सुप्रीम कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी का मामला, चीफ जस्टिस ने कहा- इसे इतना गंभीर मत बनाइए
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने 25 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) पर त्वरित सुनवाई से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता के वकील से कहा, “इसे इतनी भावुकता (Sentimentally) से न लें”। कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में कोई आपात स्थिति (Grave Urgency) नहीं है और इसे तय प्रक्रिया के तहत उचित समय पर देखा जाएगा।
कॉकरोच जनता पार्टी का केस, सुनवाई पर CJI की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने आज एक दिलचस्प केस पर सुनवाई करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के खिलाफ दायर याचिका पर जल्दी सुनवाई करने से मना कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस मामले को गंभीरता से न लेने की सलाह दी। उन्का कहना था कि ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं है और इसे भावुकता से नहीं लेना चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील एनके गोस्वामी ने जल्द सुनवाई की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे टालने का निर्णय लिया।
सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय
कॉकरोच जनता पार्टी हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हमें इसे भावुक रूप से नहीं देखना चाहिए और हम इस मामले पर आगे विचार करेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अभी इस मुद्दे को लेकर कोई गंभीर स्थिति नहीं है। याचिका में यह मुद्दा उठाया गया था कि पार्टी न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुँचा रही है।
याचिकाकर्ता की मांग और CJI का बयान
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि फर्जी वकील डिग्रियों के मामले में सीबीआई जांच की आवश्यकता है। इस पर CJI ने स्पष्ट किया कि अदालत में बातचीत का व्यावसायिक मकसद के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं है। अधिवक्ता राजा चौधरी की तरफ से दायर इस याचिका में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म की गतिविधियों, उसकी फंडिंग और इसके पीछे सक्रिय संदिग्ध लोगों की CBI जांच कराने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता के वकील एन.के. गोस्वामी ने चिंता जताई कि चीफ जस्टिस द्वारा स्थिति स्पष्ट किए जाने के बावजूद सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही और मौखिक टिप्पणियों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है और इसका व्यावसायिक व मीम-आधारित दुरुपयोग हो रहा है
कॉकरोच जनता पार्टी का मजेदार उद्भव
यह पार्श्व राजनीतिक कदम उस समय पदार्पण हुआ जब सीजेआई सूर्यकांत ने एक बयान में युवाओं और कॉकरोच का जिक्र किया। इसके बाद, इस पार्टी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा शुरू हो गई। हालाँकि, बाद में सीजेआई ने अपनी टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनकी बातों को मीडिया ने गलत तरीके से पेश किया।
विवाद की शुरुआत
दिल्ली हाई कोर्ट में सीनियर वकीलों की नियुक्ति से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कथित तौर पर टिप्पणी की थी कि फर्जी डिग्री वाले और कुछ बेरोजगार लोग ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ की तरह सिस्टम (जैसे मीडिया, RTI और सोशल मीडिया) में घुसकर संस्थाओं पर हमला करने लगते हैं। इस बयान पर विवाद बढ़ने के बाद चीफ जस्टिस ने अगले ही दिन स्पष्ट किया था कि उनके बयान को गलत संदर्भ में दिखाया गया। उनकी यह टिप्पणी देश के आम बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं, बल्कि फर्जी डिग्री लेकर वकालत करने वालों के खिलाफ थी।
बन गई कॉकरोच जनता पार्टी
सीजेआई के इस बयान पर कटाक्ष करते हुए महाराष्ट्र के संभाजीनगर के रहने वाले अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक अभियान (Satirical Movement) के रूप में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का गठन किया। उन्होंने सदस्य बनने की पात्रता ‘बेरोजगार, लेजी और हमेशा ऑनलाइन रहने वाला’ रखी। देखते ही देखते इस डिजिटल आंदोलन को युवाओं का भारी समर्थन मिला और इसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ ही दिनों में 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स जुड़ गए। बढ़ते विवाद के बीच इसके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर आईटी एक्ट के तहत कुछ पाबंदियां भी लगाई गई।
संस्थापक की कहानी
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके हैं, जो महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर के रहने वाले हैं। उन्होंने पुणे से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की और बाद में आम आदमी पार्टी की कम्युनिकेशन टीम में शामिल हुए। इसके बाद, वो अपनी आगे की पढ़ाई के लिए बोस्टन यूनिवर्सिटी चले गए। उनकी राजनीतिक यात्रा और सोशल मीडिया पर सक्रियता ने इस पार्टी को एक नया अर्थ दिया है।
क्या है आगे का रास्ता?
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि मामले को जल्दी सुनने की जरूरत नहीं है। देखते हैं कि आगे क्या स्थिति बनती है। कॉकरोच जनता पार्टी और उसके अभियान का आगामी भविष्य क्या होगा, यह सभी के लिए दिलचस्प रहने वाला है। CJI सूर्यकांत का जवाब ने इस अनोखी पार्टी को एक नया मोड़ दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी’ का यह पूरा मामला अदालती टिप्पणियों के सोशल मीडिया पर होने वाले प्रभाव और अभिव्यक्ति की आजादी (Freedom of Expression) के बीच की बारीक रेखा को रेखांकित करता है।
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