फेक न्यूज, स्टैंड-अप कॉमेडी और OTT कंटेंट पर नियंत्रण की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट में विशाल तिवारी ने एक जनहित याचिका दायर की है, जिसमें वह सोशल मीडिया, फर्जी और अश्लील कंटेंट के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। इस याचिका में कई विवादों का जिक्र किया गया है, जैसे कि 370 रुपए की बिरयानी विवाद और MBBS छात्रा द्वारा की गई असंवेदनशील टिप्पणियाँ। तिवारी का कहना है कि ऐसे मामलों से समाज में चिंता बढ़ रही है और यह आवश्यक है कि न्यायिक आयोग का गठन किया जाए जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक शालीनता के बीच संतुलन बनाए।

स्टैंड-अप कॉमेडी की संवेदनशीलता

विशाल तिवारी ने स्टैंड-अप कॉमेडी में असंवेदनशील टिप्पणियों पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि कॉमेडी एक कला है, लेकिन जब यह दूसरों की बेइज्जती करने में तब्दील हो जाती है, तो यह सार्वजनिक शालीनता के खिलाफ जा सकती है। उन्होंने तर्क किया कि फनी प्रदर्शन का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि संस्कृति और सम्मान की हानि हो। तिवारी ने इस दिशा में सोचना आवश्यक बताया है, ताकि कलाकार और समाज दोनों का समुचित विकास हो सके।

फेक न्यूज का बढ़ता खतरा

इस याचिका में सोशल मीडिया पर फैलने वाली फेक न्यूज का भी जिक्र किया गया है। तिवारी ने एक उदाहरण दिया, जिसमें यह दावा किया गया कि भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत हाल ही में कानून मंत्री और अन्य जजों के साथ ब्रिटेन में एक बैडमिंटन टूर्नामेंट में शामिल हुए। याचिका के अनुसार, ये सूचनाएँ सच नहीं थीं, फिर भी ये तेजी से फैल गईं। ऐसे फर्जी समाचार न केवल न्यायपालिका की छवि को प्रभावित करते हैं, बल्कि आम लोगों की जानकारी को भी गलत दिशा में ले जाते हैं।

समाज में बढ़ती चिंता

विशाल तिवारी की जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह के विवादों से समाज में मृतकों के प्रति सम्मान में कमी आ रही है। तिवारी ने यह भी बताया कि मेडिकल शिक्षा के लिए उपयोग होने वाले शवों पर की गई टिप्पणियाँ समाज की संवेदनशीलता को आहत कर सकती हैं। ऐसे मामलों में समाज को शीघ्र कदम उठाने की आवश्यकता है।

न्यायिक आयोग की आवश्यकता

याचिका में न्यायिक आयोग के गठन की मांग की गई है, जिसका उद्देश्य होगा फेक न्यूज, सोशल मीडिया और स्टैंड-अप कॉमेडी शो की सीमाओं को निर्धारित करना। तिवारी का कहना है कि न्यायपालिका को इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्हें उम्मीद है कि कोर्ट इस मामले पर उचित कदम उठाएगा ताकि सामाजिक सुरक्षा और जनहित को संरक्षित किया जा सके।

आगामी कार्रवाई की प्रतीक्षा

विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह इस याचिका को ध्यान में रखते हुए शीघ्रता से कार्रवाई करें। उन्होंने बताया कि फेक न्यूज और संवेदनहीन कॉमेडी समाज में विषाक्तता फैला सकते हैं, जिससे युवा पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में उपयुक्त सीमाएं निर्धारित करने की आवश्यकता है, जिससे कलाकारों को भी अपनी कला के प्रति जिम्मेदारी का एहसास हो।

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