100 साल पुरानी भीम उप-जेल हुई खाली बंदियों को ब्यावर भेजा, स्टाफ भी शिफ्ट इलाके में बढ़ी चिंता

The CSR Journal Magazine
राजसमंद जिले के भीम उपखंड मुख्यालय स्थित ब्रिटिशकालीन ऐतिहासिक उप-जेल को प्रशासनिक कारणों से पूरी तरह खाली कर दिया गया है। जेल में निरुद्ध सभी बंदियों को ब्यावर जिला कारागृह भेज दिया गया है, जबकि अधिकांश स्टाफ को डूंगरपुर स्थानांतरित किया गया है। करीब एक सदी पुरानी इस जेल के खाली होने से स्थानीय लोगों में इसे स्थायी रूप से बंद किए जाने की आशंका बढ़ गई है। नई व्यवस्था से बंदियों के परिजनों, अधिवक्ताओं और न्यायिक प्रक्रिया पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

ब्रिटिशकालीन जेल में अब नहीं रहेगा कोई बंदी

राजसमंद जिले के भीम कस्बे में स्थित उप-जेल लंबे समय से क्षेत्र की प्रमुख निरुद्ध स्थली रही है। यह जेल ब्रिटिशकालीन विरासत मानी जाती है और यहां भीम, देवगढ़, दिवेर तथा कामलीघाट क्षेत्र के आरोपियों को रखा जाता था। उदयपुर कारागार रेंज के उप महानिरीक्षक के निर्देश पर 4 मई को आदेश जारी कर जेल को पूरी तरह खाली करा दिया गया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि अब नए बंदियों को भी सीधे ब्यावर जिला कारागृह भेजा जाएगा। इसके बाद जेल परिसर में एक भी बंदी नहीं बचा है। हालांकि विभाग ने इसे प्रशासनिक निर्णय बताया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि भीम उप-जेल को स्थायी रूप से बंद करने की तैयारी चल रही है।

हर साल 500 से ज्यादा बंदियों का होता था आवागमन

भीम उप-जेल भले ही आकार में छोटी थी, लेकिन क्षेत्रीय दृष्टि से इसकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। जेल प्रशासन के अनुसार यहां बंदियों की अधिकतम क्षमता केवल 6 कैदियों की थी, लेकिन वर्षभर में 500 से अधिक बंदियों का आवागमन होता था। पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपियों को अस्थायी रूप से यहीं रखा जाता था। इससे स्थानीय अदालतों और पुलिस प्रशासन को सुविधा मिलती थी। अब बंदियों को ब्यावर भेजने से पुलिस और जेल प्रशासन के समन्वय में अतिरिक्त समय और संसाधन लगने की संभावना बढ़ गई है। साथ ही बंदियों को पेशी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी।

परिजनों और ग्रामीण परिवारों की बढ़ेंगी परेशानियां

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर बंदियों के परिवारों पर पड़ने वाला है। अब मुलाकात के लिए परिजनों को करीब 70 किलोमीटर दूर ब्यावर जाना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब परिवारों के लिए यह दूरी आर्थिक और मानसिक बोझ बन सकती है। महिलाओं, बुजुर्गों और सीमित साधनों वाले लोगों को बस और अन्य यातायात साधनों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भीम में मुलाकात आसानी से हो जाती थी, लेकिन अब पूरा दिन यात्रा में निकल जाएगा। कई परिवार ऐसे हैं जो आर्थिक तंगी के कारण नियमित मुलाकात भी नहीं कर पाएंगे। लोगों ने सरकार से मांग की है कि जेल को फिर से शुरू किया जाए या कम से कम क्षेत्रीय जरूरतों को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए।

जेल स्टाफ का तबादला, प्रशासनिक काम जारी

भीम उप-जेल में स्वीकृत 16 पदों में से 14 कर्मचारी कार्यरत थे। इनमें से 10 कर्मचारियों को अस्थायी रूप से डूंगरपुर जिला कारागृह भेज दिया गया है। फिलहाल 4 प्रहरी भीम में ही तैनात हैं और प्रशासनिक कामकाज संभाल रहे हैं। हालांकि जेल परिसर अब बंदियों से पूरी तरह खाली है। जेल प्रभारी देशराज ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार बंदियों को प्रशासनिक कारणों से ब्यावर शिफ्ट किया गया है। आगे जो भी आदेश मिलेंगे, उनकी पालना की जाएगी। प्रशासनिक गतिविधियां अभी भी भीम से संचालित हो रही हैं, लेकिन भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से कर्मचारियों में भी असमंजस बना हुआ है।

नया भवन अधर में, न्यायिक प्रक्रिया पर असर की आशंका

भीम उप-जेल के नए भवन के लिए मार्च 2025 में टोगी के नंदावट राजस्व ग्राम में 15 बीघा भूमि आवंटित की गई थी। इसके निर्माण के लिए बजट प्रस्ताव और व्यय विवरण भी उच्चाधिकारियों को भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। इसी बीच पुराने जेल परिसर को खाली कर दिए जाने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बंदियों को ब्यावर में रखने से न्यायिक प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। भीम का न्यायिक क्षेत्र राजसमंद जिला मुख्यालय से जुड़ा है, जो करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित है।
ऐसे में अधिवक्ताओं, पुलिस और परिजनों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे पेशियों और कानूनी कार्यों में देरी हो सकती है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सरकार जेल की कमियों को दूर कर सुविधाओं का विस्तार करे, न कि इस ऐतिहासिक संस्थान को बंद किया जाए।

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