राजस्थान में यमुना जल परियोजना का नया मॉडल, नहर नहीं पाइलाइन से पहुंचेगा पानी शेखावाटी के तीन जिलों को मिलेगा बड़ा फायदा

The CSR Journal Magazine
राजस्थान के जल प्रबंधन इतिहास में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार की मौजूदगी में राजस्थान और हरियाणा के बीच हुई अहम बैठक के बाद यमुना जल परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बन गई है। इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि हरियाणा से राजस्थान तक यमुना का पानी पारंपरिक खुली नहर के बजाय आधुनिक भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए पहुंचाया जाएगा। इससे पानी की बर्बादी रोकने के साथ-साथ शेखावाटी क्षेत्र के लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

पाइपलाइन से पहुंचेगा यमुना का पानी

नई दिल्ली में आयोजित त्रिपक्षीय बैठक में केंद्र, राजस्थान और हरियाणा के अधिकारियों ने परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनाई। प्रस्तावित योजना के अनुसार हरियाणा से राजस्थान तक विशाल भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिससे पानी सीधे जलाशयों और वितरण तंत्र तक पहुंचाया जाएगा। इस तकनीक को जल संरक्षण और बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पानी की बर्बादी पर लगेगी रोक

पारंपरिक नहरों में गर्मी के कारण वाष्पीकरण और रिसाव से बड़ी मात्रा में पानी नष्ट हो जाता है। पाइपलाइन आधारित प्रणाली लागू होने से इस नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकेगा। साथ ही पानी के प्रदूषित होने या रास्ते में अवैध रूप से चोरी होने की संभावना भी कम हो जाएगी। इससे लोगों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने में आसानी होगी।

किसानों को नहीं गंवानी पड़ेगी जमीन

खुली नहर निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता होती है, जिससे किसानों को अपनी जमीन छोड़नी पड़ती है। लेकिन भूमिगत पाइपलाइन बिछाने से भूमि का स्थायी अधिग्रहण कम होगा और किसानों की कृषि गतिविधियां भी प्रभावित नहीं होंगी। इससे परियोजना के क्रियान्वयन में आने वाली कई प्रशासनिक और कानूनी बाधाएं भी कम होंगी।

शेखावाटी के तीन जिलों को मिलेगा लाभ

राज्य सरकार के अनुसार इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ शेखावाटी क्षेत्र को मिलेगा। चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ है। यमुना का पानी मिलने से लाखों लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को भी नया आधार मिलेगा।

किशाऊ बांध समेत तीन परियोजनाओं का होगा समन्वय

बैठक में लंबे समय से लंबित किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े विषयों पर भी सहमति बनी। इसके अलावा रेणुकाजी बांध, लखवार जल विद्युत परियोजना और किशाऊ बांध को एकीकृत जल प्रबंधन नेटवर्क के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। इन परियोजनाओं से मिलने वाले अतिरिक्त जल का लाभ राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों को भी मिलेगा।

बारिश के अतिरिक्त पानी का भी होगा उपयोग

हरियाणा सरकार ने संकेत दिए हैं कि मानसून के दौरान होने वाली अतिरिक्त वर्षा के पानी को विशेष जलाशयों में संरक्षित कर पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से राजस्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे बारिश के पानी का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा और जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी।

किसानों, उद्योगों और आम जनता को मिलेगा फायदा

योजना के तहत शेखावाटी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा भविष्य में स्थापित होने वाले उद्योगों को भी जल उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

संयुक्त डीपीआर को अंतिम मंजूरी का इंतजार

राजस्थान और हरियाणा के जल संसाधन विभागों की संयुक्त तकनीकी टीम विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर चुकी है। रिपोर्ट को केंद्रीय जल आयोग के पास तकनीकी परीक्षण और वित्तीय स्वीकृति के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक पाइपलाइन नेटवर्क की तकनीकी व्यवहार्यता को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। परियोजना को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य से जोड़ते हुए मिशन मोड में आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

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