टैक्स और तेजी के बाद भी चमका सोना: ज्वेलरी के बजाय डिजिटल गोल्ड, ETF और SGB से कमाएं ज्यादा मुनाफा

The CSR Journal Magazine

सोना तो सोना है! टैक्स बढ़ने के बाद भी गोल्ड की चमक में नहीं आई कमी

भारतीय संस्कृति में सोने (Gold) का आकर्षण इतना गहरा है कि टैक्स बढ़ने या कीमतें सर्वकालिक उच्च स्तर (All-time high) पर पहुंचने के बाद भी इसकी मांग कम नहीं होती। शादियों का सीजन हो, त्योहार हों या सुरक्षित निवेश का मामला, सर्राफा बाजारों (Jewellery Markets) में रौनक हमेशा बनी रहती है।

सर्राफा बाजारों में उमड़ रही भीड़

सोने के दामों में बढ़ोतरी के बावजूद ग्राहकों की बढ़ती रुचि ने सबको हैरान कर दिया है। हाल ही में मई के महीने में सरकार ने सोने के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। इस फैसले का उद्देश्य विदेशों से सोने की खरीद को कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना था। हालाँकि, यह बढ़ोतरी सोने की कीमतों में अचानक वृद्धि लाती है, लेकिन फिर भी ग्राहकों की मांग में कमी नहीं आई है।

टैक्स और कीमतों का असर

सरकार द्वारा इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) या जीएसटी (GST) में बदलाव किए जाने पर शुरुआत में बाजार में थोड़ी सुस्ती दिखती है, लेकिन खरीदार जल्द ही नई कीमतों को स्वीकार कर लेते हैं। कई ग्राहक कीमतों में बड़ी तेजी आने की आशंका से मौजूदा ऊंचे रेट पर भी खरीदारी कर लेते हैं, जिससे बाजारों में भीड़ बढ़ जाती है।

गोल्ड ज्वेलरी की मांग बढ़ी

गोल्ड ज्वेलरी की मांग में जबरदस्त उछाल देखा गया है। निवेशकों और आम लोगों दोनों के बीच सोने को सुरक्षित और मूल्यवान संपत्ति के तौर पर देखा जा रहा है। लोग इस बात की परवाह नहीं कर रहे हैं कि सोना महंगा हो गया है। यह दर्शाता है कि सोने की चमक अब भी बरकरार है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस स्थिति में सोने की माँग धीरे-धीरे और बढ़ सकती है।

सोने का महत्‍व

भगवान लक्ष्मी के प्रतीक और निवेश का महत्वपूर्ण साधन, सोना हर भारतीय परिवार का अभिन्न हिस्सा है। त्योहारों और शादी-ब्याह के मौसम में सोने की डिमांड और भी बढ़ जाती है। कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद भी दुकानों पर लम्बी कतारें दिखाई दे रही हैं। ग्राहक बेशकीमती ज्वेलरी खरीदने के लिए तैयार हैं।

मांग बढ़ने का प्रमुख कारण, सुरक्षित निवेश

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच लोग सोने को सबसे सुरक्षित एसेट मानते हैं। भारत में शादियों और त्योहारों (जैसे धनतेरस, अक्षय तृतीया) पर सोना खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से सोने ने महंगाई को मात देते हुए निवेशकों को हमेशा बेहतरीन रिटर्न दिया है। आर्थिक संकट या जरूरत के समय सोने को बहुत आसानी से कैश में बदला जा सकता है।

छोटे-छोटे कारोबारियों का फायदा

सर्राफा बाजारों में भीड़ बढ़ने से छोटे-छोटे ज्वेलरी व्यवसायियों को फायदा हो रहा है। वे ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नए डिजाइनों और ऑफर्स पेश कर रहे हैं। इसके चलते उनके बिक्री में इजाफा हो रहा है। यह कारोबारियों के लिए एक सुनहरा मौका है, जिससे वे अपने व्यवसाय को और भी बढ़ा सकते हैं।

