यात्रीगण कृपया ध्यान दें! कंफर्म नहीं हुआ टिकट तो भूलकर भी न चढ़ें AC-Sleeper कोच में

The CSR Journal Magazine

वेटिंग टिकट लेकर ट्रेन में चढ़ने से पहले जान लें ये नियम, वरना लग सकता है जुर्माना!

भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार रिजर्व्ड (आरक्षित) चार्ट बनने के बाद भी अगर आपका टिकट पूरी तरह से वेटिंग लिस्ट (WL) में रहता है, तो आप स्लीपर (SL) या एसी (AC) कोच में यात्रा नहीं कर सकते। यदि आप ऐसा करते पाए जाते हैं, तो नियमों के तहत भारी जुर्माना लगाने और अगले स्टेशन पर ट्रेन से उतारे जाने का प्रावधान है।

वेटिंग टिकट लेकर रिजर्व्ड कोच में चढ़े तो लगेगा भारी जुर्माना, जानिए रेलवे के कड़े नियम

भारतीय रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक बेहद जरूरी और काम की खबर है। यदि आप भी अक्सर सीट कंफर्म न होने पर ‘वेटिंग टिकट’ (Waiting Ticket) के सहारे ट्रेन के स्लीपर या एसी कोच में चढ़ जाते हैं, तो अब संभल जाइए। रेलवे प्रशासन ने ट्रेनों में होने वाली अत्यधिक भीड़भाड़ को रोकने और कंफर्म टिकट वाले यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने के लिए अपने नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। नए नियमों के तहत अब वेटिंग टिकट धारकों को आरक्षित डिब्बों (Reserved Coaches) में सफर करने की अनुमति बिल्कुल नहीं है।

ऑनलाइन और काउंटर वेटिंग टिकट में क्या है अंतर?

रेलवे के नियमों के मुताबिक, ऑनलाइन (E-Ticket) और रेलवे काउंटर (Window Ticket) से खरीदे गए वेटिंग टिकटों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं लागू हैं।

ऑनलाइन वेटिंग टिकट (E-Ticket)

यदि आपने IRCTC ऐप या वेबसाइट से ऑनलाइन टिकट बुक किया है और चार्ट बनने के बाद भी वह ‘फुल्ली वेटिंग’ (Fully Waitlisted) रह जाता है, तो वह टिकट स्वचालित रूप से कैंसिल (Auto-Cancel) हो जाता है। इसका पैसा वापस आपके खाते में आ जाता है। इसके बाद आपका PNR अमान्य हो जाता है और उस पर यात्रा करना ‘बिना टिकट’ माना जाता है।

काउंटर वेटिंग टिकट (Window Ticket)

यदि आपने रेलवे स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटर से नकद या कार्ड देकर वेटिंग टिकट खरीदा है, तो चार्ट बनने के बाद कंफर्म न होने पर भी यह भौतिक टिकट वैध रहता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आप स्लीपर या एसी कोच में सफर कर सकते हैं। इस टिकट के साथ आप केवल जनरल (अनारक्षित) बोगी में ही सफर करने के हकदार होते हैं।

आरक्षित डिब्बे में घुसने पर लगेगा इतना जुर्माना

अगर कोई यात्री वेटिंग टिकट के साथ स्लीपर या एसी क्लास के डिब्बों में यात्रा करता हुआ पकड़ा जाता है, तो मुख्य चेकिंग स्टाफ (TTE) द्वारा निम्नलिखित दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी-
स्लीपर कोच (Sleeper Class): न्यूनतम ₹250 का जुर्माना। इसके साथ ही ट्रेन के शुरुआती स्टेशन से लेकर पकड़े गए स्टेशन तक का पूरा किराया भी वसूल किया जाएगा।
एसी कोच (AC Class): न्यूनतम ₹440 का जुर्माना और यात्रा की दूरी का पूरा नियमानुसार किराया देय होगा।
अगले स्टेशन पर उतारने का नियम: जुर्माना वसूलने के बाद TTE यात्री को रिजर्व्ड कोच में रहने की अनुमति नहीं देगा। यात्री को तुरंत अगले स्टेशन पर ट्रेन से उतार दिया जाएगा या फिर जनरल बोगी में भेज दिया जाएगा।

क्या है आंशिक (Partially) कंफर्म टिकट का नियम?

एक ही PNR पर यदि एक से अधिक यात्रियों का टिकट बुक है (जैसे एक ही परिवार के 4 लोग) और उनमें से 2 का टिकट कंफर्म या RAC हो जाता है, जबकि बाकी का वेटिंग में रहता है, तो ऐसी स्थिति में बाकी वेटिंग वाले यात्री भी ट्रेन में सफर कर सकते हैं। हालांकि, उन्हें अलग से कोई सीट नहीं मिलेगी, उन्हें अपने सह-यात्रियों की सीट पर ही एडजस्ट करना होगा।

रेलवे की यात्रियों को सलाह

सफर के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा और जुर्माने से बचने के लिए, रेलवे प्रशासन यात्रियों से अपील करता है कि वे घर से निकलने से पहले IRCTC PNR Status के जरिए अपनी सीट की स्थिति अवश्य जांच लें। यदि टिकट कंफर्म नहीं है, तो आरक्षित डिब्बों में जबरन प्रवेश कर अपने सफर को संकट में न डालें।

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