जितिया व्रत 2026: कब है यह खास दिन, माताएं करेंगी निर्जला उपवास? जानें तिथि और परंपरा

The CSR Journal Magazine
जितिया व्रत हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दौरान माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए कठिन निर्जला उवास करती हैं। यह व्रत विशेष रूप से माताओं द्वारा किया जाता है, जो अपने बच्चों की भलाई के लिए विशेष ध्यान रखती हैं और पूरे रिवाजों का पालन किया जाता है।

2026 में जितिया व्रत की तारीख

धार्मिक पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 3 अक्टूबर 2026 को सुबह 07:59 बजे होगा और इसका समापन अगले दिन 4 अक्टूबर 2026 को सुबह 05:51 बजे होगा। उदयातिथि और प्रदोष काल में पूजा के महत्व के कारण मुख्य व्रत 3 अक्टूबर को ही रखा जाएगा।
यह निश्चित तौर पर माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है जब वे अपने बच्चों की सेहत और सुख-समृद्धि के लिए उपवास करेंगी। एक बार फिर, यह व्रत माताओं के अटूट प्रेम और संतान के प्रति उनके संकल्प को दर्शाता है।

पूजन का शुभ मुहूर्त

जितिया व्रत के दौरान पूजा का शुभ मुहूर्त भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष, यह मुहूर्त पूरे दिन में निर्धारित किया जाएगा, ताकि माताएं अपने समय के अनुसार पूजा कर सकें। शास्त्रों के अनुसार, सही समय पर पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

पारण समय का महत्व

व्रत के बाद पारण की तारीख 4 अक्टूबर 2026 होगी।  उपवास के बाद पारण का समय भी निर्धारित होता है। पारण का समय माताओं के लिए खास होता है, क्योंकि यह उनके कठिन व्रत को समाप्त करने का संकेत है। इस दौरान संतान की सेहत के लिए विशेष प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। पारण के समय की सही जानकारी होना जरूरी है ताकि व्रति सही समय पर अपनी साधना को संपन्न कर सके।
जितिया व्रत सिर्फ भोजन और उपवास का मामला नहीं है, बल्कि यह एक आशीर्वाद की तरह है। माताएं अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना करती हैं। ऐसे में यह उपवास माताओं का अपने बच्चों के प्रति प्रेम का प्रतीक है। माताएं अपने बच्चों की सेहत के लिए इस दिन विशेष प्रयास करती हैं।

व्रत के साथ जुड़ी परंपराएं

जितिया व्रत के दौरान कई परंपराएं और रिवाज भी निभाए जाते हैं। इनमें विशेष पंडित को बुलाकर पूजा कराना, व्रत का पालन करना और संतान के लिए अच्छे भविष्य की कामना शामिल है। यह व्रत सामूहिक रूप से भी मनाया जाता है, जहाँ परिवार के सदस्य एकसाथ मिलकर इस पर्व का आनंद लेते हैं।

आधुनिक युग में जितिया व्रत

हालांकि, समय परिवर्तन के साथ व्रत का तरीका भी बदल गया है। अब माताएं इस व्रत को अपनी सुविधा के अनुसार पूरी कर रही हैं। लेकिन व्रत के पीछे का मूल उद्देश्य अभी भी वही है – संतान की सुरक्षा और उनकी समृद्धि के लिए भगवान से प्राथना करना। इसके साथ ही, माताएं अपने बच्चों को भी इसके महत्व से अवगत करा रही हैं।

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