बाजार में उत्साह का माहौल

सर्राफा बाजारों में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। ग्राहक सोने के आभूषणों पर अपना हाथ आजमा रहे हैं। नई डिजाइनों के साथ-साथ कस्टमाइजेशन की भी सेवाएं दी जा रही हैं, जो ग्राहकों को और अधिक प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में बाजार में सोने का कारोबार लगातार प्रगति कर रहा है।

गोल्ड की खरीदारी में सावधानी बरतें

हालांकि, गोल्ड की खरीदारी में सावधानी बरतना आवश्यक है। ग्राहक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे विश्वसनीय ज्वेलर्स से खरीदारी कर रहे हैं। इसके साथ ही, किसी भी प्रकार की छुपी हुई लागत से बचने के लिए पूरी जानकारी प्राप्त करना बहुत जरूरी है।

जेवर की बजाय ETF और SGB में करें निवेश

ज्वेलरी के मुकाबले डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ (ETF), और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में निवेश करना आर्थिक रूप से ज्यादा फायदेमंद और सुरक्षित होता है। फिजिकल ज्वेलरी खरीदने पर आपको मेकिंग चार्जेस (घड़ाई शुल्क) और लॉकर के खर्च जैसी अतिरिक्त लागतें उठानी पड़ती हैं, जो पेपर या डिजिटल गोल्ड में नहीं होतीं।इन तीनों विकल्पों के मुख्य फायदे और अंतर नीचे दिए गए हैं। 

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) सबसे ज्यादा मुनाफा

यह सरकार (RBI) द्वारा जारी किया जाता है और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सर्वश्रेष्ठ विकल्प माना जाता है। सोने की बढ़ती कीमत के साथ-साथ आपको हर साल आपके निवेश पर 2.5% (या तत्कालीन निर्धारित दर) का निश्चित ब्याज मिलता है। यदि आप इसे 8 साल की मैच्योरिटी तक रखते हैं, तो मुनाफे पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना होता। यह सरकारी बॉन्ड है, इसलिए शुद्धता या चोरी होने का कोई जोखिम नहीं है। इसमें मेकिंग चार्जेस या जीएसटी (GST) का कोई अतिरिक्त खर्च नहीं होता।

गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) शेयर बाजार जैसा आसान

यह म्यूचुअल फंड की तरह होता है जो शेयर बाजार (Stock Market) पर ट्रेड करता है। इसका 1 यूनिट 1 ग्राम शुद्ध सोने के बराबर होता है। आप बाजार खुलने के दौरान इसे कभी भी, तुरंत खरीद या बेच सकते हैं। पैसों की जरूरत होने पर यह सबसे फास्ट विकल्प है। इसमें आप 1 ग्राम सोने की कीमत से भी निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। यह आपके डीमैट अकाउंट (Demat Account) में सुरक्षित रहता है, जिससे चोरी का डर खत्म हो जाता है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की वास्तविक कीमतों से सीधे जुड़ा होता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।

डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) मात्र ₹1 से शुरुआत

यह मोबाइल ऐप्स (जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm) या प्रमाणित प्रदाताओं (जैसे MMTC-PAMP) के माध्यम से खरीदा जाता है। आप मात्र ₹1 या ₹10 से भी सोना खरीदना शुरू कर सकते हैं। पॉकेट मनी या छोटे अमाउंट को बचाने के लिए यह बेहतरीन है। जब आपके पास पर्याप्त ग्राम जमा हो जाएं, तो आप मेकिंग चार्ज देकर इसे असली सोने के सिक्कों या बार के रूप में घर पर मंगवा सकते हैं। आपके द्वारा खरीदा गया सोना प्रदाता कंपनियों द्वारा सुरक्षित वॉलेट (Vaults) में रखा जाता है, जिसका पूरा बीमा (Insurance) होता है।

आर्थिक स्थिरता और सोने की मांग

देश की आर्थिक स्थिरता और सोने की मांग के बीच एक सीधा संबंध है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सोने के बढ़ते दामों के बीच दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है। ज्वेलरी की और भी अधिक मांग के चलते मार्केट में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।

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