जजों की रिटायरमेंट एज बढ़ाने के खिलाफ यूपी समेत 10 राज्य क्यों हैं खड़े?

The CSR Journal Magazine
जिला जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कोर्ट का प्रस्ताव है कि जिला जजों की रिटायरमेंट उम्र को 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दिया जाए। लेकिन कई राज्य इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। हाल ही में हुई सुनवाई में कोर्ट ने विचार के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यह निर्णय न्यायिक सेवा की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है।

राज्यों का विरोध और चिंताएं

देश के 10 राज्य, जिसमें यूपी, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, केरल, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, उत्तराखंड और ओडिशा शामिल हैं, इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। इन राज्यों का तर्क है कि जजों की उम्र बढ़ाने से नई भर्तियों में देरी होगी, जिससे युवा वकीलों के लिए अवसर घटेंगे। इसके अलावा, राज्यों की चिंता ये भी है कि इससे आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

जजों की कमी का मुद्दा, विभिन्न राज्यों का रुख

भारत में जिला अदालतों में जजों की भारी कमी है। दिसंबर 2025 तक देशभर में जिला जजों के 1,744 पद खाली हैं। वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ भटनागर ने आरोप लगाया कि इस कमी के कारण कई रिटायर जजों को वापस काम पर लाने की जरूरत महसूस हो रही है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि अगर जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाई जाती है, तो यह समस्या थोड़ी कम हो सकती है। कुछ राज्य जैसे तेलंगाना, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटका, सिक्किम और पुडुचेरी निवासियों का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि, पुडुचेरी ने 61 साल तक उम्र बढ़ाने पर सहमति जताई है, लेकिन 62 के लिए अभी विचार चल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का तर्क, आर्थिक बोझ का मुद्दा

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, न्यायिक सेवा में आने वाले लोग सामान्य सरकारी नौकरी की तुलना में काफी बाद में काम करने लगते हैं। इस वजह से, जजों के पास काम करने के कम साल होते हैं। कोर्ट का कहना है कि रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाना न्यायिक सेवाओं की आवश्यकता के हिसाब से उचित है। राज्यों का कहना है कि रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने से पेंशन और अन्य खर्चों का बोझ बढ़ेगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है। कोर्ट का कहना है कि अगर जज 2 साल और काम करते हैं, तो पेंशन का भुगतान बाद में होगा, जिससे तत्काल आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

आगे क्या होगा?

मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते में होगी, जहां सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि विरोध कर रहे राज्यों में सकारात्मक विचार उत्पन्न होंगे। जिन राज्यों ने अभी तक निर्णय नहीं लिया है, उनके लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। इस मुद्दे पर हाई कोर्ट की राय भी अहम होगी, क्योंकि अधिकांश हाई कोर्ट रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।

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