भारत सरकार ने मेटा को भेजा समन, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े इंस्टाग्राम विज्ञापनों की जांच शुरू

The CSR Journal Magazine

सरकार का Meta को समन: बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों का मामला

इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लेकर सरकार पैरेंट कंपनी Meta को समन भेजेगी। IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को यह निर्देश दिए। मंत्रालय Meta से पूछेगा कि इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन कैसे प्रसारित हुए और उन्हें रोकने के लिए प्लेटफॉर्म की ओर से क्या कदम उठाए गए। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को रोकने के लिए कंपनी की क्या नीतियां और व्यवस्था हैं। इससे पहले सरकार ने 1 जुलाई को Meta को नोटिस जारी कर WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर नोटिस भेजा था।

इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक सामग्री की बहस

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के साथ, इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के प्रसार को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। भारत सरकार ने इस मामले को लेकर मेटा (Meta) को समन जारी किया है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, मेटा अधिकारियों से जवाब मांगना आवश्यक है। मंत्री का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी तरह की आपत्तिजनक सामग्री को सहन नहीं किया जाएगा।

इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मेटेरियल मौजूद

एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मेटेरियल मौजूद हैं। भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चल रहे थे, जिनमें ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट बेहद कम कीमत 99 रुपए में बेचा जा रहा था।

Meta के मॉडरेशन सिस्टम से मंजूरी

रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर दिखने वाले सभी विज्ञापन पहले Meta के मॉडरेशन सिस्टम से मंजूरी मिलने के बाद ही लाइव होते हैं। जब ऐसे ही एक विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम से की गई, तो करीब 24 घंटे बाद कंपनी ने जवाब दिया कि यह पोस्ट उसकी कम्यूनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है। इसके बाद मेटा से इस मामले पर जवाब मांगने पर कंपनी ने कहा कि उसने कई विज्ञापनों को हटा दिया है, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड किया है और उन URL को हटा देने का दावा किया।
Meta ने यह भी माना कि कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता और रिव्यू प्रोसेस हर नियम उल्लंघन की पहचान नहीं कर पाती।

जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया

सरकार ने यह सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाने की बात की है कि कैसे इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापनों का प्रसार हुआ। यह जांच की जाएगी कि मेटा ने इस प्रकार की सामग्री को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। वेंकटेश्वरन, जो इस मामले पर जांच कर रहे हैं, ने बताया कि यह मामला केवल तकनीकी नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का भी है। बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खुद को जिम्मेदार ठहराएँ।

बच्चों की सुरक्षा एक प्राथमिकता

इस मामले का समाधान निकालने में सरकार की प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा है। इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर बच्चों के प्रति किया जा रहा यौन शोषण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंत्री ने कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर सख्त कदम उठाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके तहत न केवल मेटा को जवाबदही ठहराया जाएगा, बल्कि कानून के तहत ही उचित कार्रवाई भी की जाएगी।

भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का बनाना, रखना अपराध

भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर कानून सख्त है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बनाना, रखना, देखना, शेयर करना, बेचना या प्रसारित करना अपराध है। पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माना। दोबारा अपराध करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना।

सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी

भारत के IT, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध कंटेंट हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होती है। जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होता है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होते हैं। सरकार सोशल मीडिया कंपनी से जवाब मांग सकती है। प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने का निर्देश दे सकती है। जांच एजेंसियों के जरिए आपराधिक जांच शुरू कर सकती है। नियमों के उल्लंघन पर आईटी कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती है।

राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें

अगर सोशल मीडिया पर ऐसा कोई कंटेन्ट दिखे, तो उसे डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड न करें। संबंधित प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें। ऐसे कंटेंट को अपलोड करने, खरीदने, बेचने, शेयर करने या जानबूझकर प्रसारित करने वाले व्यक्ति भी भारतीय कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आते हैं।

सोशल मीडिया की बढ़ती चुनौतियाँ

सोशल मीडिया अब हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसके साथ ही यह कई चुनौतियाँ भी लेकर आया है। बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल बनाना एक बड़ा सवाल बन गया है। मेटा जैसी कंपनियों का जिम्मेदार होना आवश्यक है ताकि वे बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए उचित कदम उठा सकें। नियमों का पालन न करने वाली सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता हो सकती है।

नवीनतम घटनाक्रम पर नजर

यह मामला अभी विकसित हो रहा है, और सरकार लगातार इस पर नजर रखे हुए है। आने वाले समय में इस पर और अधिक जानकारी आ सकती है। जैसे ही मामले में ताजा जानकारी मिलेगी, उसे साझा किया जाएगा। इसके साथ ही, जिन विज्ञापनों पर सवाल उठाए गए हैं, उन्हें तुरंत ही हटाने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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