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ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन से घर बैठे हुआ 3 लाख मरीजों का इलाज

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ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा से घर बैठे हुआ 3 लाख मरीजों का इलाज
 
आज के इस तकनीकी युग में जिंदगी कितनी आसान हो गयी है इसका जीता जागता उदाहरण है ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सर्विसेस। भारत सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं को आम जनमानस तक पहुंचाने की संकल्पना से शुरू हुई ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सर्विसेस ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। एक साल के भीतर ही ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा ने अपने सारे रिकार्ड्स को तोड़ते हुए अब तक ये सेवा भारत के कोने कोने तक पहुंच चुकी है और 3 लाख मरीज ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन की सेवाओं से लाभांवित हुए है।

ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा डिजिटल इंडिया की बड़ी उपलब्धि है

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘डिजिटल इंडिया’ पहल की दिशा में यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की डिजिटल सेवा ई-संजीवनी के तहत कोई भी नागरिक भारत के किसी भी कोने में घर बैठे अपना इलाज करवा सकता है। इस सुविधा ने कोविड की रोकथाम के साथ-साथ गैर-कोविड आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं में भी अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। इस बड़ी उपलब्धि पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने बताया कि 9 अगस्त को 1.5 लाख टेली-कंसल्टेशन को पूरा करने के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की थी। तब से एक महीने के भीतर कंसल्टेशन की संख्या दोगुनी कर दी है। ये टेली-परामर्श पिछले 20 दिनों में एक लाख  हो गया। 23 जुलाई को 1 लाख टेली-कंसल्टेशन को पूरा किया गया बाद में 18 अगस्त को 26 दिनों के भीतर 1 लाख परामर्श पूरा किया। अब तक के रिकॉर्ड में 3 लाख टेली-परामर्श पूरे किए हैं।

कोरोना महामारी में ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा से बचायी लोगों की जिंदगी

टेलीमेडिसिन सेवा डॉक्टरों को मरीजों से जोड़ती है। कोरोना काल में ये और भी महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि महामारी के दौरान मरीजों को डॉक्टर खोजने पर भी नहीं मिल रहें थे ऐसे समय में ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन आवश्यक स्वास्थ्य सेवा प्रदान की है। कोरोना की महामारी में प्राइवेट और घरों के आसपास क्लीनिक बंद थे ऐसे में ये आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कारगर साबित हुआ। कोविड-19 महामारी के चलते पारंपरिक दवा माध्यम को जोखिम भरा माना जा रहा है।

2022 तक सभी 1.5 लाख स्वास्थ्य केंद्रों में ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा शुरू करने का लक्ष्य

पिछले साल नवंबर में शुरू हुई इस सेवा का उद्देश्य दिसंबर 2022 तक सभी डेढ़ लाख स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्रों में टेली परामर्श क्रियान्वित करने का है। कोविड-19 महामारी के चलते स्वास्थ्य मंत्रालय गत 13 अप्रैल को दूसरी टेली परामर्श सेवा ‘ई संजीवनी ओपीडी’ लेकर आया था जिससे रोगी और डॉक्टर के बीच परामर्श हो सके। ई-संजीवनी के तहत दो प्रकार की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इनमें डॉक्टर-टू-डॉक्टर (ई-संजीवनी) और मरीज-टू-डॉक्टर (ई-संजीवनी ओपीडी) टेली परामर्श शामिल हैं।

क्या होता है टेलीमेडिसिन?

टेलीमेडिसिन स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की एक उभरती हुई टेक्नोलॉजी है, जो कि डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ को इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए कुछ दूरी पर बैठे रोगी की जांच करने और उसका उपचार करने में मदद करता है, परामर्श देता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, टेलीमेडिसिन का अभिप्राय पेशेवर स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा आईटी का उपयोग करके ऐसे स्थानों पर रोगों की जांच, उपचार तथा रोकथाम, अनुसंधान और मूल्यांकन आदि की सेवा प्रदान करना है, जहां रोगी और डॉक्टर के बीच दूरी एक महत्त्वपूर्ण कारक हो। टेलीमेडिसिन का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को मुहैया कराने के लिये किया जाता है। जिनके पास इस प्रकार की सेवाओं तक आसान पहुंच नहीं है।

कैसे लें ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा

यहां ये बताना महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा बिलकुल मुफ्त है, इसके लिए आपको कोई भी पैसे नहीं देने पड़तें हैं। ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा लेने के बाद डॉक्टर्स मरीजों को इलेक्ट्रॉनिक प्रिस्क्रिप्शन देतें है। ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा पाने के लिए आपके पास इंटरनेट के साथ साथ स्मार्ट मोबाइल या फिर कंप्यूटर पर ई-संजीवनी ओपीडी लॉगिन करना होगा, रजिस्ट्रेशन करवाना होगा, फिर आपको टोकन मिलेगा उसके बाद डॉक्टर्स आपको आपके बीमारी के हिसाब से इलाज बताएंगे। ये बेहद ही आसान प्रक्रिया होती है। बहरहाल ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा मरीजों के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है।