तपती गर्मी में राहत का मंत्र राबड़ी-पानी से लेकर नींबू सोडा तक, ऐसे रखें शरीर को ठंडा और सुरक्षित

The CSR Journal Magazine
राजस्थान सहित देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच पारंपरिक पेय और सही दिनचर्या ही बचाव का सबसे असरदार तरीका बनकर सामने आए हैं। डॉक्टर भी पानी, छाछ, लस्सी और मौसमी फलों के सेवन के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

भीषण गर्मी का कहर शरीर को ठंडा रखना सबसे जरूरी

राजस्थान में तापमान लगातार 45 डिग्री के पार पहुंच रहा है और देश के कई हिस्सों में भी लू (हीट वेव) का असर देखा जा रहा है। ऐसे में शरीर को हाइड्रेट रखना और ठंडा बनाए रखना बेहद जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी में शरीर से पसीने के रूप में पानी और जरूरी लवण तेजी से बाहर निकलते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन, चक्कर, थकान और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसी कारण दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पीना जरूरी है। केवल प्यास लगने पर पानी पीना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि हर 30-40 मिनट में थोड़ा-थोड़ा पानी पीना शरीर को संतुलित रखता है।

पारंपरिक पेय देसी नुस्खे ही असली राहत

गर्मी से बचाव के लिए राजस्थान और देश के ग्रामीण इलाकों में आज भी पारंपरिक पेय सबसे ज्यादा कारगर माने जाते हैं। राबड़ी-पानी, इमली का पानी, नींबू पानी, नींबू सोडा, छाछ और लस्सी जैसे पेय शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ जरूरी मिनरल्स भी प्रदान करते हैं। खासकर छाछ और लस्सी पाचन को बेहतर बनाते हैं और शरीर में ठंडक बनाए रखते हैं। वहीं नींबू पानी और नींबू सोडा विटामिन C से भरपूर होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देते हैं। इमली का पानी भी लू से बचाने में कारगर माना जाता है, क्योंकि यह शरीर का तापमान नियंत्रित करता है।गांवों में आज भी बुजुर्ग इन पेयों को “प्राकृतिक कूलर” मानते हैं और रोजाना इनके सेवन की सलाह देते हैं।

मौसमी फल खीरा, तरबूज और खरबूजा हैं रामबाण

गर्मी के मौसम में पानी से भरपूर फल जैसे तरबूज, खरबूजा और खीरा शरीर को ठंडा रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। तरबूज और खरबूजा में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जो शरीर को हाइड्रेट रखता है। ये फल न केवल प्यास बुझाते हैं बल्कि शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी देते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, दिन में एक या दो बार इन फलों का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और लू का खतरा भी कम हो जाता है। हालांकि कटे हुए फल लंबे समय तक बाहर रखने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

डॉक्टरों की सलाह सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी में केवल खान-पान ही नहीं, बल्कि दिनचर्या में बदलाव भी जरूरी है। घर से बाहर निकलते समय सिर को ढकना बेहद जरूरी है। महिलाएं दुपट्टा या स्कार्फ का उपयोग करें, जबकि पुरुष भी टोपी या कपड़ा इस्तेमाल कर सकते हैं। आंखों को तेज धूप से बचाने के लिए सनग्लासेस पहनना चाहिए, जिससे आंखों पर सीधी धूप का असर कम होता है। इसके अलावा दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय लू का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि अधिक तली-भुनी और मसालेदार चीजों से परहेज करें और हल्का, सुपाच्य भोजन लें। राजस्थान सहित पूरे देश में बढ़ती गर्मी के बीच पारंपरिक पेय, मौसमी फल और सही जीवनशैली ही सबसे बड़ा बचाव हैं। यदि लोग नियमित पानी पीने, छाछ-लस्सी जैसे पेय लेने और डॉक्टरों की सलाह का पालन करें, तो भीषण गर्मी का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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