NEET पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहले दिन टली सुनवाई, CBI के वकील कोर्ट ही नहीं पहुंचे

The CSR Journal Magazine
NEET पेपर लीक मामले में आज दिल्ली के फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहली बार सुनवाई होनी थी। लेकिन, इस सुनवाई में सीबीआई के वकील समय पर नहीं पहुंचे, जिससे मामला टल गया। जमानत याचिका पर सुनवाई थी, जिसमें आरोपियों दिनेश और विकास बिवाल शामिल थे। कोर्ट में आज मौजूद जज और दोनों आरोपियों के वकील एपी सिंह ने कहा कि सुनवाई का टलना न्याय प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय है।

क्या सीबीआई की लापरवाही का लाभ उठाएंगे आरोपी?

इस मामले के चलते कई सवाल खड़े हुए हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर सीबीआई और सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाए हैं। क्या सीबीआई की यह लापरवाही आरोपियों के लिए फायदेमंद साबित होगी? पहले भी कई बार देखा गया है कि ऐसे मामलों में आरोपियों को जल्दी जमानत मिल जाती है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार मामला अलग होगा, लेकिन स्थिति अब भी घनी है।

क्या कोर्ट की प्रक्रिया पर असर पड़ेगा?

आज की सुनवाई का न होना कानूनी रूप से केस की जांच, मेरिट या आरोपियों की जमानत पर कोई प्रभाव नहीं डालेगा। लेकिन, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सीबीआई की प्रगति के सवाल उठने लाजिमी हैं। विपक्ष का मानना है कि सरकार और सीबीआई को इस मामले में अधिक गंभीरता से काम करना चाहिए।

सुनवाई में क्या हो रहा था?

नेपाल के NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने दिनेश और विकास बिवाल को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि ये दोनों उन 13 लोगों में शामिल हैं जिन्होंने पेपर लीक करने का काम किया। सीबीआई के अनुसार, आरोपियों ने अन्य उम्मीदवारों को लीक किए गए पेपर बेचने का काम किया, जिसके लिए उन्होंने पैसे का लेन-देन किया। सीबीआई का दावा है कि आरोपी के माता-पिता ने इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अभियोजन पक्ष की तैयारी में कमी?

फास्ट ट्रैक कोर्ट के सामने यह भी सवाल है कि क्या सीबीआई ने इस मामले में पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति की है या नहीं। जज ने कोर्ट में सीबीआई के डायरेक्टर से पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति के लिए कहा था, लेकिन वर्तमान में इसकी स्थिति साफ नहीं है। ऐसे में कानूनी प्रक्रिया में अवरोध आ रहा है।

आरोपियों के वकील की प्रतिक्रिया

इस मामले में आरोपियों के वकील एपी सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन जल्दबाजी में किया गया है। उन्होंने अपने मुवक्किलों की जमानत के मामले में कोर्ट में अपना पक्ष रखने की बात कही। एपी सिंह का कहना है कि न्याय में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष ट्रायल की आवश्यकता है और वे उम्मीद करते हैं कि उनकी बात सुनी जाएगी।

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