कैंसर की जल्द पहचान में बड़ी सफलता: रिलायंस की स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज को ब्लड-बेस्ड अर्ली कैंसर डिटेक्शन तकनीक का भारतीय पेटेंट
भारत में कैंसर की शीघ्र पहचान (Early Cancer Detection) को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। Reliance Industries Limited की सहयोगी कंपनी Strand Life Sciences को रक्त आधारित प्रारंभिक कैंसर पहचान तकनीक (Blood-Based Early Cancer Detection Technology) के लिए एक महत्वपूर्ण भारतीय पेटेंट प्राप्त हुआ है। यह तकनीक केवल एक रक्त नमूने के माध्यम से कैंसर की शुरुआती अवस्था का पता लगाने के साथ-साथ यह भी अनुमान लगाने में सक्षम है कि कैंसर शरीर के किस अंग या ऊतक से उत्पन्न हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो उसके सफल उपचार की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में यह नई तकनीक भविष्य में कैंसर जांच को अधिक सुलभ, तेज, कम दर्दनाक और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है।
क्या है यह नई तकनीक?
स्ट्रैंड लाइफ साइंसेज द्वारा विकसित यह अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म तीन प्रमुख आधुनिक तकनीकों का संयोजन है—
-
एडवांस्ड जीनोमिक सीक्वेंसिंग (Advanced DNA Sequencing)
-
डीएनए मिथाइलेशन विश्लेषण (DNA Methylation Analysis)
-
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence – AI)
इन तीनों तकनीकों की सहायता से रक्त में मौजूद कैंसर से जुड़े जैविक संकेतों (Biomarkers) का विश्लेषण किया जाता है। इसके आधार पर यह पता लगाया जाता है कि शरीर में कैंसर मौजूद है या नहीं तथा यदि है, तो उसके संभावित स्रोत या प्रभावित अंग का अनुमान भी लगाया जा सकता है।
लिक्विड बायोप्सी क्या है?
यह तकनीक Liquid Biopsy पर आधारित है। पारंपरिक बायोप्सी में डॉक्टरों को शरीर के प्रभावित हिस्से से Tissue निकालना पड़ता है, जो कई बार दर्दनाक, महंगी और जोखिमपूर्ण प्रक्रिया होती है। वहीं लिक्विड बायोप्सी में केवल रक्त का नमूना लेकर कैंसर से जुड़े डीएनए, आरएनए या अन्य जैविक संकेतों की जांच की जाती है।
इस तकनीक के प्रमुख लाभ हैं—
-
सर्जरी की आवश्यकता नहीं।
-
कम समय में जांच।
-
कम दर्द और कम जोखिम।
-
शुरुआती अवस्था में कैंसर पहचानने की बेहतर संभावना।
-
उपचार के दौरान रोग की प्रगति पर लगातार निगरानी।
AI कैसे करेगा मदद?
इस नई प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। AI लाखों जैविक आंकड़ों का विश्लेषण कर उन सूक्ष्म बदलावों को पहचान सकता है जिन्हें सामान्य परीक्षणों से पकड़ना कठिन होता है। यही कारण है कि यह तकनीक केवल कैंसर की मौजूदगी ही नहीं बल्कि उसके संभावित स्रोत की भी भविष्यवाणी करने में सक्षम बताई जा रही है।
मिथाइलेशन विश्लेषण क्यों है महत्वपूर्ण?
डीएनए मिथाइलेशन शरीर की कोशिकाओं में होने वाला एक प्राकृतिक जैविक परिवर्तन है। कैंसर होने पर डीएनए के मिथाइलेशन पैटर्न बदल जाते हैं। इन बदलावों का विश्लेषण कर यह तकनीक सामान्य और कैंसरग्रस्त कोशिकाओं के बीच अंतर पहचानने में मदद करती है। इससे शुरुआती चरण में बीमारी का पता लगाने की संभावना बढ़ जाती है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पेटेंट?
भारत में हर वर्ष लाखों नए कैंसर मरीज सामने आते हैं और बड़ी संख्या में मरीजों में बीमारी का पता देर से चलता है। देर से पहचान होने के कारण उपचार जटिल और महंगा हो जाता है तथा मृत्यु दर भी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में यह स्वदेशी तकनीक—
-
कैंसर की समय रहते पहचान में सहायता करेगी।
-
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक जांच सुविधाओं के विस्तार में मदद कर सकती है।
-
भविष्य में जांच की लागत कम करने में योगदान दे सकती है।
-
व्यक्तिगत चिकित्सा (Precision Oncology) को बढ़ावा देगी।
-
भारतीय बायोटेक और जीनोमिक अनुसंधान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगी।
प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी की दिशा में बड़ा कदम
यह तकनीक प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी (Precision Oncology) की अवधारणा को मजबूत करती है। प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी का उद्देश्य प्रत्येक मरीज की आनुवंशिक और जैविक विशेषताओं के आधार पर उपचार तय करना है। इससे अनावश्यक उपचार कम होते हैं और मरीज को अधिक प्रभावी एवं लक्षित चिकित्सा मिल सकती है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पेटेंट भारत में कैंसर निदान, जीनोमिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित चिकित्सा अनुसंधान को नई गति देगा। इससे भविष्य में बड़े पैमाने पर ऐसी तकनीकों का विकास संभव होगा, जिनके माध्यम से आम लोगों तक प्रारंभिक कैंसर जांच अधिक सुलभ बनाई जा सके।
कैंसर की शुरुआती पहचान क्यों है जरूरी?
विश्वभर के चिकित्सा विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि कैंसर का जितना जल्दी पता चलता है, उसके सफल उपचार की संभावना उतनी अधिक होती है। प्रारंभिक पहचान से—
-
उपचार अधिक प्रभावी होता है।
-
सर्जरी की जटिलता कम हो सकती है।
-
उपचार पर आने वाला खर्च कम हो सकता है।
-
मरीज की जीवन प्रत्याशा और जीवन गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
-
मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।

