महाराष्ट्र की सियासत में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की सुगबुगाहट, राउत बोले- सांसदों को मिला करोड़ों का ऑफर
शिवसेना (UBT) के सांसदों को पाला बदलने के लिए ₹15-15 करोड़ के एडवांस ऑफर का दावा पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर किया है। महाराष्ट्र की राजनीति में इसे ‘ऑपरेशन टाइगर’ (Operation Tiger) कहा जा रहा है, जिसके तहत उद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 6 से 7 सांसदों के टूटने और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।
महाराष्ट्र में टूट की आशंका बढ़ी
महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय हलचल तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 सांसदों में से 6 मंगलवार को चार्टर्ड विमान से दिल्ली पहुंच गए। इन सांसदों का आज लोकसभा स्पीकर के साथ मिलने का कार्यक्रम है। साथ ही, सुबह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की जा सकती है। इस बीच, खबरें आ रही हैं कि महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे भी दिल्ली रवाना हो गए हैं। शिवसेना के MLC कृपाल तुमाने का बयान है कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत पिछले एक महीने से बातचीत चल रही है और अब यह अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। मानसून सत्र से पहले ये सांसद शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।
लोकसभा स्पीकर को पत्र
बगावत के खतरे को भांपते हुए शिवसेना (UBT) के नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को तुरंत एक पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि विरोधी विरोधी कानून के तहत किसी भी बागी या अलग गुट को मान्यता न दी जाए। UBT के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने आरोप लगाया है कि उनके सांसदों को पाला बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये के ऑफर दिए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके दो सांसद (राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल) ने शिंदे गुट में जाने की अफवाहों को खारिज कर दिया है।
आपातकालीन बैठक
स्थिति को संभालने के लिए शिवसेना (UBT) ने गुरुवार (18 जून) को दिल्ली में अपने संसदीय दल की आपातकालीन बैठक बुलाई है और सांसदों पर नकेल कसने के लिए व्हिप जारी करने की तैयारी में है। दिल्ली में राजनीतिक हलचल चरम पर है। शिंदे गुट के नेता कृपाल तुमाने ने दावा किया है कि सांसदों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है और मानसून सत्र से पहले यह ऑपरेशन पूरा हो जाएगा।
राउत का तीखा बयान
शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने मंगलवार रात को सोशल मीडिया पर लिखा कि सांसदों को पार्टी बदलने के लिए ₹15 करोड़ एडवांस दिया जा रहा है। उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक बताया। इसी दिन, राउत ने कहा था कि सांसदों के अलग गुट बनाने की खबरें झूठी हैं। उनका कहना था कि पार्टी ने अपने सांसदों से अगर पार्टी छोड़ने का विचार किया तो अपने परिवार की कसम भी खाई थी। उन्होंने इस पोस्ट में भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस को भी टैग किया।
उद्धव ठाकरे का स्पष्टीकरण
उद्धव ठाकरे ने कहा है कि जो भी पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे जा सकते हैं। उन्होंने 2022 के बगावत का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय भी उन्हें बगावत की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने किसी पर दबाव नहीं बनाया। पार्टी में मची इस भारी हलचल के बीच उद्धव ठाकरे ने मुंबई में अपने निवास ‘मातोश्री’ पर सभी सांसदों की एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है और सभी को तुरंत मुंबई पहुंचने के निर्देश दिए हैं। अनिल देसाई का कहना है कि पार्टी के सभी सांसद एकजुट हैं और कुछ सांसदों के बैठक में न आने की वजह उनके पहले से तय निजी कार्यक्रम थे। उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों ने पिछले दिनों हुई बैठक में उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया था।
सांसदों की आपसी मुलाकातें
यवतमाल-वाशिम सीट से शिवसेना (UBT) के सांसद संजय देशमुख ने केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से दिल्ली में मुलाकात की थी। देशमुख ने पहले परिवारिक कारण बताते हुए बैठक में हिस्सा नहीं लिया था। हालांकि, राउत ने इस मुलाकात को लेकर गलतफहमी होने की बात कही और सभी सांसदों को एकजुट बताया।
शिंदे गुट की स्थिति
शिंदे गुट और भाजपा के नेताओं ने खरीद-फरोख्त के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने तंज कसते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी धीरे-धीरे खत्म हो रही है और उनके अपने ही सांसदों-विधायकों का अब उनके नेतृत्व पर भरोसा नहीं रहा।
क्या है ‘ऑपरेशन टाइगर’?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उद्धव ठाकरे गुट के कुल 9 सांसदों में से लगभग 6 से 7 सांसद वर्तमान नेतृत्व से नाराज हैं या पाला बदलने की तैयारी में हैं। शिंदे गुट की ओर से बागी होने वाले सांसदों को आगामी मानसून सत्र से पहले केंद्रीय कैबिनेट में मंत्री पद या अन्य बड़े राजनीतिक प्रलोभन दिए जाने की भी चर्चाएं गर्म हैं।
उद्धव की उम्मीदें
उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब समय आएगा, तब दिखा देंगे कि पार्टियां कैसे तोड़ी जाती हैं। इस समय सभी सांसद खुद को एकजुट रखने का प्रयास कर रहे हैं। चार साल पहले हुई टूट ने शिवसेना की राजनीति में बदलाव ला दिया था, और अब एक बार फिर से कल्पना की जा रही है कि क्या यह गुट एक हो सकेंगे। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले और संसद के आगामी सत्र को देखते हुए यह राजनीतिक घमासान राज्य की सियासत में एक बार फिर 2022 जैसी बड़ी टूट की पुनरावृत्ति की ओर इशारा कर रहा है।
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