भारतीय परिवारों की बचत में बड़ा बदलाव: FD और म्यूचुअल फंड की तरफ बढ़ता रुझान

The CSR Journal Magazine

RBI रिपोर्ट: बैंकों के सेविंग्स अकाउंट में तेजी से घट रहा पैसा, भारतीयों को पसंद आ रहे FD और म्यूचुअल फंड

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारतीय परिवारों की बचत का तरीका तेजी से बदल रहा है और लोग कम ब्याज दर (लगभग 2.5% से 3%) वाले सेविंग्स अकाउंट्स (CASA) से पैसा निकालकर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और म्यूचुअल फंड (MF) जैसे उच्च रिटर्न वाले विकल्पों में लगा रहे हैं।आरबीआई की ‘एनुअल बेसिक स्टैटिस्टिकल रिटर्न ऑन डिपॉजिट्स’ रिपोर्ट के मुताबिक, कुल बैंक जमा में बचत खातों (Savings Deposits) की हिस्सेदारी मार्च 2022 के 34.6% से घटकर मार्च 2026 में 28.7% रह गई है। इसके विपरीत, इसी अवधि के दौरान टर्म डिपॉजिट (FD) की हिस्सेदारी 55.2% से बढ़कर 61.6% हो गई है।

सेविंग्स अकाउंट का गिरता भरोसा

RBI की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय से भारतीयों का पैसा बैंक के सेविंग्स अकाउंट में सुरक्षित रहा है, लेकिन अब यह दिख रहा है कि लोगों का इस पर से भरोसा घटा है। सेविंग्स अकाउंट्स में जमा धन की हिस्सेदारी बैंकों में तेजी से कम हो रही है। यह उन भारतीयों के लिए एक नया ट्रेंड है जो अपनी बचत को सुरक्षित करने के लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं।

रुचियों में बदलाव

अब, लोग अपनी मेहनत की कमाई को सेविंग्स अकाउंट में रखने के बजाय अन्य निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। जैसे कि फिक्स्ड डिपॉजिट्स, म्यूचुअल फंड्स और स्टॉक्स। यह बदलाव इसलिए भी आ रहा है क्योंकि लोग बेहतर रिटर्न की तलाश में हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समय उचित माना जा रहा है।

बदलाव के मुख्य कारण

बैंकों द्वारा बचत खातों पर केवल 2.5% से 3% ब्याज दिया जा रहा है, जिससे लोग खुश नहीं हैं। बैंकों ने फंड जुटाने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों को आकर्षक बनाया है। वित्तीय साक्षरता और डिजिटलीकरण, मोबाइल ऐप्स और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स की वजह से अब हर हाथ में निवेश के विकल्प उपलब्ध हैं।

अधिक रिटर्न की चाह

बंधी हुई धनराशि को देखने पर दिखता है कि लोग अब अपनी बचत को ऐसे साधनों में लगाना अधिक पसंद कर रहे हैं, जहां उन्हें बैंक की सेविंग्स से ज्यादा लाभ मिल सके। जैसे कि फिक्स्ड डिपॉजिट्स में अधिक रिटर्न मिलता है, वहीं कुछ निवेशक स्टॉक्स में भी हाथ आजमाने लगे हैं। इस बदलाव के पीछे का मुख्य कारण निवेश पर फायदा उठाने की आकांक्षा है।

नए और लोकप्रिय निवेश विकल्प

म्यूचुअल फंड और SIP: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में प्रतिभूति बाजारों के जरिए घरेलू बचत ₹6.91 लाख करोड़ रही, जिसमें से अकेले ₹5.13 लाख करोड़ का निवेश म्यूचुअल फंड में हुआ।
इक्विटी/शेयर बाजार: खुदरा निवेशक अब सीधे शेयरों में (विशेषकर IPO, FPO के माध्यम से) बड़ी रुचि दिखा रहे हैं। कुल घरेलू वित्तीय संपत्तियों में म्यूचुअल फंड और इक्विटी की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
सरकारी प्रतिभूतियां (G-Secs): निवेशक सुरक्षित रिटर्न के लिए आरबीआई रिटेल डायरेक्ट स्कीम और ‘आरबीआई फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड’ का भी उपयोग कर रहे हैं, जो वर्तमान में लगभग 8.05% तक का रिटर्न दे रहे हैं।
पेंशन और प्रोविडेंट फंड (PF): रिटायरमेंट को सुरक्षित करने के लिए पीएफ और पेंशन स्कीमों में भी निवेश बढ़ा है।

बदलते निवेश के तरीके

बैंकिंग क्षेत्र में इस बदलाव के चलते वित्तीय तंत्र को भी कुछ नया सोचने की जरूरत पड़ी है। अब बैंकों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे ग्राहकों को ऐसे ऑफर्स दें, जो उन्हें सेविंग्स अकाउंट में पैसे रखने के लिए प्रेरित करें। ऐसी योजनाएं जो ज्यादा ब्याज दर या अन्य लाभ प्रदान करें, लोगों का ध्यान खींच सकती हैं।

वित्तीय विशेषज्ञों की राय

वित्तीय विशेषज्ञ इस बदलाव को स्वस्थ मानते हैं। उनका कहना है कि यह समय भारतीयों के लिए बेहतर विकल्प तलाशने का है। लोग अब केवल बैंक पर निर्भर नहीं रहना चाहते बल्कि अपने धन को सही दिशा में लगाना चाहते हैं। हालांकि, जो लोग निश्चित रिटर्न को प्राथमिकता देते हैं, उन्हें फिक्स्ड डिपॉजिट्स बेहतर नजर आ रहे हैं।

सुरक्षा का मुद्दा

हालांकि, यह ध्यान में रखना जरूरी है कि सभी निवेश जोखिम के साथ आते हैं। यहां तक कि फिक्स्ड डिपॉजिट्स में भी कुछ विशेष शर्तें होती हैं। इसलिए, ये निर्णय लेते समय हर एक व्यक्ति को अपने वित्तीय स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में सही जानकारी और सही समय पर निर्णय लेना बहुत महत्वपूर्ण है।

आम लोग क्या सोचते हैं?

आम जनमानस का मानना है कि सेविंग्स अकाउंट का लाभ अब कम हो रहा है। लोग अब ज्यादा स्वतंत्रता के साथ निवेश करना चाहते हैं, और रिटर्न के अधिक अवसरों की तलाश में हैं। नए विकल्पों में निवेश करने से वे बेहतर रिटर्न की आशा कर रहे हैं। यह एक सकारात्मक संकेत है जो आने वाले समय में वित्तीय तंत्र को मजबूत बना सकता है। यह बदलाव दिखाता है कि भारतीय पारंपरिक बचत (जैसे कैश या सेविंग्स अकाउंट) को छोड़कर अब अधिक रिटर्न वाले ‘वित्तीय एसेट्स’ की तरफ बढ़ रहे हैं।

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