कुर्सी की खातिर पार्टियों में मचा राजनीतिक घमासान, उद्धव को मिला राज ठाकरे का समर्थन

The CSR Journal Magazine
राज ठाकरे ने हाल ही में शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसदों की बगावत के बीच उद्धव ठाकरे को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने राजनीतिक फायदे के लिए सांसदों को बांटने की कोशिशों की निंदा करते हुए कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है। ठाकरे ने मुंबई में आयोजित एक सभा में ये बातें कहीं। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि सत्ता के लिए चल रही राजनीति आम लोगों के लिए चिंता का विषय है।

सत्ता की दौड़ में बड़े मुद्दों की अनदेखी

राज ठाकरे ने इस दौरान ये भी कहा कि राजनीतिक दलों की इस दौड़ में बड़े मुद्दों को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे का समर्थन करते हुए कहा कि वर्तमान में विधायकों और सांसदों को किडनैप करने की प्रवृत्ति राजनीतिक संस्कृति के लिए हानिकारक है। उन्होंने पुराने समय की याद दिलाते हुए बताया कि जब आत्म सम्मान खत्म हो जाता है, तो केवल जिंदा लाशें बचती हैं।

उद्धव ठाकरे का प्रतिरोध

उद्धव ठाकरे ने कहा है कि वह पार्टी अध्यक्ष पद हमेशा चोरों के हाथों में नहीं जाने देंगे। वर्तमान बगावत पर अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा कि वह पार्टी कार्यकर्ताओं के भरोसे पर निर्भर हैं। यदि कार्यकर्ता उनका समर्थन नहीं करते हैं, तो वह पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने के लिए भी तैयार हैं। उद्धव ने 60वें स्थापना दिवस पर कहा कि पार्टी के किसी मजबूत लीडर का राष्ट्रपति बनना उन्हें खुशी देगा।

शिवसेना (UBT) में बढ़ता तनाव

शिवसेना (UBT) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह की बगावत ने पार्टी के भीतर एक नया संकट उत्पन्न कर दिया है। बगावत करने वाले सांसदों ने आवश्यक संसदीय मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया, जिसके चलते पार्टी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शिवसेना (UBT) ने इस मामले में गैरहाजिर सांसदों को 24 घंटे के भीतर सफाई देने के लिए कहा है।

ऐतिहासिक बगावत के फिर से उभरने के आसार

इस बगावत ने पार्टी में और अधिक लोकतंत्रात्मक फूट की अटकलें लगाई हैं। 2022 में एकनाथ शिंदे द्वारा उद्धव ठाकरे के खिलाफ की गई बगावत ने पहले ही पार्टी के भीतर विभाजन किया था। अब फिर से ऐसे घटनाक्रमों ने उद्धव के नेतृत्व को चुनौती दी है और महाराष्ट्र में विपक्षी राजनीतिक स्थिति को और भी जटिल बना दिया है।

राज ठाकरे की राजनीतिक चालें

राज ठाकरे ने अपने बयान में राजनीतिक पार्टियों को आरोप लगाते हुए कहा कि वे पब्लिक सपोर्ट के बजाय विरोधियों को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे चुनावी स्ट्रेटेजी को समझें। उनका कहना था कि हमारे आंदोलनों का असर घरों तक पहुंचता है, लेकिन वे बैलेट बॉक्स में तब्दील नहीं होते। ऐसे में क्या हमें समझ नहीं आ रहा है कि हमारे चारों ओर क्या चल रहा है?

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