ज्ञान भारतम् मिशन: डिजिटल युग में सुरक्षित हो रही भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान विरासत

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ज्ञान भारतम् मिशन: हजारों वर्षों की भारतीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल युग में सुरक्षित करने की ऐतिहासिक पहल

भारत अपनी प्राचीन सभ्यता, समृद्ध संस्कृति और विशाल ज्ञान परंपरा के लिए विश्वभर में जाना जाता है। वेद, उपनिषद, पुराण, आयुर्वेद, ज्योतिष, गणित, दर्शन, साहित्य, संगीत, वास्तुशास्त्र और अनेक विषयों से संबंधित करोड़ों पांडुलिपियां भारत की अमूल्य बौद्धिक धरोहर हैं। समय के साथ इन दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथों का बड़ा हिस्सा नष्ट होने की कगार पर पहुंच गया। इन्हीं अनमोल धरोहरों को संरक्षित करने और उन्हें डिजिटल रूप में आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने ज्ञान भारतम् मिशन (Gyan Bharatam Mission) की शुरुआत की है। यह मिशन डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

भारत की प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटल पुनर्जागरण

यह मिशन केवल पांडुलिपियों को स्कैन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण, वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलीकरण, वर्गीकरण, प्रकाशन तथा शोध को बढ़ावा देने का व्यापक कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य भारत में बिखरे हुए हस्तलिखित ज्ञान को एक राष्ट्रीय डिजिटल मंच पर लाकर उसे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाना है।

भारत के पास विश्व की सबसे बड़ी पांडुलिपि विरासत

भारत के विभिन्न मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों, विश्वविद्यालयों, संग्रहालयों और निजी संग्रहों में करोड़ों पांडुलिपियां सुरक्षित हैं। इनमें संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, पाली, प्राकृत, फारसी, अरबी तथा अनेक क्षेत्रीय भाषाओं में लिखे गए ग्रंथ शामिल हैं। इन पांडुलिपियों में चिकित्सा विज्ञान, कृषि, पर्यावरण, गणित, खगोल विज्ञान, राजनीति, समाजशास्त्र और अध्यात्म सहित अनेक विषयों का ज्ञान समाहित है।

बजट घोषणा से राष्ट्रीय मिशन तक

ज्ञान भारतम् मिशन की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई थी। इसके बाद इसे संस्कृति मंत्रालय की प्रमुख योजना के रूप में विकसित किया गया। यह पहले से चल रहे नेशनल मिशन फॉर मैन्युस्क्रिप्ट्स का विस्तारित और अधिक तकनीक-आधारित स्वरूप है। सरकार ने इसे 2024-31 की अवधि के लिए एक केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में संरचित किया है।

मिशन के प्रमुख उद्देश्य

ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत देशभर में बिखरी हुई पांडुलिपियों की पहचान की जा रही है। उनका विस्तृत सर्वेक्षण किया जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि कौन-कौन सी दुर्लभ पांडुलिपियां किन संस्थानों या निजी संग्रहों में मौजूद हैं। इसके बाद इन पांडुलिपियों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण किया जाता है ताकि समय, नमी, कीटों और अन्य प्राकृतिक कारणों से उनका नुकसान रोका जा सके। अत्याधुनिक स्कैनिंग तकनीक के माध्यम से इनका डिजिटलीकरण किया जाता है, जिससे मूल दस्तावेज सुरक्षित रहते हुए उनकी डिजिटल प्रतियां तैयार हो सकें। डिजिटल प्रतियों को एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी (National Digital Repository) में संग्रहीत किया जा रहा है, जहां से शोधकर्ता और विद्यार्थी भविष्य में इनका अध्ययन कर सकेंगे। साथ ही दुर्लभ ग्रंथों का संपादन, अनुवाद और प्रकाशन भी मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण

मिशन के तहत मार्च 2026 में राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल मैन्युस्क्रिप्ट सर्वे प्रारंभ किया गया। इसका उद्देश्य देश के हर राज्य, जिले और गांव तक पहुंचकर उन पांडुलिपियों की पहचान करना है जो अभी तक सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थीं। सर्वेक्षण के माध्यम से मंदिरों, आश्रमों, मठों, पुस्तकालयों, निजी परिवारों और पारंपरिक विद्वानों के पास सुरक्षित पांडुलिपियों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।

अब तक की प्रमुख उपलब्धियां

सरकार के अनुसार, देशभर में उपलब्ध 8 लाख से अधिक डिजिटाइज्ड पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम् मिशन के मानकों के अनुरूप पुनः व्यवस्थित किया जा रहा है। इनमें से 1.29 लाख से अधिक पांडुलिपियां राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी के माध्यम से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। साथ ही लाखों पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण किया जा चुका है और राष्ट्रीय सर्वेक्षण के माध्यम से लगातार नए संग्रह सामने आ रहे हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका

ज्ञान भारतम् मिशन में आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। एआई की सहायता से पुरानी और धुंधली लिपियों को पढ़ने, क्षतिग्रस्त पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में पुनर्स्थापित करने, विभिन्न भाषाओं और लिपियों की पहचान करने तथा सामग्री को खोजने योग्य (Searchable) बनाने का कार्य किया जा रहा है। इससे शोध कार्य पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज होगा।

डिजिटल इंडिया से जुड़ता सांस्कृतिक संरक्षण

ज्ञान भारतम् मिशन, डिजिटल इंडिया अभियान की उस व्यापक सोच का हिस्सा है जिसके अंतर्गत शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति सभी क्षेत्रों में डिजिटल तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। जहां डिजिटल इंडिया ने सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन बनाया, वहीं ज्ञान भारतम् मिशन भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित कर रहा है। इस पहल के माध्यम से भारत केवल अपने अतीत को सुरक्षित नहीं कर रहा, बल्कि भविष्य के शोध, नवाचार और वैश्विक ज्ञान साझेदारी के लिए भी मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

शोध एवं शिक्षा को मिलेगा नया आयाम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिशन भारतीय इतिहास, संस्कृति, भाषा विज्ञान, आयुर्वेद, गणित और दर्शन जैसे विषयों पर नए शोध के द्वार खोलेगा। पहले जो दुर्लभ पांडुलिपियां सीमित स्थानों पर उपलब्ध थीं, वे अब डिजिटल माध्यम से देश और दुनिया के शोधकर्ताओं तक पहुंच सकेंगी। इससे भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना बढ़ेगी।

ज्ञान भारतम् मिशन बना विरासत का प्रहरी

ज्ञान भारतम् मिशन केवल एक डिजिटलीकरण परियोजना नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने का राष्ट्रीय अभियान है। यह मिशन आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक विरासत के बीच एक मजबूत सेतु बनाता है। सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण, वैज्ञानिक संरक्षण और डिजिटलीकरण के माध्यम से भारत अपनी बौद्धिक धरोहर को सुरक्षित रखते हुए उसे विश्व के सामने प्रस्तुत कर रहा है। #11YearsOfDigitalIndia के अंतर्गत यह पहल इस बात का प्रमाण है कि डिजिटल तकनीक केवल वर्तमान को नहीं, बल्कि अतीत की अमूल्य विरासत को भी भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

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