 27 मई को सुनाया। यह मामला पिछले काफी समय से चल रहा था और अब हाईकोर्ट के इस फैसले ने आसाराम को नया झटका दिया है।

जमानत की अवधि बढ़ने के बाद भी परेशानी

आसाराम इस समय जमानत पर चल रहे हैं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें तुरंत सरेंडर करने का आदेश दिया है। दो दिन पहले उनकी जमानत की अवधि 7 जुलाई तक बढ़ाई गई थी। हालाँकि, अब उन्हें तुरंत वापस जेल में जाना होगा। यह सब तब हुआ जब हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ अपील का फैसला सुनाया।

सह आरोपियों को मिली राहत

कोर्ट ने आसाराम समेत अन्य तीन आरोपियों की अपीलों पर सुनवाई की, जिसमें सह आरोपी शिल्पी और शरतचंद को सजा से राहत मिल गई है। कोर्ट ने दोनों को बरी किया है, जबकि आसाराम की उम्रकैद की सजा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह निर्णय महत्वपूर्ण है और कानूनी दृष्टिकोन से भी एक बड़ा मोड़ है।

क्या है पूरी कहानी?

इस मामले की शुरुआत अगस्त 2013 में हुई थी जब एक नाबालिग छात्रा ने जोधपुर स्थित आश्रम में आसाराम पर यौन शोषण और दुष्कर्म के आरोप लगाए थे। विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 25 अप्रैल 2018 को आसाराम को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अन्य सह-आरोपियों को भी 20-20 साल की सजा सुनाई गई थी।

लंबी सुनवाई के बाद आया फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट में 16 फरवरी से 20 अप्रैल के बीच इस केस की डे-टू-डे सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए। बेंच ने 20 अप्रैल को मामले का फैसला सुरक्षित रखा और अब इस पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया गया।

पुलिस जांच का महत्व

पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और विभिन्न परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आसाराम को दोषी पाया था। यह केस तब चर्चित हुआ जब एक नाबालिग लड़की ने आरोप लगाया कि आसाराम ने उसे धार्मिक उपचार के बहाने आश्रम में बुलाया और वहां उसका यौन शोषण किया।

आगे का रास्ता

आसाराम बापू का मामला अब कानूनी प्रक्रिया में एक और मोड़ पर है। वे फिलहाल पैरोल पर हैं, लेकिन उन्हें तुरंत सरेंडर करने के लिए कहा गया है। इस फैसले से न केवल आसाराम, बल्कि अन्य कई मामलों में पीड़ितों को भी न्याय मिलने की उम्मीद जागी है।

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