‘खाने में चिकन क्यों नहीं बनाया?’ गुस्से से चिल्लाया पति, पत्नी ने काट डाला गला

The CSR Journal Magazine
तेलंगाना के कामारेड्डी जिले में एक सामान्य दिन की शुरुआत के बाद, एक परिवार के बीच खाने को लेकर बहस शुरू हो गई। शादीशुदा जोड़ी के रिश्तेदार जब घर से लौटे, तब पत्नी ने अपने पति को बताया कि आज रात खाने में चिकन नहीं बनाना है। इस बात पर पति भड़क गया और गुस्से में loudly चिल्लाने लगा। यह झगड़ा सिर्फ खाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुराने घरेलू विवाद भी फिर से ताजा हो गए।

रिश्तेदारों का बीच-बचाव

इस मामूली सी बात पर मामला बढ़ गया और पत्नी ने अपनी बुद्धिमानी के साथ रिश्तेदारों को बुलाया। नंदिनी, जो उस समय वहां थी, उसने बीच-बचाव करने की कोशिश की। लेकिन हालात इतनी बुरी तरह बिगड़ गए थे कि नंदिनी को कुछ समझ में नहीं आया। यह झगड़ा पहले से चल रहे मनमुटाव की जड़ों को खोदने लगा।

गुस्सा बना जानलेवा

गुस्से में पति ने पत्नी पर और भी आरोप लगाने शुरू कर दिए। उसने कहा कि वह हमेशा उसे इग्नोर करती है और उसकी इच्छाओं का सम्मान नहीं करती। पति के चिल्लाने की आवाज़ सुनकर माता-पिता भी वहां आ गए। नंदिनी ने फिर भी कोशिश की कि वह दोनों को शांत कराए। लेकिन यह सब अनियंत्रित हो गया।

किसी ने नहीं सोचा यह होगा अंत

तभी पत्नी ने अचानक चाकू उठा लिया। किसी को समझ नहीं आया कि यह तुरंत क्या हो रहा है। गुस्से में आकर उसने अपने पति का गला काट दिया। घटनास्थल पर उपस्थित लोगों के होश उड़ गए। यह सब इतनी तेजी से हुआ कि कोई भी उसे रोक नहीं सका।

पुलिस की कार्रवाई

घटना के बाद जैसे ही पड़ोसियों को जानकारी मिली, वे तुरंत पुलिस को बुलाने लगे। मौके पर पहुंची पुलिस ने पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने इस घटना को घरेलू हिंसा का एक गंभीर उदाहरण बताया है।

समाज में बढ़ती हिंसा के आंकड़े

यह घटना इस बारे में सोचने पर मजबूर करती है कि हमारा समाज कितना बदल रहा है। घरेलू झगड़े और विवादों का बढ़ता ग्राफ चिंताजनक है। इससे साफ होता है कि छोटी-छोटी बातें बड़े विवादों का रूप ले सकती हैं। विदाई पार्टी हो या फिर तीज-त्यौहार, पारिवारिक सदस्यों के बीच कहीं न कहीं तनाव रहता है।

क्या है इसका समाधान?

इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए परिवारों को आपसी संवाद और समझ की जरूरत है। रिश्तों में प्रेम और स्नेह को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि हम एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें। ऐसे अनियंत्रित गुस्से से जिंदगी बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। परिवार में संवाद के रास्ते खुलने चाहिए ताकि विवाद बढ़ने से पहले ही सुलझा लिए जाएं।

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