20 साल, 17 दिन का लंबा इंतजार… निंबालकर मर्डर केस में आज आएगा फैसला
महाराष्ट्र के चर्चित पवनराजे निंबालकर हत्याकांड (Pawanraje Nimbalkar Murder Case) में मुंबई की विशेष सीबीआई (CBI) अदालत 20 जून 2026 (आज) अपना अंतिम फैसला सुनाने जा रही है। पहले यह फैसला 16 जून को आना था, लेकिन अदालत ने आदेश पूरा लिखने के लिए कुछ दिनों का अतिरिक्त समय लिया था।यह ऐतिहासिक फैसला 20 साल और 17 दिन के लंबे इंतजार, 15 साल लंबे चले कोर्ट ट्रायल और 128 से अधिक गवाहों की गवाही के बाद आ रहा है।
सभी की निगाहें न्याय पर टिकी
कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की हत्या के मामले में आज कोर्ट का फैसला आ रहा है। यह फैसला 20 जून को सुनाया जाएगा। इस मामले में पूर्व गृह मंत्री पद्मसिंह पाटिल समेत 9 आरोपी हैं। पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद है। इस ऐतिहासिक मामले पर सबकी नजर है, और आज का दिन निंबालकर और काजी परिवार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
पीड़ित परिवार ने कोर्ट के लिए की तैयारी
निंबालकर और काजी परिवार ने पुणे से मुंबई जाने के लिए तैयारियां कर ली हैं। सभी 9 आरोपियों को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। मुंबई के अतिरिक्त सत्र न्यायालय में मामले की सुनवाई हो रही है। यह फैसला कई वर्षों से लंबित है और सभी को इसकी प्रतीक्षा है।
केस से जुड़े मुख्य तथ्य और घटनाक्रम
3 जून 2006 को कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की नवी मुंबई के कलंबोली में कार रोककर सरेआम गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। CBI की चार्जशीट के अनुसार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के पूर्व सांसद और महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री पद्मसिंह पाटिल इस हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता हैं।
राजनीतिक और व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता
जिले में पवनराजे की बढ़ती लोकप्रियता से असहज होकर पाटिल ने उन्हें रास्ते से हटाने के लिए ₹30 से ₹35 लाख की सुपारी (कॉन्ट्रैक्ट किलिंग) दी थी। इस लंबे ट्रायल के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे सहित 128 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। आरोपी पारसमल जैन ने बाद में सरकारी गवाह (माफी का साक्षीदार) बनकर पूरी साजिश का खुलासा किया था।
अदालत का आदेश
विशेष अदालत ने पद्मसिंह पाटिल (उम्र 86 वर्ष) सहित सभी 9 आरोपियों को आज कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का सख्त आदेश दिया है। इस केस में पद्मसिंह पाटिल, जो एनसीपी के वरिष्ठ नेता हैं, पर आरोप है कि उन्होंने राजनीतिक और व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता के चलते अपने कजिन की हत्या की साजिश रची। नौ आरोपियों में नाम शामिल हैं, जिनमें सतीश मंडाडे, मोहन शुक्ला, पारसमल जैन और अन्य शामिल हैं। यह मामला बेहद संवेदनशील है क्यूंकि इसमें राजनीति भी आ जाती है।
न्याय के लिए परिवार की लंबी लड़ाई
आज की सुनवाई में निंबालकर परिवार के सदस्य मौजूद रहेंगे, जिसमें पत्नी आनंदीदेवी, बेटे ओमराजे और डॉ. जयप्रकाश शामिल हैं। ओमराजे ने कहा कि उनके परिवार के लिए यह एक भावुक क्षण है। पिछले 20 सालों से न्याय के लिए लड़ाई जारी है। उन्होंने न्यायपालिका पर विश्वास जताया है और उम्मीद की है कि उन्हें न्याय मिलेगा।
समद काजी का परिवार भी मौजूद
समद काजी के बेटे ने कहा कि उनके पिता की हत्या के समय वह केवल डेढ़ साल के थे। उन्होंने बताया कि पिता की मौत के बाद उनके परिवार पर कई जिम्मेदारियां आ गईं और उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। काजी परिवार ने मृतक के प्रति न्याय की मांग की है।
सीबीआई जांच के बाद का घटनाक्रम
पहले इस मामले की जांच नवी मुंबई पुलिस ने की, लेकिन बाद में यह मामला सीबीआई को सौंपा गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह कदम उठाया था, यह देखते हुए कि राज्य पुलिस की जांच में लापरवाही थी। मामले में कई महत्वपूर्ण गवाह हैं, जिनमें से एक पारसमल जैन है, जिन्होंने हत्या की साजिश का खुलासा किया।
राजनीतिक गलियारे में हलचल
अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों का बयान दिया है, जो यह दिखाते हैं कि निंबालकर को धमकियां मिल रही थीं। पीड़ित की पत्नी और बेटे ने भी सुरक्षा के मुद्दों पर गवाही दी है। पवनराजे निंबालकर के बेटे और धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके परिवार ने न्याय के लिए दो दशकों तक कड़ा संघर्ष किया है और उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल और हालिया दलबदल (ऑपरेशन टाइगर) के बीच, इस अदालती फैसले के राजनीतिक नतीजों पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं।
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