संसद मानसून सत्र 2026: 21 जुलाई से शुरू होगा विधायी महामंथन

The CSR Journal Magazine

21 जुलाई से संसद का मॉनसून सत्र, कई अहम मुद्दे होंगे छाए

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई के बजाय 21 जुलाई से 21 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसकी जानकारी संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा दी गई है। स्वतंत्रता दिवस के आयोजनों को ध्यान में रखते हुए 13 और 14 अगस्त को संसद की कोई बैठक नहीं होगी।

संसद का सत्र, राजनीतिक गर्मी लाएगा?

संसद का मॉनसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जिसमें 19 बैठकें आयोजित की जाएंगी। इस बार एनडीए कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने की योजना बना रही है, जिसमें विशेषकर महिला आरक्षण बिल और संविधान संशोधन शामिल हैं। राजनीतिक माहौल में गर्माहट लाने वाले मुद्दे, क्षेत्रीय दलों के बीच टूट और स्पीकर के फैसले होंगे। यह सत्र 13 अगस्त तक चलने की संभावना है।

महिला आरक्षण बिल पर चर्चा

एनडीए इस सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल लाने की बात कर रही है। इस महत्वपूर्ण बिल में लोकसभा और विधानसभा की सीटें 50 प्रतिशत बढ़ाने का प्रावधान भी शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, सरकार 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर भी गौर कर रही है, जो पीएम, सीएम और मंत्रियों की कुर्सी 30 दिन से ज्यादा जेल में रहने पर छीनने का प्रावधान करता है।

पीएम-मुख्यमंत्री अयोग्यता विधेयक

कथित संविधान संशोधन विधेयक जिस पर काफी चर्चा है, के तहत दोषी पाए जाने वाले पीएम या सीएम की अयोग्यता पर नियम तय किए जा सकते हैं। सत्र में ‘नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल’ (National Sports Governance Bill), ‘नेशनल एंटी डोपिंग (संशोधन) बिल’ (National Anti-Doping (Amendment) Bill), और ‘इनकम टैक्स बिल’ (Income-tax Bill) जैसे प्रस्तावित विधेयकों पर विचार किया जा सकता है। सत्र काफी हंगामेदार रहने की उम्मीद है, जिसमें विपक्ष द्वारा पेपर लीक, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरे जाने के पूरे आसार हैं।

कौन से विधेयक हो सकते हैं शामिल?

मॉनसून सत्र में एक देश एक चुनाव बिल, एफसीआरए बिल, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल और एंटी डोपिंग बिल पर चर्चा की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का अध्यादेश भी इस सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जा सकता है। अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों में कोड ऑन वेजेस सेंट्रल रूल्स, कॉर्पोरेट लॉ और सिक्यूरिटीज मार्केट कोड भी शामिल हैं।

विपक्ष का रुख

विपक्ष ने बारिश की कमी और बाढ़ की स्थिति पर चर्चा की मांग की है। इसके अलावा, नीट पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी, महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और बेरोजगारी जैसी समस्याओं को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की जाएगी। भाजपा ने पश्चिम बंगाल और असम में जीत के बाद आत्मविश्वास से भरी हुई है, और वह इंडिया ब्लॉक के टूटने के जरिए विपक्ष को चुनौती देने की योजना बना रही है।

अन्य संभावित मुद्दे

इसके अतिरिक्त, मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान एसआईआर का मुद्दा भी विपक्ष की तरफ से उठाया जा सकता है। क्षेत्रीय दलों में टूट और उसके कारणों पर भी चर्चा की जाएगी। टीएमसी, शिवसेना यूबीटी, और डीएमके जैसे दलों के बीच मौजूदा मतभेदों का असर इस सत्र के दौरान देखना महत्वपूर्ण होगा। स्पीकर द्वारा टीएमसी के शामिल बागी सांसदों के एनसीपीआई में विलय पर भी फैसला लिया जाएगा।

गर्मी का बढ़ता माहौल

संसद के इस मॉनसून सत्र में एक बार फिर से राजनीतिक गर्माहट बढ़ने की संभावना है। एनडीए का दो तिहाई बहुमत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। ऐसे में अगले कुछ हफ्तों में कई हलचलें देखने को मिल सकती हैं। आप संसद की दिन-प्रतिदिन की आधिकारिक कार्यवाही और कार्यसूची की जानकारी डिजिटल संसद वेबसाइट पर प्राप्त कर सकते हैं। विधेयकों के विस्तृत विश्लेषण और सत्र की ट्रैकिंग के लिए पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च का उपयोग किया जा सकता है।

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