कोयले पर सरकार का बढ़ा फोकस, क्या है ‘जीरो कोल लीकेज’ प्लान और इसके पीछे की वजह?

The CSR Journal Magazine
बिजली की डिमांड में तेजी से बढ़ोतरी के चलते केंद्र सरकार ने ‘जीरो कोल लीकेज’ प्लान को लागू करने का निर्णय लिया है। यह योजना मुख्यत: अवैध खनन और कोयला चोरी को रोकने के लिए बनाई गई है। ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और बिजली उत्पादन के लिए कोयले की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। पिछले कुछ महीनों में झारखंड और अन्य राज्यों में कोयले की चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत महसूस हुई।

जून 2026 में कोयले की मांग में इजाफा क्यों?

जून 2026, भारत के मौसम में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यह वर्ष 1901 के बाद से सबसे कम वर्षा वाले महीनों में से एक रहा। तेज गर्मी ने एयर कंडीशनर और कूलरों का उपयोग बढ़ा दिया, जिससे बिजली की जरूरत में 10.4% की वृद्धि हुई। कोयले से बिजली उत्पादन भी लगभग 14% बढ़कर 120.2 अरब यूनिट पर पहुंच गया। रिन्यूएबल एनर्जी का हिस्सा मात्र 19% तक पहुंचा, जो कि वर्तमान मांग को पूरा नहीं कर सका।

रिन्यूएबल एनर्जी क्यों नहीं कर रही है काम?

हालांकि सरकार नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है, फिर भी ये कोयले की जगह लेने में असमर्थ हैं। सौर ऊर्जा केवल दिन में काम करती है और रात के लिए बैटरी स्टोरेज की कमी है। पनबिजली उत्पादन भी कम वर्षा के कारण प्रभावित हुआ। इस बीच, प्राकृतिक गैस से बिजली उत्पादन में भी कमी आई। इससे साबित होता है कि वर्तमान में कोयला ही सबसे विश्वसनीय विकल्प बना हुआ है।

‘जीरो कोल लीकेज’ प्लान की विशेषताएँ

सरकार का लक्ष्य है कि खदान से लेकर उपभोक्ता तक कोयले की सप्लाई चेन में कोई भी चोरी न हो। इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं। पहला, CISF को अवैध खनन वाले इलाकों में तलाशी और कानूनी कार्रवाई का अधिकार दिया गया है। दूसरा, संवेदनशील खदानों में क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) तैनात की जाएगी। तीसरा, 24 घंटे डिजिटल निगरानी के लिए हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगाए जाएंगे। अंत में, ई-वे बिल की जांच सख्ती से की जाएगी।

सरकार की सख्ती का कारण क्या है?

कोयले की चोरी अब सिर्फ एक छोटे स्तर की समस्या नहीं रह गई है। यह एक संगठित अपराध बन चुकी है। झारखंड के धनबाद क्षेत्र में हर साल हजारों करोड़ रुपये का कोयला अवैध तरीकों से निकाला जाता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र से हर साल करीब 4,500 करोड़ रुपये का कोयला अवैध रूप से निकाला जाता है। इस साल की शुरुआत से अब तक 522 कोयला चोरी के मामले दर्ज किए गए हैं।

भारत का ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्‍य

भारत ग्रीन एनर्जी की दिशा में अग्रसर है, लेकिन वर्तमान समय में बिजली उत्पादन की रीढ़ कोयला ही है। सरकार की कोशिश है कि इस महत्वपूर्ण संसाधन का उपयोग चोरी और अवैध व्यवसाय में जाने के बजाय बिजली उत्पादन और विकास के लिए किया जाए। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोयले की चोरी नहीं हो, अन्यथा ऊर्जा सुरक्षा, सरकारी राजस्व और बिजली उत्पादन प्रभावित होते रहेंगे।

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