Bengal में मिड-डे मील पर विवाद: ISKCON ने राधारमण दास को हटाया

The CSR Journal Magazine
कोलकाता में मिड-डे मील के मेन्यू में अंडों की जगह शाकाहारी आहार के विवाद के चलते इस्कॉन ने अपने उपाध्यक्ष राधारमण दास को सभी जिम्मेदारियों से हटा दिया है। इस्कॉन ने उन्हें मीडिया में ISKCON का प्रतिनिधित्व करने से भी रोक दिया। पश्चिम बंगाल सरकार के स्कूलों में इस्कॉन को मिड-डे मील बांटने की अनुमति मिलने के बाद विपक्ष ने शाकाहार थोपने का आरोप लगाया था। इस विवाद के चलते कई राजनीतिक हलचलें भी शुरू हुई हैं।

सरकार पर उठे सवाल

पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई में विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार बच्चों के पोषण को नजरअंदाज कर शाकाहार पर जोर दे रही है। ISKCON की ओर से नए मेन्यू में अंडों के स्थान पर प्लांट-बेस्ड प्रोटीन जैसे पनीर और राजमा का इस्तेमाल किए जाने का सुझाव दिया गया है। दास ने कहा था कि विद्यालयों में न्यूट्रिशन की कमी नहीं होगी।

अंडों के खिलाफ विज्ञान का पक्ष

इस्कॉन के उपाध्यक्ष ने विज्ञान के संदर्भ में बताया है कि कई राज्यों में जहां शाकाहारी लोग अधिक हैं, वहां प्रोटीन का सेवन भी बेहतर है। उन्होंने कहा कि हमारी खाने की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है। हालांकि, अब राधारमण दास को इस विवादास्पद मुद्दे पर बोलने से रोक दिया गया है।

ISKCON का बड़ा एक्शन

राधारमण दास को ISKCON की सभी गतिविधियों से हटा दिया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने हटने का कारण स्पष्ट किया है। दास ने कहा कि वह शुभचिंतकों और भक्तों को बता रहे हैं कि उन्हें संगठन की जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वह आगे से इस्कॉन की ओर से बयान नहीं देंगे।

विवाद और प्रतिक्रियाएं

दास ने कहा कि उन्हें हटाने का निर्णय मुख्यतः उनकी सार्वजनिक टिप्पणियों और विवादों से संबंधित है। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न और मेनका गांधी द्वारा इस्कॉन पर लगाए गए आरोपों पर अपनी बातें साझा की थीं। इसके अलावा, दास ने विवादास्पद मीडिया साक्षात्कार में भी हिस्सा लिया था, जिसका अब उन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

भविष्य की संभावनाएं

दास ने कहा कि वह संबंधित प्राधिकारियों के निर्णयों का सम्मान करते हैं और अब वे किसी भी माध्यम से इस्कॉन के बारे में कोई बयान नहीं देंगे। उन्होंने पत्रकारों से भी अपील की है कि वे इस स्थिति का सम्मान करें। इस विवाद ने इस्कॉन की छवि पर असर डाला है, लेकिन संगठन का मानना है कि वे आगे भी अपने कार्यों को बढ़ाते रहेंगे।

शिक्षा का महत्व

बंगाल में इस्कॉन की उपस्थिति ने शिक्षा क्षेत्र में एक नई बहस को जन्म दिया है। पिछले कुछ सालों में, मिड-डे मील की गुणवत्ता और बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान दिया गया है। वहीं, शाकाहारी आहार संबंधित बहसें यह साफ करती हैं कि आहार का चयन और उसकी गुणवत्ता समाज के लिए कितना महत्वपूर्ण है।

सीधे संवाद की अनुपस्थिति

ISKCON की इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट है कि संगठन अपने सार्वजनिक रूप को लेकर कितना संवेदनशील है। दास के पद से हटने के बाद संगठन ने एक नई दिशा की ओर कदम बढ़ाया है, जिसके प्रभाव का आकलन समय के

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