दिल्ली मास्टर प्लान 2047: स्कूल से स्टार्टअप तक, नरेला में जुड़ेगी शिक्षा व्यवस्था की कड़ी

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दिल्ली मास्टर प्लान 2047: नरेला बनेगा दिल्ली का नया एजुकेशन हब, खुलेंगे शिक्षा के नए आयाम

दिल्ली मास्टर प्लान 2047- नरेला बनेगा राजधानी का नया ‘एजुकेशन हब’, स्कूल से स्टार्टअप तक जुड़ेंगी शिक्षा की कड़ियां! DDA और दिल्ली सरकार का बड़ा कदम- 1300 करोड़ रुपये के बजट के साथ 61 एकड़ में विश्वस्तरीय ‘एजुकेशन सिटी’ तैयार करने की योजना, प्रमुख विश्वविद्यालयों को मिली जमीन, मेट्रो कॉरिडोर से बढ़ेगी कनेक्टिविटी!

1300 करोड़ के बजट से 61 एकड़ में तैयार होगी अत्याधुनिक ‘एजुकेशन सिटी

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा दिल्ली मास्टर प्लान 2047 (MPD-2047) को अंतिम मंजूरी दिए जाने के साथ ही देश की राजधानी के शहरी और ढांचागत विकास का एक नया खाका तैयार हो चुका है। ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विज़न के साथ कदम मिलाते हुए इस नए मास्टर प्लान में वर्ष 2047 तक दिल्ली की अनुमानित 3.2 करोड़ की आबादी की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। इस पूरे महायोजना के अंतर्गत सबसे क्रांतिकारी बदलाव उत्तर-पश्चिम दिल्ली के नरेला सब-सिटी में देखने को मिल रहा है, जिसे दिल्ली के एक नए ‘ग्रोथ नोड’ और भव्य ‘एजुकेशन हब’ (विश्वविद्यालय हब) के रूप में तब्दील किया जा रहा है।

61 एकड़ में फैलेगी वर्ल्ड-क्लास ‘एजुकेशन सिटी’

नरेला के सेक्टर G7 और G8 में लगभग 61 एकड़ खाली भूमि पर एक अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय ‘एजुकेशन सिटी’ का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही, मास्टर प्लान 2047 में बढ़ती आबादी की शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुल 138 हेक्टेयर क्षेत्र को शिक्षा और सामाजिक सुविधाओं के नए खाके के तहत विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है। DDA के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, इस आगामी एजुकेशन सिटी का उद्देश्य तकनीकी संस्थानों, कॉलेजों, अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्कूलों और उन्नत अनुसंधान केंद्रों (रिसर्च सेंटर्स) का एक ऐसा क्लस्टर बनाना है जो वैश्विक मानकों के शैक्षणिक कार्यक्रम पेश कर सके।

बजट में भारी बढ़ोतरी और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों का आवंटन

शिक्षा के इस नए आयाम को धरातल पर उतारने के लिए सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर बजटीय सहायता दी गई है। दिल्ली सरकार ने नरेला सब-सिटी प्रोजेक्ट के तहत एजुकेशन सिटी के कुल परिव्यय (आउटले) को ₹500 करोड़ से बढ़ाकर ₹1,300 करोड़ कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए आवंटित राशि में से ₹452 करोड़ का भुगतान पहले ही भूमि के कब्जे के लिए DDA को किया जा चुका है। हाल ही में दिल्ली के उपराज्यपाल द्वारा गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) और दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी (DTEU) को लगभग 35 एकड़ भूमि के आधिकारिक दस्तावेज सौंपे गए हैं। इसके अतिरिक्त, इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वुमेन (IGDTUW) को भी यहाँ 50 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। कुल मिलाकर लगभग 160 एकड़ से अधिक का यह विशाल क्षेत्र दिल्ली की उच्च शिक्षा व्यवस्था को एक नई मजबूती देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

‘साझा परिसर’ और डिजिटल लर्निंग का नया मॉडल

नरेला एजुकेशन सिटी को केवल पारंपरिक शिक्षण संस्थानों की तरह नहीं, बल्कि एक आधुनिक ‘साझा परिसर’ (Shared Campus) के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के छात्र साझा पुस्तकालयों (कॉमन लाइब्रेरी), अत्याधुनिक केंद्रीय प्रयोगशालाओं, ऑडिटोरियम और संयुक्त अनुसंधान केंद्रों का उपयोग कर सकेंगे। इस इकोसिस्टम का मुख्य ध्यान डिजिटल लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संचालित नवाचार लैब्स, कौशल विकास और इन्क्यूबेशन सेंटर्स पर होगा, जिससे स्कूल से लेकर स्टार्टअप तक की कड़ियों को एक साथ जोड़ा जा सके।

अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा और आवासीय सुविधाएं

देश और दुनिया भर से यहाँ आने वाले छात्रों, संकायों (फैकल्टी) और कर्मचारियों के लिए परिसर के भीतर ही विश्वस्तरीय आवासीय सुविधाएं विकसित की जाएंगी। छात्र हॉस्टल्स और स्टाफ क्वार्टर्स के निर्माण के लिए लगभग ₹567 करोड़ के निवेश की योजना तैयार की गई है। पूरे परिसर के सुचारू संचालन और सुरक्षा के लिए इसे 40 मीटर चौड़ी बाहरी सड़क से घेरा जाएगा। इसके साथ ही, पूरे नरेला प्रोजेक्ट को पर्यावरण के अनुकूल गतिशीलता (इको-फ्रेंडली मोबिलिटी) के सिद्धांतों पर विकसित किया जा रहा है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इंफ्रास्ट्रक्चर, साइकिल ट्रैक और पैदल चलने के अनुकूल ग्रीन वॉकवे शामिल होंगे।

मेट्रो कॉरिडोर से बदलेगी कनेक्टिविटी की सूरत

किसी भी बड़े एजुकेशन हब की सफलता उसकी कनेक्टिविटी पर निर्भर करती है और नरेला के मामले में मास्टर प्लान 2047 ने इसका पुख्ता इंतजाम किया है। रिठाला-नरेला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर के विस्तार से उत्तर-पश्चिम दिल्ली, रोहिणी और नरेला सीधे पड़ोसी राज्य हरियाणा से जुड़ जाएंगे। इस मेट्रो कॉरिडोर के डिपो के निर्माण के लिए DDA ने नरेला उप-क्षेत्र P1 में 19.63 हेक्टेयर भूमि का लैंड-यूज़ (भूमि उपयोग) बदलकर ‘परिवहन’ (Transport) के रूप में अनुमोदित कर दिया है। मेट्रो के इस विस्तार से न केवल छात्रों का आवागमन बेहद सुगम हो जाएगा, बल्कि यह बुनियादी ढांचा नरेला में नई आवासीय योजनाओं, रिटेल सेक्टर, हॉस्पिटैलिटी और सेवाओं में निवेश को भी तेजी से आकर्षित करेगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। स्कूल, यूनिवर्सिटी, कनेक्टिविटी और स्टार्टअप्स का यह अनूठा संगम आने वाले समय में नरेला को दिल्ली का सबसे बड़ा ज्ञान और निवेश का केंद्र बनाने की दिशा में अग्रसर है।

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