मुश्किलों को हराकर चमके बाल गृह के बच्चे! 715 छात्रों ने पास की 10वीं की परीक्षा 

The CSR Journal Magazine
मुंबई में महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ी बाल गृहों के बच्चों ने इस साल 10वीं बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर एक नई मिसाल कायम की है। कठिन परिस्थितियों में रहने के बावजूद राज्यभर के विभिन्न बाल गृहों के 715 छात्रों ने 10वीं की परीक्षा पास की है। इस सफलता पर महिला एवं बाल विकास मंत्री Aditi Tatkare ने सभी विद्यार्थियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। मंत्री आदिती तटकरे ने कहा कि इन बच्चों ने विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए सकारात्मक रास्ता चुना और यह साबित किया कि मेहनत और हौसले के दम पर हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार इन विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई के लिए हर जरूरी मदद करेगी।

विशेष क्लास और ऑनलाइन सेशन का मिला फायदा

महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से बच्चों के लिए विशेष शैक्षणिक व्यवस्था की गई थी। छात्रों के लिए ऑनलाइन सेशन आयोजित किए गए, नियमित अभ्यास कराया गया और शिक्षकों द्वारा स्पेशल क्लास भी चलाए गए। इन प्रयासों का असर परीक्षा परिणामों में साफ दिखाई दिया। राज्य में सबसे ज्यादा 118 छात्र पुणे जिले के बाल गृहों से पास हुए। इसके बाद मुंबई उपनगर से 88, अहिल्यानगर से 80 और बीड जिले से 47 छात्रों ने सफलता हासिल की। ठाणे जिले से 42, सोलापुर से 39 और कोल्हापुर से 34 छात्र पास हुए हैं।

कई छात्रों ने हासिल किए 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक

बाल गृहों के कई विद्यार्थियों ने सिर्फ परीक्षा पास ही नहीं की, बल्कि शानदार अंक भी हासिल किए। कोल्हापुर जिले के एक छात्र ने 95.20 प्रतिशत अंक प्राप्त कर पहला स्थान हासिल किया। वहीं दूसरे स्थान पर रहने वाले छात्र को 86 प्रतिशत अंक मिले। बीड जिले में भी छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया। यहां पहले स्थान पर रहने वाले छात्र ने 94 प्रतिशत और दूसरे स्थान वाले छात्र ने 92.40 प्रतिशत अंक हासिल किए। पुणे, सोलापुर, मुंबई शहर, मुंबई उपनगर और धाराशिव के कई विद्यार्थियों ने 85 प्रतिशत से ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

इन बच्चों की कहानी सिर्फ रिजल्ट की नहीं, बल्कि संघर्ष और आत्मविश्वास की भी है। कई छात्र ऐसे हैं जिन्होंने बेहद कठिन हालात में पढ़ाई जारी रखी और अब अपने सपनों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। सरकार का कहना है कि आगे भी बाल गृहों में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षा, मार्गदर्शन और काउंसलिंग की सुविधाएं लगातार दी जाएंगी। यह सफलता उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण मानी जा रही है, जो मुश्किल हालात के बावजूद अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं।
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