क्या पार्टी के साथ किस्मत भी बदली? 2019 और 2024 में कितने दल-बदलू सांसद चुनाव जीते, कितने हारे

The CSR Journal Magazine
चुनाव से पहले पार्टी बदलने वाले नेताओं की सफलता की गारंटी नहीं होती। 2019 में दल-बदल कर चुनाव लड़ने वाले सभी 12 लोकसभा सांसद हार गए, जबकि 2024 में बीजेपी के 110 बाहरी उम्मीदवारों में से 69 को असफलता मिली। ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) के आंकड़े बताते हैं कि पार्टी बदलने से वोटर्स का भरोसा नहीं बदलता, पर संपत्ति का नुकसान नहीं होता। भारतीय राजनीति में यह चुनावी खेल पुराना है, लेकिन यह धारणा कि पार्टी का झंडा बदलने से जीत पक्की हो जाती है, न केवल गलत है बल्कि वोटर्स की सोच को भी नजरअंदाज करती है।

2019 का चुनाव: दल-बदलू सांसदों का स्ट्राइक रेट 0%

2019 के लोकसभा चुनावों में दल-बदल का मंजर देखने को मिला था। ADR की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से 2020 के बीच 12 मौजूदा सांसदों ने अपनी पार्टी छोड़ी और चुनाव लड़ा। इनमें से 5 (41.7%) ने भाजपा से दूसरी पार्टी का दामन थाम लिया। दूसरे कई सांसदों ने कांग्रेस ज्वाइन की। जनता ने इन सब को पूरी तरह से नकार दिया। 2019 में सभी 12 सांसद चुनाव हार गए, जो साबित करता है कि पार्टी बदलने का हर बार फायदा नहीं होता।

2024 का चुनाव: 62% बाहरी उम्मीदवार हारे

2024 में बीजेपी को 303 सीटों से 240 सीटों पर सिमटना पड़ा, जिसमें दल-बदलुओं पर जरूरत से ज्यादा भरोसा दिखाना एक बड़ा कारण रहा। बीजेपी ने चुनाव में 441 उम्मीदवारों में से 110 दल-बदलू उम्मीदवारों को टिकट दिया। इनमें से 62% (69 नेता) चुनाव हार गए। 2023 और 2024 में बीजेपी में शामिल होने वाले 34 बाहरी नेताओं में से 27 भी हार गए।

कहां से आए थे ये नेता?

बीजेपी के टिकट पाने वाले 110 बाहरी नेताओं में से सबसे ज्यादा 38 कांग्रेस से आए थे, इसके बाद बीएसपी से 11, BRS से 9, टीएमसी से 7, बीजेडी से 6 और एनसीपी व सपा से 4-4 नेताओं ने चुनाव लड़ा। अकेले कांग्रेस से आए 38 में से 20 नेता चुनाव हार गए। यह दर्शाता है कि पार्टी बदलने का असर नकारात्मक हो सकता है।

दिग्गज सांसदों का क्या हुआ?

हारने वाले दिग्गज दल-बदलू सांसदों में रवनीत सिंह बिट्टू (लुधियाना), परनीत कौर (पटियाला), अग्निवीर मेनका गांधी (2004 में बीजेपी में आई और हार गईं), सहित कई अन्य नेता शामिल हैं। वहीं, कुछ दिग्गज जैसे ज्योतिरादित्य सिंधिया (कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद जीते) सफल रहे।

राज्यसभा में 100% पास

लोकसभा चुनाव में जहां दल-बदलू नेताओं को हार का सामना करना पड़ा, वहीं राज्यसभा में 16 सांसदों ने पाला बदला और सभी फिर से चुनाव जीते। राज्यसभा के मामलों में सफलता दर 100% रही है, क्योंकि जनता सीधे वोट नहीं देती।

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