बिरयानी बयान पर NCW की नाराजगी, प्रणीत और हिमांशु की माफी खारिज

The CSR Journal Magazine
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणीत मोरे, मधुर विरली और दर्शक हिमांशु जांगड़ा की माफी को खारिज कर दिया है। आयोग ने इन तीनों को अगली सुनवाई के लिए पेश होने का निर्देश दिया है। इस मामले की सुनवाई 22 जून को हुई, जिसमें महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर यह निर्णय लिया गया। इस विवाद का आरंभ तब हुआ जब जांगड़ा ने एक शो के दौरान चर्चित ‘370 रुपये बिरयानी’ टिप्पणी की। ऐसा कहा गया कि जांगड़ा ने डेट पर जाने का जिक्र करते हुए कुछ अनंगत बातें कहीं थीं।

महिलाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं

सुनवाई के दौरान आयोग की अध्यक्ष विजया राहतकर ने अपमानजनक सामग्री को कॉमेडी के नाम पर बढ़ावा देने पर चिंता और नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आयोग रचनात्मक स्वतंत्रता का समर्थन करता है, लेकिन यह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है कि महिलाओं की शारीरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन किया जाए। यह टिप्पणी न केवल अपमानजनक थी, बल्कि समाज में अपराधों को मजाक के रूप में पेश करने की कोशिश भी थी।

समन का जारी होना

NCW ने इस संदर्भ में प्रणीत मोरे और हिमांशु जांगड़ा को समन जारी किया था ताकि वे आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपने बयान स्पष्ट कर सकें। इसके अलावा मधुर विरली को भी अलग मामले में समन भेजा गया था। इस घटना का असर यह हुआ कि दो संबंधित हस्तियों को पब्लिक मंच पर आने से पहले अपनी कहानी पेश करनी पड़ी।

क्या है 370 रुपये बिरयानी का मामला?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रणीत मोरे के एक शो के दौरान हिमांशु जांगड़ा ने एक डेट पर खर्च की गई 370 रुपये की चिकन बिरयानी के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि जब महिला ने उन्हें घर छोड़ने के लिए कहा तो उन्होंने बिरयानी के पैसे के बदले शारीरिक संबंध बनाने की मांग की। इस बयान पर मोरे हंसते हुए दिखे। यह क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसके कारण विवाद तेजी से बढ़ा।

सोशल मीडिया पर बवाल

जांगड़ा और मोरे के बयान के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तीव्र प्रतिक्रिया आई। कई लोग उनकी बातों को बेहद असंवेदनशील मानते हुए उनकी आलोचना करने लगे। यहां तक कि कई सेलेब्स ने भी इस बात की निंदा की। इसके चलते जांगड़ा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को निष्क्रिय कर दिया और एक कंपनी ने उन्हें बर्खास्त भी कर दिया।

आयोग का सख्त रुख

NCW ने अपनी सुनवाई के दौरान इस बात को स्पष्ट किया कि वे महिलाओं की गरिमा और उनके अधिकारों का संरक्षण करने के प्रति गंभीर हैं। इसके बाद, त्रिमूर्ति को अगली सुनवाई में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। आयोग ने यह भी कहा कि ऐसी टिप्पणियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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