Kuno Leopard Attacked child: किस्से कहावतें कहती हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी योद्धा मां होती है। सुनने में तो ये किसी फिल्मी डायलॉग जैसा लगता है, लेकिन मां की ताक़त को सच साबित कर दिखाया Chambal के Sheopur की एक महिला (Suraksha Dhakad) ने, जो अपने बेटे को बचाने के लिए Kuno National Park के चीते से भिड़ गई। खूंखार जानवर ने मासूम पर झपट्टा मार दिया तो मां भी ढाल बन गई और आखिरकार चीता दुम दबाकर वहां से भाग गया। रविवार को Chambal के Kuno National Park के जंगल से निकलकर एक चीता विजयपुर क्षेत्र के ऊमरी गांव में घुस गया और घर के बाहर खेल रहे एक 9 वर्षीय बालक अविनाश धाकड़ (Avinash Dhakad) पर हमला कर दिया। चीता बच्चे को अपना शिकार बना पाता, उससे पहले ही मासूम की मां चीते से भिड़ गई। काफी संघर्ष करने के बाद मां उस चीते के चंगुल से अपने बच्चे को छुड़ाने में कामयाब हो गई।
हमले में अविनाश गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे Gwalior Superspaciality Hospital में इलाज के लिए ले जाया गया। इसके बाद डॉक्टरों ने उसकी जिंदगी बचाने की जंग शुरू की। ग्वालियर के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में ढाई घंटे चले ऑपरेशन के बाद मासूम को 120 टांके लगाए गए, तब जाकर उसकी जान बच सकी। वन विभाग के DFO आर. थिरूकुरल ने पुष्टि की, कि बच्चे पर हमला करने वाला तेंदुआ था। वहीं, वन विभाग ने इस मामले में यह सफाई दी कि हमला चीते ने किया है या तेंदुए ने, यह स्पष्ट नहीं हुआ है। लेकिन बच्चे के परिजन और ग्रामीणों ने चीते के हमला करने की पुष्टि की है।
मां Suraksha Dhakad ने धरा दुर्गा रूप
गांव वालों के मुताबिक,बच्चा बाहर खेल रहा था, तभी अचानक एक चीते ने उस पर झपट्टा मार दिया। उसने मासूम का चेहरा और गर्दन अपने दांत में दबा लिया। मासूम की चीख सुनकर पास ही मवेशियों को चारा डाल रही उसकी मां Suraksha Dhakad दौड़ते हुए पहुंची और चीते के चंगुल में फंसे अपने बेटे को खींचने लगी। दूसरी तरफ से चीता जोर लगा रहा था। करीब 7 मिनट तक संघर्ष चला और उसके बाद मां अपने बेटे के प्राण चीते के मुंह से खींच लाई। लेकिन इस दौरान जानवर के दांत, नाखून और पंजे से मासूम के चेहरे और सिर पर 14 गंभीर घाव हो गए। मासूम अविनाश धाकड़ की मां सुरक्षा धाकड़ Suraksha Dhakad ने बताया कि, “जब अविनाश का शोर सुना तो मैं मवेशी को चारा डाल रही थी। मैं दौड़कर वहां पहुंची तो चीता उसे पंजे और जबड़े में दबाए खींच रहा था। मेरा बेटा संघर्ष कर रहा था। मासूम बेटे की जान मुश्किल में देख उसे बचाने के लिए मैंने चीते पर हमला कर दिया। मैंने बेटे का हाथ पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा, लेकिन ऐसा लगा, जैसे सामने से 50 आदमी खींच रहे हों। अपने बेटे के लिए मैं यमराज से भी लड़ जाती, यह तो चीता था। मैंने अपनी पूरी शक्ति लगा दी। आखिरकार मैं अपने बेटे को उस ख़ूंख़ार जानवर के जबड़े से खींच लाई, लेकिन उसका पूरा चेहरा खराब हो गया था। सिर्फ खून ही खून बह रहा था। फिर भी तसल्ली है कि आज मेरा बेटा सुरक्षित है।“
Kuno वन विभाग की लापरवाही से परेशान इलाके के लोग
Kuno National Park के अगरा वन परिक्षेत्र के वनकर्मी पुष्पेंद्र जगनेरिया ने कहा, “फोन पर चीता या तेंदुए के हमले की सूचना मिली थी। उसी की सूचना के आधार पर हम साथ में आए हैं। दूसरा स्टाफ सर्चिंग पर गया होगा। मुझे जानकारी नहीं है।”
बता दें कि इस गांव से Kuno National Park का जंगल महज 5 से 6 किलोमीटर दूरी पर है। इस वजह से जंगली जानवर आए दिन गांव तक पहुंच जाते हैं। लेकिन वन विभाग के कर्मचारियों के बयान से ग्रामीण बेहद नाराज हैं। उनका कहना है कि आए दिन जंगल से चीता, तेंदुआ और दूसरे हिंसक और खतरनाक जानवर गांव में घुस आते हैं और बच्चों और मवेशियों को अपना निशाना बनाते है। वन विभाग के लोग हमले के बाद अपनी कार्यवाही की खानापूर्ति कर चले जाते हैं। लेकिन हमारी सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता कदम या इंतजाम नहीं हो पाता ।
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