अरावली में फंसा ‘सोने का खजाना’ राजस्थान के 122 मिलियन टन गोल्ड भंडार पर खनन अब भी अधर में

The CSR Journal Magazine
राजस्थान में विशाल स्वर्ण भंडार होने के बावजूद खनन परियोजनाएं पर्यावरणीय, तकनीकी और न्यायिक अड़चनों में उलझी हुई हैं। अरावली क्षेत्र में स्थित खदानों पर रोक और लंबित मामलों के चलते सोने का दोहन अब तक शुरू नहीं हो सका है।

राजस्थान में सोने की भरमार, लेकिन खनन ठप

राजस्थान देश के स्वर्ण भंडार के मामले में एक प्रमुख राज्य बनकर उभरा है। अनुमान के अनुसार प्रदेश में करीब 122 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क मौजूद है, जो देश के कुल भंडार का लगभग 25 प्रतिशत है। इस मामले में राजस्थान दूसरे स्थान पर है, जबकि बिहार पहले स्थान पर काबिज है। प्रदेश के बांसवाड़ा, सलूंबर और दौसा जिलों में सोने के बड़े भंडार चिन्हित किए जा चुके हैं। कई वर्षों पहले इन क्षेत्रों में सर्वेक्षण और पूर्वेक्षण भी पूरे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद खनन कार्य शुरू नहीं हो सका है। इससे राज्य को संभावित राजस्व और रोजगार के बड़े अवसरों का नुकसान हो रहा है।

अरावली बनी सबसे बड़ी बाधा

राजस्थान में जिन क्षेत्रों में स्वर्ण खनन की संभावना है, उनमें से कई क्षेत्र अरावली पर्वत श्रृंखला के अंतर्गत आते हैं। पर्यावरण संरक्षण के कड़े नियमों के चलते इन क्षेत्रों में खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध या सख्त नियंत्रण है। सलूंबर जिले का डगोचा ब्लॉक (472 हेक्टेयर) और बांसवाड़ा का कांकरिया गारा ब्लॉक (205 हेक्टेयर) इसी कारण नीलामी प्रक्रिया के बावजूद रोक दिए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है, बल्कि यह जलवायु संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में यहां खनन की अनुमति देना आसान नहीं है।

भूकिया-जगपुरा खदान कोर्ट में अटका मामला

बांसवाड़ा जिले का भूकिया-जगपुरा क्षेत्र राज्य के सबसे बड़े स्वर्ण भंडारों में से एक माना जाता है। यहां करीब 114.78 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क का अनुमान लगाया गया था। करीब तीन साल पहले इस खदान का आवंटन एक कंपनी को किया गया था, जिसने नीलामी के बाद निर्धारित राशि भी जमा कराई थी। हालांकि बाद में तकनीकी कारणों से यह आवंटन निरस्त कर दिया गया। अब यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस कानूनी उलझन के कारण यहां खनन कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है।

ढाणी-बसेड़ी ब्लॉक संभावनाएं, लेकिन पहल नहीं

दौसा जिले के ढाणी-बसेड़ी ब्लॉक में भी स्वर्ण अयस्क के अच्छे भंडार होने की पुष्टि हो चुकी है। वर्ष 2000 से 2003 के बीच किए गए सर्वेक्षण में यहां करीब 3.80 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क का अनुमान सामने आया था। इतना ही नहीं, इस क्षेत्र में क्रिटिकल मिनरल्स (रणनीतिक खनिज) होने की संभावना भी जताई जा रही है, जो देश की औद्योगिक और रक्षा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसके बावजूद अब तक इस ब्लॉक के लिए न तो नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है और न ही खनन की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया है।

राज्यों में स्वर्ण भंडार की स्थिति

देश में कुल 501 मिलियन टन स्वर्ण भंडार चिन्हित किए गए हैं। इनमें बिहार 44% हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है, जबकि राजस्थान 25% के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके बाद कर्नाटक (21%), आंध्र प्रदेश (3%), पश्चिम बंगाल (3%) और झारखंड (2%) का स्थान आता है।
राजस्थान में सोने के विशाल भंडार होने के बावजूद खनन परियोजनाएं पर्यावरणीय प्रतिबंध, कानूनी विवाद और प्रशासनिक सुस्ती के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। यदि इन बाधाओं का संतुलित समाधान निकाला जाए, तो यह राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है और हजारों लोगों को रोजगार भी मिल सकता है।
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