Odisha: पति ने बाइक पर लाकर ली पत्नी का शव, परिजन बोले- घंटों इंतजार पर भी नहीं मिला एंबुलेंस

The CSR Journal Magazine
ओडिशा के झारसुगड़ा जिले में एक व्यक्ति को अपनी पत्नी का शव बाइक पर ले जाने के लिए मजबूर किया गया। उडियापाली गांव के नरेश छत्रिया की पत्नी जमुना की मृत्यु मुद्रजोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई थी। जब नरेश अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचे, तब डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इससे नरेश और उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

एंबुलेंस का इंतजार और मजबूरी

नरेश ने शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस मंगवाई, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी शव वाहन नहीं आया। अंततः नरेश ने अपने पड़ोसी की बाइक पर पत्नी के शव को रखा और उसे घर लाने का निर्णय लिया। मुंद्राजोर CHC से उडियापाली गांव की दूरी लगभग 5 किमी है। इस पूरे दृश्य का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें नरेश अपनी पत्नी के शव को चादर से ढककर बाइक पर ले जाते हुए नजर आ रहे हैं।

सामाजिक दबाव और डर

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नरेश ने एंबुलेंस मिलने का इंतजार नहीं किया क्योंकि उन्हें डर था कि डॉक्टर पत्नी का पोस्टमॉर्टम करा देंगे। ऐसा होने पर उन्हें समाज के सामने सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ सकता था और साथ में एक बड़ा भोज भी देना पड़ सकता था। इसी वजह से उन्होंने शव को बाइक पर ही घर लेकर जाना उचित समझा।

आधिकारिक प्रतिक्रिया

झारसुगड़ा के CDMO, डॉ. शक्ति प्रसाद पाधी, ने कहा कि मुंद्राजोर CHC में स्थायी शव वाहन नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि अन्य स्थान से शव वाहन की व्यवस्था की अन्य कार्यवाही चल रही थी, लेकिन परिजन पोस्टमॉर्टम कराने से मना करते हुए शव अपने साथ ले गए। पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं, और यदि किसी चिकित्सक या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पुरानी यादें ताजा

नरेश छत्रिया की घटना ने दाना माझी की एक दर्दनाक घटना की याद ताजा कर दी है। पिछले 10 साल पहले, अगस्त 2016 में ओडिशा के कालाहांडी में, दाना माझी ने अपनी पत्नी के शव को कंधे पर उठाकर 10 किमी तक पैदल चलने का पराक्रम किया था। उनके साथ उनकी छोटी बेटी भी थी। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो देशभर में वायरल हो गए थे और इसे गरीबी और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से जोड़ा गया था।

स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल

झारसुगड़ा की इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की अपर्याप्तता पर सवाल उठाया है। Oडिशा सरकार ने इसके बाद शव-परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए महाप्रयाण योजना जैसी मुफ्त शव-वाहन सेवाएं शुरू की थीं। हालांकि, अब भी ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जो स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता को दर्शाती हैं।

अन्य हैरान करने वाली घटनाएँ

इस महीने की शुरुआत में एक और घटना में, एक शख्स अपनी बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा था, जिससे यह भी प्रमाणित होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाओं में कमी एक गंभीर समस्या है। ऐसा लग रहा है कि अभी भी हमें समस्या का समाधान खोजने की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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