वंदे मातरम विवाद: शर्मिला टैगोर के तर्कों पर कंगना का करारा पलटवार, बोलीं-कला को धार्मिक चश्मे से देखना बंद करें

The CSR Journal Magazine

कंगना रनौत ने शर्मिला टैगोर के ‘वंदे मातरम’ बयान पर जताई नाराजगी

कंगना रनौत ने शर्मिला टैगोर के ‘वंदे मातरम’ वाले बयान पर तीखा पलटवार करते हुए उन्हें ‘हिंदू-मुस्लिम वाली संकीर्ण सोच से बाहर आने’ की नसीहत दी है। राष्ट्रीय गीत को लेकर छिड़े राजनीतिक विवाद में अब बॉलीवुड की दो बड़ी हस्तियों के बीच वैचारिक जंग छिड़ गई है। बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने दिग्गज अदाकारा शर्मिला टैगोर के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें शर्मिला ने कहा था कि ‘वंदे मातरम’ के कुछ छंद एकेश्वरवाद (एक ईश्वर को मानने वाले) के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।

वंदे मातरम’ पर आर-पार: शर्मिला टैगोर के बयान पर भड़कीं कंगना रनौत

देश के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रहा राजनीतिक घमासान अब पूरी तरह से सिनेमा जगत के गलियारों तक पहुंच चुका है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपने जमाने की मशहूर अदाकारा शर्मिला टैगोर के उस बयान पर गहरी नाराजगी और हैरानी व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के पूरे गायन को लेकर कुछ धार्मिक समुदायों की असहजता की बात कही थी। कंगना ने सोशल मीडिया पर एक लंबी-चौड़ी पोस्ट साझा कर शर्मिला टैगोर के विचारों को ‘सीमित और बनावटी’ करार दिया है।

क्या था शर्मिला टैगोर का विवादित बयान?

दरअसल एक विशेष साक्षात्कार में जब शर्मिला टैगोर से ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रहे मौजूदा विवाद पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “भारत में कई धर्मों और मजहबों के लोग रहते हैं। इनमें से बहुत से धार्मिक लोग ऐसे हैं जो केवल एक ही ईश्वर (सिंगल गॉड) में विश्वास करते हैं, अनेक देवी-देवताओं में नहीं।” शर्मिला टैगोर ने आगे गीत की व्याख्या करते हुए तर्क दिया, “वंदे मातरम के बाद के छंदों में कई देवी-देवताओं का जिक्र आता है। जो लोग एक ही ईश्वर को मानते हैं, उनके लिए ‘वंदे काली’ या ‘वंदे दुर्गा’ कहना धार्मिक रूप से मुश्किल हो सकता है। इसलिए, अगर हम भारत के सभी धार्मिक लोगों को एक साथ लेकर चलना चाहते हैं, तो वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद ही सबसे बेहतरीन और समावेशी हैं।”

कंगना का करारा पलटवार: ‘कला को धार्मिक चश्मे से न देखें’

शर्मिला टैगोर का यह वीडियो सामने आते ही कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर इसे साझा करते हुए कड़ा ऐतराज जताया। कंगना ने लिखा, “मैं इस बात की सराहना करती हूं कि शर्मिला जी ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर अपनी आपत्तियों को खुलकर सामने रखा है। लेकिन एक कलाकार के तौर पर मुझे इस बात पर बेहद हैरानी है कि कला या कविता को लेकर उनकी सोच इतनी सीमित और बनावटी कैसे हो सकती है?” कंगना ने कलात्मक दृष्टिकोण समझाते हुए लिखा कि किसी भी कविता या गीत में इस्तेमाल होने वाले शब्द केवल शाब्दिक अर्थ नहीं रखते, बल्कि वे रूपक (मेटाफर्स) होते हैं। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित यह गीत केवल एक धार्मिक पाठ नहीं है, बल्कि यह हमारे स्वतंत्रता संग्राम की वो मूल भावना है जिसने देश को एकजुट किया था।

‘झप्पी से ऐतराज नहीं, पर सोच बदलें’

अपने आक्रामक तेवरों के लिए जानी जाने वाली कंगना ने इस बार वरिष्ठ अभिनेत्री के प्रति सम्मान दिखाते हुए भी अपनी बात को पूरी दृढ़ता से रखा। उन्होंने लिखा, “कृपया करके इस हिंदू-मुस्लिम वाले माइंडसेट से बाहर निकलिए। भले ही हम एक ईश्वर को मानते हों, लेकिन उस आंतरिक चेतना और ब्रह्मांडीय ऊर्जा को हमारे डॉक्टर और वैज्ञानिक भी ‘शक्ति’ (Energy) ही कहते हैं। बंकिम चंद्र जी इसी आंतरिक शक्ति को जगाने के लिए प्रेरित कर रहे थे।” कंगना ने स्वामी विवेकानंद के एक प्रसिद्ध कथन का उदाहरण देते हुए कहा, “स्वामी जी ने कहा था कि उन्हें ऐसे युवा चाहिए जिनकी नस-नस में बिजली दौड़ती हो और हड्डियां स्टील की हों। इसका मतलब यह तो नहीं था कि वे कोई रोबोट बनाना चाहते थे। वे आत्मिक और मानसिक शक्ति की बात कर रहे थे। वंदे मातरम भी इसी असीम राष्ट्रीय शक्ति का प्रतीक है।” अंत में कंगना ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी जोड़ा कि वे व्यक्तिगत तौर पर शर्मिला टैगोर को पसंद करती हैं और उनसे ‘गले मिलने’ (जोरदार झप्पी) में उन्हें कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन उनकी इस सोच से वे असहमत हैं।

पृष्ठभूमि: कैसे शुरू हुआ यह विवाद?

गौरतलब है कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर ताजा विवाद 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के बाद से ही देश की राजनीति में छाया हुआ है। कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत के पूरे गायन को कथित तौर पर बीच में ही रोके जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और सोनिया गांधी पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया था। इसके बाद से ही विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर राष्ट्रगीत की अनिवार्यता और उसके छंदों के अर्थों को लेकर तीखी बहस जारी है। फिलहाल शर्मिला टैगोर की तरफ से कंगना के इस पलटवार पर कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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